'दृश्यम' से डिलीट किए गए थे ये रूह कंपा देने वाले सीन, 'गायतोंडे' ने बताया- मेरा नसीब अच्छा था कि सेंसर ने वो काट दिया वरना...
अजय देवगन की कल्ट क्लासिक सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म 'दृश्यम' (Drishyam) जब रिलीज हुई थी, तो कहानी और कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे। फिल्म में एक तरफ जहां विजय सालगांवकर (अजय देवगन) अपने परिवार को बचाने के लिए शतरंज की बिसात बिछाता है, वहीं दूसरी तरफ सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत गायतोंडे का किरदार ऐसा था जिससे हर दर्शक को नफरत हो गई थी। पर्दे पर यह क्रूर और खौफनाक पुलिस वाला बनने वाले मंझे हुए अभिनेता कमलेश सावंत ने अब फिल्म से जुड़े कई अनसुने और हैरान कर देने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि फिल्म से कुछ ऐसे सीन्स डिलीट किए गए थे, जो अगर पर्दे पर आ जाते तो उनकी शामत आ जाती।
थाने में विजय के परिवार की पिटाई: कैमरे के पीछे शूट हुए थे बेहद बर्बर सीन
फिल्म 'दृश्यम' के सेकेंड हाफ में वह मोड़ आता है जब पुलिस इंस्पेक्टर गायतोंडे सच्चाई उगलवाने के लिए विजय सालगांवकर, उनकी पत्नी और दोनों मासूम बेटियों को पुलिस स्टेशन उठाकर ले आता है। फिल्म में दिखाया गया सीन ही दर्शकों का खून खौलाने के लिए काफी था, जहां गायतोंडे छोटी बच्ची और महिला पर हाथ उठाता है।
कमलेश सावंत ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान साझा किया कि असल में इस सीक्वेंस के लिए बहुत ज्यादा भयानक और हिंसक सीन शूट किए गए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने पूरी फैमिली को बेहद बेरहमी से मारा था। यह वॉयलेंस इतना आक्रामक था कि अगर वह सब कुछ बड़े पर्दे पर बिना कट के दिखा दिया जाता, तो दर्शकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता।
'मेरा नसीब अच्छा था कि सेंसर बोर्ड ने वो कम कर दिया'
सेंसर बोर्ड (CBFC) द्वारा फिल्म के दृश्यों में की गई कांट-छांट पर बात करते हुए कमलेश सावंत ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि उनका नसीब बहुत अच्छा था कि वे सीन हटा दिए गए।
कमलेश सावंत ने बातचीत के दौरान बताया:
"जितना मारा है, उतना अगर दिखाते ना, तो वाट लग जाती। मेरा नसीब अच्छा था कि सेंसर ने वो कम कर दिया था। मैंने उसमें पूरी फैमिली को मारा है। एक आदमी औरतों और बच्चों को मार रहा है, इसलिए सेंसर का पंगा पड़ गया और सीन को एडिट कर छोटा किया गया। जितना मैंने मारा था, अगर उतना सब दिखा देते तो मेरी हालत खराब हो जाती।"
सेंसर बोर्ड के नियमों के अनुसार महिलाओं और बच्चों के प्रति क्रूरता और अत्यधिक हिंसा दिखाने पर आपत्ति जताई गई थी, जिसकी वजह से मेकर्स को वह हिस्से ट्रिम करने पड़े।
थिएटर में जब इंटरवल के बाद गायब हो गई बगल वाली महिला
कमलेश सावंत ने फिल्म की रिलीज के बाद का एक बेहद दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वह चुपचाप एक मिनी थिएटर के कोने की सीट पर बैठकर फिल्म देख रहे थे। उनके पास दो सीट छोड़कर एक महिला बैठी हुई थी। फिल्म देखते-देखते कमलेश को नींद आ गई और जब इंटरवल के बाद उनकी आंख खुली, तो वह महिला वहां से जा चुकी थी।
जब कमलेश बाहर निकले, तो फिल्म के एडिटर ने आकर उन्हें बताया कि उस महिला ने उनके लिए एक खास संदेश छोड़ा था। महिला ने कहा था—'उस नीच आदमी के सामने हमें नहीं आना है, लेकिन उसको बोलो कि उसने बहुत अच्छा काम किया है'।
'मन कर रहा है चप्पल से पीटू': फैंस के खौफनाक और चौंकाने वाले रिएक्शंस
कमलेश सावंत के गायतोंडे वाले किरदार का असर दर्शकों के जेहन पर इस कदर बैठ गया था कि लोग असल जिंदगी में भी उनसे नफरत करने लगे थे। उन्होंने बताया कि इसके बाद थिएटर में एक महिला आई और उसने सीधे मुंह पर कहा कि मेरा मन आपके मुंह पर थूकने का कर रहा है, लेकिन आपने परफॉर्मेंस बहुत अच्छी दी! वहीं एक अन्य महिला ने आकर कहा कि मेरा दिल कर रहा है कि आपको चप्पल से पीटूं, पर आपने काम कमाल का किया है।
अभिनेता ने कहा कि एक कलाकार के तौर पर यही सबसे बड़ा इनाम होता है कि लोग आपके निभाए किरदार को इस हद तक सच मान लें। हालांकि, उन्होंने दोबारा दोहराया कि अगर सेंसर ने पिटाई वाले बाकी सीन्स न काटे होते, तो शायद पब्लिक का गुस्सा थिएटर में ही उन पर फूट पड़ता।