डीके शिवकुमार के बयान पर मचा सियासी घमासान, भड़की BJP ने पूछा- नाम सार्वजनिक क्यों नहीं करते?

डीके शिवकुमार के बयान पर मचा सियासी घमासान, भड़की BJP ने पूछा- नाम सार्वजनिक क्यों नहीं करते?

कर्नाटक की राजनीति में उस वक्त नया भूचाल आ गया, जब विधानसभा के पटल पर चर्चा के दौरान विधायकों के निजी जीवन को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सदन में बयान दिया कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बेंगलुरु आने वाले कई विधायकों ने शहर में आकर 'दो-दो शादियां' कर रखी हैं और अगर जरूरत पड़े तो वे ऐसे करीब एक दर्जन विधायकों की पूरी सूची पेश कर सकते हैं। इस व्यक्तिगत और सनसनीखेज टिप्पणी के सामने आते ही मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूरी तरह हमलावर हो गई है। बीजेपी ने इसे सदन की गरिमा के खिलाफ और जनप्रतिनिधियों का चरित्र हनन करार देते हुए मांग की है कि अगर शिवकुमार के पास सबूत हैं, तो वे उन विधायकों के नाम उजागर करें, वर्ना राज्य की जनता से बिना शर्त माफी मांगें।

विधानसभा में आबादी पर चर्चा के दौरान निकला 'दो शादियों' का विवाद

यह पूरा विवाद कर्नाटक विधानसभा में सूखे की स्थिति और बेंगलुरु पर तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दबाव पर हो रही आधिकारिक बहस के दौरान शुरू हुआ। सदन में अपनी बात रखते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि केम्पेगौड़ा ने बेंगलुरु को बसाया, केंगल हनुमंतैया ने विधान सौधा का निर्माण कराया और पूर्व मुख्यमंत्री एस. एम. कृष्णा ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। उन्होंने आगे कहा कि जो भी व्यक्ति एक बार बेंगलुरु आता है, वह कभी वापस नहीं लौटता।

इसी क्रम में विधायकों की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने तंज कसा कि बाहर से आने वाले जनप्रतिनिधि भी यहीं बस जाते हैं। शिवकुमार ने दावा किया कि उनके पास ऐसे कम से कम 12 विधायकों की जानकारी है जिन्होंने बेंगलुरु आने के बाद दूसरा विवाह कर लिया। उन्होंने यह भी कहा कि वे धारवाड़, कारवार और दक्षिण कन्नड़ (मंगलुरु) जैसे जिलों के विधायकों का पूरा इतिहास जानते हैं और चाहें तो नाम गिना सकते हैं, हालांकि उन्होंने उस वक्त किसी भी विधायक का नाम सार्वजनिक नहीं किया।

बीजेपी का तीखा पलटवार: 'हर विधायक के सिर पर लटक गई शक की तलवार'

डीके शिवकुमार की इस टिप्पणी पर विपक्ष के नेता (LoP) आर. अशोक ने कड़ा एतराज जताते हुए इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अनुचित बयान बताया। अशोक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि गंभीर समस्याओं पर बहस के दौरान विधायकों के निजी वैवाहिक जीवन पर इस तरह की ओछी टिप्पणी करने की कोई जरूरत नहीं थी।

आर. अशोक ने चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को उन सभी विधायकों के नाम तुरंत सार्वजनिक करने चाहिए ताकि स्थिति साफ हो सके। उन्होंने कहा कि इस तरह का अधूरा और हवा-हवाई बयान देने से दूसरे जिलों से बेंगलुरु आकर काम करने वाले हर एक विधायक पर संदेह की तलवार लटक गई है और पूरे राजनीतिक वर्ग की साख जनता की नजरों में धूमिल हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी जोड़ा कि गनीमत है कि उनका जन्म और परवरिश बेंगलुरु में ही हुई है।

सदन की गरिमा और सोशल मीडिया पर बढ़ता आक्रोश

वरिष्ठ भाजपा विधायक एस. सुरेश कुमार ने भी इस मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि यदि यह बात हल्के-फुल्के अंदाज या मजाक में भी कही गई थी, तब भी विधानसभा जैसे गरिमामयी मंच से ऐसी टिप्पणियां करना बिल्कुल अशोभनीय है। उन्होंने कहा कि इस बयान ने आम जनता के बीच एक 'अस्वस्थ जिज्ञासा' और नकारात्मक धारणा को जन्म दिया है।

सुरेश कुमार ने मांग की कि सरकार को उन विधायकों की पहचान उजागर करनी चाहिए जिन्होंने दो घर बसा रखे हैं, अन्यथा राज्य की जनता सभी विधायकों को संदेह और उपहास की दृष्टि से देखेगी। सोशल मीडिया पर भी यह क्लिप तेजी से प्रसारित हो रही है, जहां राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरीकरण और बुनियादी ढांचे जैसे गंभीर विषय से ध्यान भटकाकर इसे व्यक्तिगत आरोपों में बदलना राज्य की संसदीय परंपरा के अनुकूल नहीं है। फिलहाल इस बयान ने राज्य की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है और गेंद अब सत्ताधारी खेमे के पाले में है कि वे नाम सार्वजनिक करते हैं या बयान पर विराम लगाते हैं।