जब कोई नहीं जानता था तब शाहरुख खान ने बढ़ाया था मदद का हाथ, एसएस राजामौली ने याद किया वो किस्सा
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे सफल, दूरदर्शी और ब्लॉकबस्टर निर्देशकों का नाम लिया जाएगा, एसएस राजामौली का नाम शीर्ष पर रहेगा। 'बाहुबली', 'बाहुबली 2' और ऑस्कर विजेता 'आरआरआर' जैसी कालजयी फिल्मों से पूरी दुनिया में भारतीय सिनेमा का डंका बजाने वाले राजामौली आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। देश के कोने-कोने से लेकर हॉलीवुड के दिग्गज तक उनकी फिल्मों के मुरीद हैं। हालांकि, हर महान सफर की शुरुआत संघर्ष और अनिश्चितताओं के बीच होती है। खुद एसएस राजामौली के जीवन में भी एक ऐसा दौर था, जब वे दक्षिण भारत में तो बड़े निर्देशक बन चुके थे, लेकिन उत्तर भारत और हिंदी सिनेमा के बाजार में उन्हें कोई खास पहचान नहीं मिली थी। उसी दौर को याद करते हुए राजामौली ने बॉलीवुड के 'बादशाह' शाहरुख खान से जुड़ा एक बेहद भावुक और यादगार किस्सा साझा किया है, जिसने सिनेप्रेमियों का दिल जीत लिया है।
सिनेमा जगत में अक्सर स्टारडम की दीवारें नए कलाकारों और क्षेत्रीय फिल्मकारों के लिए मुश्किलें खड़ी करती हैं, लेकिन शाहरुख खान की दरियादिली और बड़े दिल ने उस दौर में भी अपनी छाप छोड़ी थी। राजामौली ने बताया कि जब वे अपनी एक फिल्म के हिंदी प्रमोशन और रिलीज को लेकर दिल्ली, मुंबई और उत्तर भारत के दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, तब किंग खान ने बिना किसी झिझक के उनका साथ दिया था। यह वाकया उस समय का है जब पैन-इंडिया सिनेमा की लहर शुरू भी नहीं हुई थी और दक्षिण भारतीय सिनेमा को उत्तर भारत में वो स्वीकार्यता नहीं मिलती थी जो आज देखने को मिलती है।
फिल्म 'मक्खी' (ईगा) का वो दौर, जब हिंदी दर्शकों तक पहुंचना था सबसे बड़ी चुनौती
यह दिलचस्प वाकया साल 2012 का है, जब एसएस राजामौली ने तेलुगु में 'ईगा' (Eega) बनाई थी। एक मक्खी के पुनर्जन्म और बदले की अनोखी कहानी पर आधारित इस फिल्म को उन्होंने हिंदी में 'मक्खी' (Makkhi) नाम से डब करके उत्तर भारत के बाजारों में उतारने का फैसला किया था। उस समय राजामौली के पास न तो आज जैसी वैश्विक ख्याति थी और न ही बड़े प्रोडक्शन हाउस का इतना बड़ा नेटवर्क। हिंदी बेल्ट में दर्शकों को एक मक्खी की प्रेम और बदले की कहानी देखने के लिए सिनेमाघरों तक खींचना अपने आप में एक नामुमकिन सा काम लग रहा था।
राजामौली और उनकी टीम को अच्छी तरह पता था कि अगर किसी बड़े बॉलीवुड स्टार का समर्थन नहीं मिला, तो यह फिल्म हिंदी के दर्शकों तक नहीं पहुंच पाएगी। फिल्म के प्रचार और ट्रेलर लॉन्च के लिए उन्हें एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जिसकी आवाज और मौजूदगी पूरे देश के ध्यान को आकर्षित कर सके। इसी सिलसिले में उन्होंने शाहरुख खान से संपर्क करने की सोची, हालांकि उनके मन में इस बात की हिचकिचाहट थी कि बॉलीवुड का इतना बड़ा सुपरस्टार एक दक्षिण भारतीय निर्देशक की फिल्म के लिए समय निकालेगा या नहीं।
शाहरुख खान का बड़प्पन: बिना किसी हिचकिचाहट के इवेंट में पहुंचे और बढ़ाया हौसला
एसएस राजामौली ने बताया कि जब उन्होंने अपनी टीम के जरिए शाहरुख खान तक अपनी बात पहुंचाई और फिल्म का कॉन्सेप्ट साझा किया, तो किंग खान का रिएक्शन हैरान करने वाला था। शाहरुख ने न केवल तुरंत हामी भरी, बल्कि वे 'मक्खी' के हिंदी ट्रेलर लॉन्च और प्रमोशनल इवेंट में मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे। शाहरुख खान ने उस मंच पर राजामौली की रचनात्मक सोच और विजुअल इफेक्ट्स के इस्तेमाल की जमकर तारीफ की। शाहरुख ने मीडिया के सामने कहा था कि राजामौली जिस तरह की अनोखी और साहसी कहानियां पर्दे पर उतारते हैं, वह हर फिल्ममेकर के लिए एक प्रेरणा है।
राजामौली आज भी उस पल को याद करते हुए बेहद भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि उस समय वे हिंदी सिनेमा के लिए एक अजनबी की तरह थे। शाहरुख चाहते तो अपने व्यस्त शेड्यूल का हवाला देकर मना कर सकते थे, लेकिन उन्होंने आगे आकर एक नए निर्देशक की पीठ थपथपाई। शाहरुख की उस मौजूदगी ने मीडिया और दर्शकों के बीच 'मक्खी' को लेकर एक जबरदस्त हाइप तैयार कर दी। उत्तर भारत के सिंगल स्क्रीन्स से लेकर मल्टीप्लेक्स तक फिल्म को पहचान मिली और लोगों ने राजामौली के विजन को पहली बार नोटिस किया।
'मक्खी' से लेकर 'बाहुबली' और 'आरआरआर' तक: कैसे बदला राजामौली का सफर
'मक्खी' के जरिए हिंदी पट्टी में जो नींव पड़ी, उसी ने आगे चलकर 'बाहुबली: द बिगिनिंग' और 'बाहुबली 2: द कन्क्लूजन' जैसी ऐतिहासिक सफलताओं का रास्ता तैयार किया। राजामौली हमेशा मानते हैं कि अगर किसी मुश्किल मोड़ पर कोई बड़ा कलाकार आपका हाथ थाम ले, तो आपका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। शाहरुख खान के उस छोटे से लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सहयोग ने राजामौली को हिंदी दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाने का जो हौसला दिया, उसका असर आज पूरे विश्व सिनेमा पर साफ नजर आता है। आज जब राजामौली दुनिया के सबसे बड़े फिल्म निर्देशकों में गिने जाते हैं, वे इस अहसान और प्यार को कभी नहीं भूलते।