क्या बकवास है 'दर्द-ए-डिस्को' गाना...जावेद अख्तर के लिखे जिन शब्दों को लोग समझे 'बेमतलब', उनका हैरान करने वाला असली अर्थ जानिए

क्या बकवास है 'दर्द-ए-डिस्को' गाना...जावेद अख्तर के लिखे जिन शब्दों को लोग समझे 'बेमतलब', उनका हैरान करने वाला असली अर्थ जानिए

साल 2007 में आई शाहरुख खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'ओम शांति ओम' का गाना 'दर्द-ए-डिस्को' आज भी जब बजता है, तो लोग थिरकने पर मजबूर हो जाते हैं। सुखविंदर सिंह की दमदार आवाज और स्क्रीन पर छह पैक एब्स के साथ थिरकते शाहरुख खान ने इस गाने को कल्ट बना दिया। महान गीतकार जावेद अख्तर द्वारा लिखे गए इस गाने को अक्सर लोग एक नॉन-सीरियस और मजेदार डांस नंबर मानते हैं। गाने में 'फस्ल-ए-गुल' और 'अब्र-ए-करम' जैसे उर्दू के बेहद भारी-भरकम और खूबसूरत शब्दों का इस्तेमाल इस तरह किया गया है कि पहली बार में यह समझ ही नहीं आता कि यह दर्द का गाना है या डिस्को का। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जिन्हें लोग बेमतलब के शब्द समझते हैं, उनका हिंदी में बेहद गहरा और रूमानी अर्थ है।

फराह खान की वो अजीब डिमांड, जब जावेद अख्तर से कहा- 'मुझे एक बकवास गाना चाहिए'

इस गाने के बनने के पीछे की कहानी भी इसके लिरिक्स की तरह ही बेहद दिलचस्प है। खुद जावेद अख्तर ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि आखिर उन्होंने किस मूड में इस गाने की रचना की थी। जावेद अख्तर ने बताया कि एक दिन फिल्म की डायरेक्टर फराह खान उनके पास आईं और एक अजीब सी फरमाइश रख दी। फराह ने कहा, 'जावेद अंकल, मुझे अपनी फिल्म के लिए एक ऐसा गाना चाहिए जिसकी किसी भी लाइन का कोई लॉजिक या मतलब ही न हो, क्योंकि फिल्म की सिचुएशन ही बहुत अजीब और फनी है।' जावेद अख्तर ने हंसते हुए बताया था कि जिंदगी में पहली बार उन्हें अहसास हुआ कि जानबूझकर 'बकवास' या बेमतलब लिखना कितना कठिन काम है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा था कि उन्हें खुशी है कि उन्होंने जो कुछ भी लिखा, वह सिचुएशन के हिसाब से पूरी तरह फिट बैठा।

'फस्ल-ए-गुल' से लेकर 'सरगोशियों' तक, जानिए इन कठिन उर्दू शब्दों का असली मतलब

भले ही इस गाने को फनी सिचुएशन के लिए लिखा गया हो, लेकिन जावेद अख्तर के कलम से निकले उर्दू के इन शुद्ध शब्दों का अर्थ बेहद खूबसूरत है। आइए जानते हैं इस गाने की प्रमुख लाइनों का असली हिंदी अनुवाद:

  • फस्ल-ए-गुल थी, गुलपोशियों का मौसम था: इसका सीधा सा मतलब है कि वह 'बहार (बसंत) का मौसम था, जिसमें चारों तरफ फूल खिले हुए थे।' यह इस बात का प्रतीक है कि वह जिंदगी का सबसे खूबसूरत और अच्छा वक्त था।

  • हम पर कभी सरगोशियों का मौसम था: उर्दू में 'सरगोशी' का मतलब होता है कान में फुसफुसाकर धीरे से बात करना। यानी यह उस दौर की बात है जब दोनों के बीच प्यार का मौसम था और कानों में मोहब्बत की बातें घुली रहती थीं।

  • कैसा जुनूं ख्वाबों की अंजुमन में था: 'अंजुमन' का अर्थ होता है महफिल या सभा। इसका मतलब है कि सपनों की उस खूबसूरत महफिल में एक अलग ही दीवानापन और बेफिक्री थी।

  • क्या मैं कहूं क्या मेरे बांकपन में था: इसका अर्थ है कि मैं कैसे बयां करूं कि मेरे उस अल्हड़पन और लड़कपन के दिन कितने हसीन हुआ करते थे।

  • रंजिश का चला था फव्वारा, फूटा जो ख्वाब का गुब्बारा: यानी अचानक रिश्तों में नाराजगी, कड़वाहट और गलतफहमियों का दौर शुरू हुआ और देखते ही देखते प्यार का हसीन सपना एक झटके में टूट गया।

  • अब्र-ए-करम घिर-घिर के मुझ पर बरसा था: उर्दू में 'अब्र-ए-करम' का मतलब होता है कृपा के बादल या ईश्वर की नेमत। इसका अर्थ है कि एक वक्त था जब मुझ पर ईश्वर की कृपा और खुशियों की झमाझम बारिश हो रही थी।

  • अब्र-ए-करम बरसा तो फिर मैं तरसा था: इसका बेहद गहरा अर्थ है कि खुदा की इतनी रहमत और खुशियां मिलने के बाद भी मेरा दिल अपने महबूब के प्यार के लिए तरसता ही रह गया।

लंदन से लेकर सैन फ्रांसिस्को तक दर्द का सफर, पिछले महीने की 26 तारीख का वो ट्विस्ट

अगर आप इस पूरे गाने के घटनाक्रम को ध्यान से सुनेंगे, तो यह एक ऐसे आशिक की कहानी है जो अपनी 'नीलम परी' के प्यार में धोखा खाने के बाद पूरी तरह टूट चुका है। वह गाता है कि वह इतना भोला और सीधा था कि कोई उसकी बेचैनी को समझ ही नहीं पाया। अपने टूटे दिल के दर्द को छिपाने के लिए वह डिस्को में डांस कर रहा है और अपने इस गम को भुलाने के लिए लंदन, पेरिस, न्यूयॉर्क, एलए और सैन फ्रांसिस्को जैसे दुनिया के बड़े-बड़े शहरों में भटक रहा है। गाने का सबसे मजेदार और कल्ट ट्विस्ट इसकी आखिरी लाइनों में आता है, जब शाहरुख खान गाते हैं कि उनका वो सनम, उनका वो दिलबर सारे वादे तोड़कर उन्हें 'पिछले महीने की छब्बीस तारीख' को छोड़कर चला गया। जावेद अख्तर ने इतनी गंभीर उर्दू और इस फनी सिचुएशन का ऐसा लाजवाब कॉम्बिनेशन बनाया कि यह गाना आज भी अमर है।

 

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