कहीं कुंडली में ये 4 बड़े दोष तो नहीं; जानें विवाह में आ रही रुकावटों के अचूक उपाय

कहीं कुंडली में ये 4 बड़े दोष तो नहीं; जानें विवाह में आ रही रुकावटों के अचूक उपाय

उम्र सही है, शिक्षा और योग्यता में कोई कमी नहीं, परिवार भी सुयोग्य है, फिर भी शादी की बात आगे नहीं बढ़ पा रही। कई बार तो रिश्तेदार और माता-पिता बातचीत पक्की समझ लेते हैं, लेकिन अंतिम क्षणों में किसी न किसी मामूली बात पर रिश्ता टूट जाता है। यदि यह स्थिति एक या दो बार नहीं, बल्कि बार-बार दोहराई जा रही है, तो इसे केवल किस्मत का खेल मानकर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, विवाह का तय होना और वैवाहिक सुख प्राप्त होना कुंडली के विशिष्ट ग्रहों, भावों और नक्षत्रों की अनुकूलता पर निर्भर करता है। जब जन्म कुंडली में विवाह कारक ग्रह पीड़ित हों या कोई गंभीर दोष सक्रिय हो, तो व्यक्ति को 'विवाह बाधा' का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं कि कुंडली में ऐसे कौन-से प्रमुख दोष हैं जो बनते हुए रिश्ते को बिगाड़ देते हैं और इनके निवारण के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।

1. सप्तम भाव और उसके स्वामी (सप्तमेश) का पीड़ित होना

ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली का सातवां भाव (सप्तम भाव) सीधे तौर पर विवाह, जीवनसाथी और दांपत्य जीवन का कारक होता है।

  • अशुभ ग्रहों की दृष्टि: यदि सप्तम भाव में राहु, केतु, शनि या सूर्य जैसे क्रूर और पापी ग्रह विराजमान हों, या उनकी पूर्ण दृष्टि इस भाव पर पड़ रही हो, तो विवाह की बातचीत में अकारण गलतफहमियां पैदा होती हैं।

  • सप्तमेश का 6ठे, 8वें या 12वें भाव में जाना: यदि सातवें घर का मालिक (सप्तमेश) त्रिक भावों (6, 8 या 12वें भाव) में नीच राशि में या अस्त होकर बैठ जाए, तो विवाह तय होने में अंतिम समय पर अड़चन आती है या बातचीत अचानक बंद हो जाती है।

2. मांगलिक दोष (Mangal Dosh) का कड़ा प्रभाव

विवाह में देरी और रिश्ते टूटने का सबसे चर्चित और प्रभावी कारण मांगलिक दोष माना जाता है।

जब किसी जातक की कुंडली में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल देव विराजमान होते हैं, तो व्यक्ति मांगलिक कहलाता है। लग्न और सप्तम भाव का मंगल स्वभाव में उग्रता और वैचारिक मतभेद लाता है, जबकि अष्टम भाव का मंगल बातचीत के दौरान अप्रत्याशित बाधाएं खड़ी करता है। यदि मंगल पर किसी शुभ ग्रह जैसे बृहस्पति की दृष्टि न हो, तो रिश्ता सगाई के स्तर तक पहुंचकर भी टूट सकता है।

3. गुरु चांडाल दोष और कालसर्प दोष

वैवाहिक जीवन के कारकों में देवगुरु बृहस्पति (कन्याओं के लिए पति के कारक) और शुक्र देव (पुरुषों के लिए पत्नी के कारक) की भूमिका सर्वोपरि होती है।

  • गुरु चांडाल दोष: जब गुरु के साथ राहु की युति होती है, तो गुरु चांडाल दोष बनता है। इसके प्रभाव से जातक के निर्णयों में भ्रम पैदा होता है, सामने वाले पक्ष को लेकर मन में बेवजह अविश्वास बैठ जाता है और अच्छा रिश्ता भी हाथ से निकल जाता है।

  • कालसर्प दोष: यदि कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाएं, तो कालसर्प योग बनता है। इसका प्रभाव व्यक्ति के हर महत्वपूर्ण काम में अड़चनें लाता है, विशेषकर जब तक जातक 28 या 32 वर्ष की आयु पार नहीं कर लेता, तब तक विवाह के प्रयास निष्फल होते रहते हैं।

4. पितृ दोष और सूर्य-शनि की युति

यदि परिवार में पूर्वजों की तृप्ति के निमित्त श्राद्ध या तर्पण न हुआ हो, तो कुंडली में पितृ दोष निर्मित होता है। पितृ दोष का एक प्रमुख लक्षण यह होता है कि घर के योग्य युवक-युवतियों का विवाह तय नहीं हो पाता या वंश वृद्धि में रुकावट आती है।

इसके अलावा, कुंडली में सूर्य और शनि का एक साथ बैठना या एक-दूसरे को देखना भी विवाह में भारी विलंब और बातचीत में झूठी अफवाहें फैलने का कारण बनता है, जिससे रिश्ता पक्का होते-होते रद्द हो जाता है।

विवाह की रुकावटें दूर करने के अचूक और सरल उपाय

यदि आपके या आपके परिवार के किसी सदस्य के विवाह में लगातार ऐसी बाधाएं आ रही हैं, तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ये उपाय अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं:

  • गुरुवार को बृहस्पति की पूजा: गुरुवार के दिन पीले वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करें। केले के वृक्ष की जड़ में जल, हल्दी, चने की दाल और गुड़ अर्पित कर घी का दीपक जलाएं।

  • शिव-पार्वती का रुद्राभिषेक: वैवाहिक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें। कन्याएं विशेष रूप से माता पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें और 'ॐ नमः मनोभिलाषितं वरं देहि वरदायिनी नमः' मंत्र का जप करें।

  • शुक्र को मजबूत करने का उपाय: पुरुषों के विवाह में बाधा आ रही हो, तो वे शुक्रवार के दिन मां दुर्गा या मां लक्ष्मी को सफेद मिष्ठान (खीर या रसगुल्ला) का भोग लगाएं और गाय को हरा चारा व आटे का पेड़ा खिलाएं।

  • पुखराज या हल्दी की गांठ: किसी योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर देवगुरु बृहस्पति का रत्न पुखराज धारण करें, या गुरुवार के दिन पीले धागे में हल्दी की गांठ बांधकर गले या बाजू में पहनें।

  • जल में हल्दी डालकर स्नान: रोजाना नहाने के पानी में एक चुटकी पिसी हल्दी डालकर स्नान करने से गुरु ग्रह का नकारात्मक प्रभाव दूर होता है और विवाह के शुभ योग शीघ्र बनने लगते हैं।