3 साल की मासूम, 60 साल का बुजुर्ग और 80 लाख का 'सौदा': रूह कंपा देने वाली साजिश का पर्दाफाश

3 साल की मासूम, 60 साल का बुजुर्ग और 80 लाख का 'सौदा': रूह कंपा देने वाली साजिश का पर्दाफाश

अपराध और लालच की अंधी दुनिया से एक ऐसा रूह कंपा देने वाला और अमानवीय मामला सामने आया है, जिसने समाज, कानून और रिश्तों की मर्यादा को पूरी तरह तार-तार कर दिया है। चंद रुपयों और जायदाद की हवस में इंसान किस हद तक गिर सकता है, इसकी बानगी इस दिल दहला देने वाले खुलासे से मिलती है। महज 3 साल की एक मासूम बच्ची, जिसकी उम्र अभी ठीक से बोलना सीखने और खिलौनों से खेलने की है, उसे 80 लाख रुपये के लालच में 60 साल के एक बुजुर्ग के हाथों 'सौदा' कर सौंपने की घिनौनी साजिश रची गई। लेकिन इस खौफनाक कहानी का सच केवल इस अमानवीय सौदे तक ही सीमित नहीं है; पुलिस जांच में जैसे-जैसे कड़ियां जुड़ीं, इस सौदेबाजी के तार कुछ ही दिन पहले हुई बच्ची की सगी बड़ी बहन की सनसनीखेज हत्या से जुड़े निकले। इस दोहरे अपराध के खुलासे के बाद पूरे इलाके में सनसनी और आक्रोश का माहौल है।

80 लाख की रकम और मासूमियत की बोली

पुलिस और जांच एजेंसियों से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले का ताना-बाना पारिवारिक लालच, बिचौलियों के नेटवर्क और भारी-भरकम रकम की सौदेबाजी के इर्द-गिर्द बुना गया था। 60 वर्षीय बुजुर्ग, जिसके पास कथित तौर पर अकूत संपत्ति थी और जो लंबे समय से एक वारिस या घर संभालने के नाम पर अजीबोगरीब शर्तों के साथ रिश्ते की तलाश में था, उसने दलालों के जरिए इस परिवार से संपर्क साधा था।

सौदा यह तय हुआ था कि लगभग 80 लाख रुपये की नकद और संपत्तिक लेन-देन के बदले 3 साल की बच्ची के भविष्य और उसकी जिंदगी का फैसला उस बुजुर्ग के हवाले कर दिया जाएगा। सामाजिक रीति-रिवाजों और फर्जी कागजी समझौतों की आड़ में इस अवैध और घिनौने सौदे को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही थी, लेकिन किसी मुखबिर की सतर्कता और परिजनों के बीच उठे विवाद ने पूरे खेल का भंडाफोड़ कर दिया।

बड़ी बहन की हत्या बनी इस साजिश का सबसे काला अध्याय

जब पुलिस ने 3 साल की बच्ची के इस संदिग्ध सौदे की गहराई से तफ्तीश शुरू की, तो जांच अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। पता चला कि बच्ची की 18 वर्षीय बड़ी बहन की कुछ समय पहले हुई संदेहास्पद मौत कोई सामान्य हादसा या आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और बेरहम कत्ल था।

जांच में सामने आया है कि बड़ी बहन को इस अवैध सौदे और 80 लाख रुपये के लेन-देन की भनक लग चुकी थी। उसने अपनी छोटी मासूम बहन की जिंदगी को इस तरह बर्बाद होते देख पुरजोर विरोध किया था और आरोपियों को पुलिस व समाज के सामने बेनकाब करने की खुली चेतावनी दी थी। अपने रास्ते का सबसे बड़ा कांटा हटाने और 80 लाख की डील को सुरक्षित रखने के लिए साजिशकर्ताओं ने बड़ी बहन को रास्ते से हटाने की साजिश रची और उसकी निर्मम हत्या कर मामले को दबाने की कोशिश की थी।

पुलिस का शिकंजा, कई आरोपी सलाखों के पीछे

बड़ी बहन के कत्ल के तार जुड़ते ही पुलिस ने मामले में हत्या (धारा 103 BNS), मानव तस्करी (Human Trafficking), पोक्सो (POCSO) एक्ट और बाल विवाह निषेध अधिनियम की अत्यंत संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी।

पुलिस ने इस पूरे सिंडिकेट में शामिल 60 वर्षीय बुजुर्ग, मुख्य बिचौलियों और परिवार के उन संदिग्ध सदस्यों को हिरासत में ले लिया है जिन्होंने चंद रुपयों के लिए अपनी ही कोख और खून का सौदा कर दिया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक टीम ने बड़ी बहन की हत्या से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड्स और बैंक लेन-देन के पुख्ता सुबूत जुटा लिए हैं, जिससे आरोपियों को अदालत में सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

बाल अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस खौफनाक वारदात के सामने आने के बाद बाल कल्याण समिति (CWC) ने 3 साल की मासूम बच्ची को तत्काल अपनी सुरक्षा और संरक्षण में ले लिया है। सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि 21वीं सदी में भी बेटियों को वस्तु समझकर बेचने और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों की आवाज खामोश कर देने वाली यह मानसिकता किसी अभिशाप से कम नहीं है। स्थानीय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल चलाने की सिफारिश करने की बात कही है।