'हनुमान अंश' के डायरेक्टर संग काम करने वाले थे मुश्ताक खान: निर्देशक ने बयां किया दर्द

'हनुमान अंश' के डायरेक्टर संग काम करने वाले थे मुश्ताक खान: निर्देशक ने बयां किया दर्द

भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत में अपनी सहज अदाकारी से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले जाने-माने चरित्र अभिनेता मुश्ताक खान के साथ जुड़े संस्मरणों को लेकर फिल्म इंडस्ट्री के लोग लगातार अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। इसी कड़ी में पौराणिक व सामाजिक विषयों पर आधारित चर्चित फिल्म 'हनुमान अंश' के निर्देशक ने एक भावुक बयान में खुलासा किया है कि वे जल्द ही मुश्ताक खान के साथ एक नए सिनेमाई प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने वाले थे। निर्देशक ने बताया कि प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी थी और मुश्ताक खान भी उस खास किरदार को पर्दे पर निभाने के लिए खासे उत्साहित थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और यह सहभागिता धरातल पर उतरने से पहले ही यादों में तब्दील हो गई।

निर्देशक ने मुश्ताक खान के साथ हुई बैठकों, उनकी सकारात्मक ऊर्जा और अभिनय के प्रति उनके गहरे समर्पण को याद करते हुए दिल को छू लेने वाली बातें कही हैं।

'किरदार सुनते ही खिल उठा था उनका चेहरा, तुरंत दी थी रजामंदी'

'हनुमान अंश' के निर्देशक ने साझा किया कि जब उन्होंने अपनी आगामी कहानी की स्क्रिप्ट तैयार की, तो उसमें एक ऐसा संजीदा और प्रभावशाली किरदार था, जिसके लिए उनकी पहली और एकमात्र पसंद मुश्ताक खान ही थे। निर्देशक के मुताबिक, जब वे कहानी का नरेशन देने के लिए मुश्ताक खान से मिले, तो उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ हर दृश्य की बारीकी को समझा।

निर्देशक ने बताया कि मुश्ताक जी की सबसे बड़ी खूबी यही थी कि वे किसी भी भूमिका को केवल एक काम की तरह नहीं लेते थे, बल्कि उसमें अपनी आत्मा फूंकने की तैयारी में जुट जाते थे। किरदार की पृष्ठभूमि, संवादों के उतार-चढ़ाव और बॉडी लैंग्वेज को लेकर उन्होंने मौके पर ही कई बेहतरीन सुझाव दिए थे। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था कि यह प्रोजेक्ट दर्शकों को एक नया संदेश देगा और वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।

'सेट पर उनका होना पूरी यूनिट के लिए स्कूल जैसा होता था'

निर्देशक ने बातचीत के दौरान मुश्ताक खान के सहज और मिलनसार स्वभाव की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि मुश्ताक जी जैसे वरिष्ठ कलाकार के साथ काम करना किसी भी निर्देशक, विशेषकर नई पीढ़ी के फिल्मकारों के लिए, एक खुली किताब या अभिनय के स्कूल जैसा अनुभव होता था। दशकों का अनुभव होने के बावजूद उनके भीतर तनिक भी अहंकार नहीं था।

वे सेट पर हर छोटे-बड़े तकनीशियन, जूनियर आर्टिस्ट और स्पॉट बॉय के साथ बेहद आत्मीयता से पेश आते थे। निर्देशक ने कहा कि आज के दौर में जब कई कलाकार स्क्रीन-टाइम और वैनिटी वैन की सुविधाओं पर ज्यादा जोर देते हैं, मुश्ताक खान केवल इस बात पर ध्यान केंद्रित रखते थे कि कैमरे के सामने उनका शॉट कितना प्रभावशाली और स्वाभाविक नजर आ रहा है।

'अधूरी रह गई ख्वाहिश, उनकी भरपाई सिनेमा में नामुमकिन'

प्रोजेक्ट की शूटिंग शुरू होने से पहले ही इस योजना के अधूरा रह जाने पर निर्देशक ने गहरा अफसोस जताया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि एक निर्देशक के तौर पर उनके साथ फ्रेम साझा न कर पाने का मलाल ताउम्र रहेगा। उस किरदार के लिए मुश्ताक जी के नाम का विकल्प तलाशना अब बेहद मुश्किल चुनौती बन गया है, क्योंकि जिस सादगी और ठहराव के साथ वे डायलॉग डिलीवरी करते थे, वह विधा अब दुर्लभ होती जा रही है।

निर्देशक ने अंत में कहा कि मुश्ताक खान ने अपने लंबे फिल्मी सफर में 'वेलकम', 'हेरा फेरी', 'दिल है कि मानता नहीं' जैसी दर्जनों फिल्मों में जो छाप छोड़ी है, वह आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी। वे भले ही इस नए प्रोजेक्ट का हिस्सा न बन सके हों, लेकिन उनकी जिंदादिली और कला के प्रति समर्पण हमेशा हमारी यूनिट की यादों में जिंदा रहेगा।