अमेरिकी राष्ट्रपति ने शेयर किया नया विवादित नक्शा; तेहरान के सीजफायर प्रस्ताव को ठुकराकर भड़काई नई आग
मध्य-पूर्व के जलक्षेत्र में जारी भीषण सैन्य टकराव, तेल टैंकरों की आवाजाही पर लगे ब्रेक और गहराते वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भूचाल ला दिया है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस आपूर्ति की जीवन रेखा माने जाने वाले रणनीतिक समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर चल रहे तनाव के बीच ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक नया नक्शा साझा किया है। इस नक्शे में सदियों पुराने इस ऐतिहासिक चोकपॉइंट का नाम बदलकर सीधे 'ट्रंप स्ट्रेट' (Trump Strait) दर्ज कर दिया गया है।
ट्रंप का यह भड़काऊ और अप्रत्याशित कदम ठीक उस समय सामने आया है जब ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के जरिए सात दिनों के भीतर जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और शांति वार्ता शुरू करने का एक औपचारिक प्रस्ताव वाशिंगटन को भेजा था। ट्रंप द्वारा उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए नक्शे पर अपना नाम चस्पा करने से खाड़ी क्षेत्र में बारूद की गंध और तेज हो गई है।
ईरान की 7 दिन की सीजफायर पेशकश को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा
दरअसल, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक कूटनीतिक खाका पेश किया था। ईरान का कहना था कि यदि अमेरिका अपने नौसैनिक घेराबंदी (Naval Blockade) को हटा ले, ईरानी तेल बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे और लेबनान तक विस्तारित युद्धविराम पर राजी हो, तो तेहरान महज 7 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल कर देगा।
लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ईरान की एक 'चाल' बताते हुए खारिज कर दिया। 'द वाशिंगटन पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने साफ कहा कि तेहरान को कभी भी परमाणु बम बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी और अगर ईरान ने वाशिंगटन की पूर्ण शर्तों को नहीं माना, तो अमेरिकी सेना नए सिरे से भारी बमबारी और सैन्य अभियान शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रस्ताव ठुकराने के चंद घंटों बाद ही ट्रंप ने 'ट्रंप स्ट्रेट' वाला नक्शा पोस्ट कर यह संदेश दे दिया कि वे तेहरान की किसी भी शर्त के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
'अमेरिकी नियंत्रण में है रास्ता, नाम भी हमारा होगा': ट्रंप का तर्क
यह पहला मौका नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर अपने नियंत्रण का दावा किया हो। इससे पहले भी ट्रंप इस जलमार्ग को 'नया अमेरिकी क्षेत्र' (New US Territory) घोषित करने का विचार उछाल चुके हैं।
ट्रंप का तर्क है कि चूंकि अमेरिकी नौसेना ने अपनी ताकत और नाकेबंदी के जरिए इस पूरे समुद्री मार्ग को अपने नियंत्रण में ले रखा है, इसलिए इसका नाम भी उन्हीं के नाम पर 'ट्रंप स्ट्रेट' होना चाहिए। उन्होंने पोस्ट में तंज कसते हुए लिखा, "अब जब यह पूरी तरह अमेरिका के नियंत्रण में है, तो इसका नाम बदलकर ट्रंप स्ट्रेट क्यों न कर दिया जाए? यह पहले से कहीं ज्यादा चर्चित और हॉट होगा!" हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत किसी भी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य का नाम इस तरह एकतरफा ढंग से बदलना कानूनी रूप से अवैध माना जाता है।
भौगोलिक नाम बदलने का पुराना ट्रंप अंदाज
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वैश्विक भौगोलिक स्थानों के नाम बदलने का यह सिलसिला लगातार विवादों में रहा है:
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मेक्सिको की खाड़ी (Gulf of Mexico): अपने कार्यकाल के पहले दिन ही ट्रंप ने इसे प्रशासनिक रूप से 'गल्फ ऑफ अमेरिका' कहने का आदेश दिया था।
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लेक ओंटारियो (Lake Ontario): कनाडा के साथ छिड़े व्यापार युद्ध के दौरान ट्रंप ने इस ऐतिहासिक झील का नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' रखने का कार्यकारी आदेश जारी कर दिया था।
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माउंट डेनाली: अलास्का की सबसे ऊंची चोटी का नाम बदलकर उन्होंने दोबारा 'माउंट मैकिन्ले' कर दिया था।
अब सदियों पुराने पारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाले 'होर्मुज' का नाम बदलना इसी मनोवैज्ञानिक युद्ध का ताजा हिस्सा माना जा रहा है।
क्या फिर भड़केगी महायुद्ध की आग?
ट्रंप के इस नक्शे और आक्रामक तेवर के बाद तेहरान में भारी आक्रोश है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पहले ही चेतावनी दे रखी है कि अगर अमेरिका ने जलडमरूमध्य में जहाजों पर पूर्ण कब्जा करने या ईरान के जलक्षेत्र का उल्लंघन करने की कोशिश की, तो वे पूरे मार्ग में समुद्री बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाकर और एंटी-शिप मिसाइलों से हर पोत को निशाना बनाकर इसे 'जलती हुई कब्रगाह' में तब्दील कर देंगे।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह शक्ति प्रदर्शन अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले घरेलू वोटरों को मजबूत नेता की छवि दिखाने का प्रयास हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस टकराव से वैश्विक कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। कूटनीति के रास्ते बंद होने और नक्शों पर शक्ति की इस जंग ने मध्य-पूर्व को एक ऐसे पूर्णकालिक युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक तबाही का सबब बन सकती है।