चुनाव बहिष्कार की अपील पर TMC सांसद डेरेक ओ'ब्रायन का अभिजीत दीपके को दो-टूक जवाब

चुनाव बहिष्कार की अपील पर TMC सांसद डेरेक ओ'ब्रायन का अभिजीत दीपके को दो-टूक जवाब

देश में चुनावी प्रक्रिया, मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता और मतदान प्रणाली को लेकर छिड़ी तीखी बहस के बीच विपक्षी दलों की रणनीति पर नया सियासी घमासान शुरू हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और युवा राजनीतिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों से अपील की थी कि यदि उन्हें लगता है कि चुनावी प्रणाली में धांधली हो रही है और नतीजे पहले से तय हैं, तो उन्हें ऐसे चुनावों का बहिष्कार कर देना चाहिए और मैदान में उतरना बंद करना चाहिए। दीपके के इस आह्वान पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने कड़ा ऐतराज जताते हुए दो-टूक जवाब दिया है। ओ'ब्रायन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि विपक्ष ने चुनाव लड़ना छोड़ दिया, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) बिना किसी मुकाबले के सभी सीटें जीत लेगी और फिर मनमाने तरीके से संविधान में संशोधन कर अपने सारे कदमों को कानूनी जामा पहना देगी।

अभिजीत दीपके का तर्क: 'धांधली वाले चुनावों में खेलकर उसे वैधता क्यों दे रहा विपक्ष?'

अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों की भूमिका पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि जब संस्थागत स्तर पर कथित रूप से वोट काटे जा रहे हों, विपक्षी नेताओं और दलों को तोड़ा जा रहा हो, तब चुनाव लड़ते रहने का क्या औचित्य रह जाता है। दीपके ने कहा था:

"हां, चुनावों में धांधली हो रही है। लेकिन जब आप ऐसी व्यवस्था में लगातार हिस्सा लेते हैं, तो आप अनजाने में इन चुनावों को वैधता (legitimacy) प्रदान करते हैं और यह भ्रम बनाए रखने में मदद करते हैं कि देश में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हो रहे हैं। आप यह नहीं कह सकते कि खेल में हेरफेर है और फिर भी आप उसमें खेलते रहें।"

दीपके ने सवाल उठाया था कि क्या विपक्षी दल सिर्फ अपने अस्तित्व के डर से मैदान में डटे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था में टिके रहने की कोशिश करना, जो जब चाहे चुनी हुई सरकारों और विधायकों को अपने पाले में कर सकती है, वास्तविक अस्तित्व को बचाना नहीं है।

डेरेक ओ'ब्रायन का पलटवार: 'मैदान छोड़ना कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र से धोखा'

अभिजीत दीपके की इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विपक्ष की भागीदारी का पुरजोर बचाव किया। ओ'ब्रायन ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए चुनावी मैदान में बने रहना अनिवार्य है, भले ही परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।

डेरेक ओ'ब्रायन ने लिखा:

"विपक्ष द्वारा चुनावों का बहिष्कार करने का सीधा अर्थ होगा = भाजपा का सभी सीटें जीत जाना। एक बार जब ऐसा हो जाएगा, तो वे अपने सभी मनमाने फैसलों और अपराधों को वैध बनाने के लिए संविधान में संशोधन कर देंगे।"

टीएमसी नेता ने जमीनी कार्यकर्ताओं का हवाला देते हुए आगे कहा:

"चुनाव नहीं लड़ने का मतलब उन लाखों समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ विश्वासघात करना होगा, जो जमीन पर अपनी जान जोखिम में डालकर लोकतंत्र के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यही कारण है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए चुनाव लड़ना भी जरूरी है और साथ ही स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था के लिए लगातार आवाज उठाना और संघर्ष करना भी उतना ही आवश्यक है।"

चुनाव आयोग पर बढ़ता दबाव और विपक्ष के भीतर दोहरी रणनीति की बहस

गौरतलब है कि हाल के दिनों में चुनाव आयोग, वोटर लिस्ट में नामों के कथित विलोपन और क्षेत्रीय दलों के राजनीतिक संकट को लेकर विपक्ष लगातार मुखर रहा है। पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक खींचतान और कानूनी विवाद चरम पर हैं। जहां एक तरफ एक्टिविस्ट और नए राजनीतिक मंच चुनाव प्रक्रिया के पूर्ण बहिष्कार की वकालत कर रहे हैं ताकि व्यवस्था पर नैतिक दबाव बनाया जा सके, वहीं टीएमसी, कांग्रेस और अन्य मुख्यधारा के विपक्षी दल वॉकओवर देने के सख्त खिलाफ हैं। विपक्षी दलों का मानना है कि संसद और विधानसभाओं से बाहर रहकर सत्ता पक्ष को खुला मैदान देना लोकतंत्र के लिए आत्मघाती कदम साबित होगा। डेरेक ओ'ब्रायन के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि विपक्षी दल संस्थागत सुधारों की लड़ाई लड़ते हुए भी चुनावी मुकाबले से पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।