ब्रेस्ट रिडक्शन सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं! जानिए किन गंभीर शारीरिक दिक्कतों में वरदान है यह सर्जरी और किसे होती है इसकी जरूरत
अक्सर जब भी प्लास्टिक या कॉस्मेटिक सर्जरी का जिक्र होता है, तो लोग इसे केवल बाहरी सुंदरता और लुक को बेहतर बनाने से जोड़कर देखने लगते हैं। इसी तरह की एक सर्जरी है ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी (Breast Reduction Surgery), जिसे लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। बहुत से लोग इसे सिर्फ एक ब्यूटी ट्रीटमेंट मानते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की नजर में यह धारणा पूरी तरह गलत है। मेडिकल भाषा में इसे 'रिडक्शन मैमोप्लास्टी' (Reduction Mammoplasty) कहा जाता है। असल में यह सर्जरी केवल कॉस्मेटिक बदलाव के लिए नहीं, बल्कि कई बार महिलाओं को गंभीर शारीरिक दर्द से मुक्ति दिलाने और उनके जीवन को सामान्य बनाने के लिए एक जरूरी मेडिकल ट्रीटमेंट के रूप में की जाती है।
सिर्फ दिखावा नहीं, इन गंभीर शारीरिक तकलीफों का सटीक इलाज है यह सर्जरी
डॉ. शिखा गुप्ता के अनुसार, जिन महिलाओं के स्तनों का आकार और वजन सामान्य से बहुत अधिक बड़ा होता है, उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में बेहद कष्टदायक शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भारी वजन के कारण उनकी गर्दन, कंधों और पीठ के ऊपरी व निचले हिस्से में लगातार असहनीय दर्द बना रहता है। इसके चलते रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है और शरीर का पोस्चर (ढांचा) भी बिगड़ने लगता है। इसके अलावा, स्तनों के नीचे की त्वचा पर लगातार पसीना जमा होने से गंभीर रैशेज, फंगल इन्फेक्शन, सांस लेने में तकलीफ और दौड़ने-भागने या एक्सरसाइज करने में भारी परेशानी होती है। ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी इन सभी गंभीर दिक्कतों को जड़ से खत्म करने में मदद करती है।
आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है गहरा सकारात्मक असर
शारीरिक समस्याओं से अलग, भारी स्तनों का एक बहुत बड़ा नकारात्मक असर महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी देखा जाता है। इसके कारण कई महिलाएं अपनी बॉडी इमेज को लेकर हर वक्त असहज और हीन भावना का शिकार रहती हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता है। उन्हें अपनी पसंद के कपड़े पहनने और सामाजिक जीवन में खुलकर हिस्सा लेने में भी संकोच होता है। यह सर्जरी महिलाओं को उस मानसिक तनाव और डिप्रेशन से बाहर निकालने का काम करती है। सर्जरी के बाद वे न सिर्फ शारीरिक रूप से हल्का महसूस करती हैं, बल्कि अपनी बॉडी शेप को लेकर उनका कॉन्फिडेंस भी काफी बूस्ट हो जाता है।
जानिए कैसे की जाती है यह पूरी सर्जिकल प्रक्रिया
यह एक बेहद एडवांस और सुरक्षित सर्जिकल प्रोसेस है, जिसे आमतौर पर अस्पताल में मरीज को जनरल एनेस्थीसिया (पूरी तरह बेहोश करके) देकर किया जाता है। केस की जटिलता और स्तनों के वॉल्यूम के आधार पर इस पूरी सर्जरी को संपन्न करने में लगभग तीन से पांच घंटे तक का समय लग सकता है। ऑपरेशन के दौरान सर्जन स्तनों के अंदर जमा अतिरिक्त फैट (वसा), ग्लैंडुलर टिश्यूज और लटक चुकी ढीली त्वचा को सावधानीपूर्वक हटा देते हैं। इसके बाद स्तनों को शरीर के सही अनुपात के हिसाब से एक नया, सुडौल और हल्का आकार दिया जाता है। साथ ही निप्पल को भी सही जगह पर रीपोजिशन किया जाता है ताकि प्राकृतिक लुक बना रहे।
कौन सी महिलाएं करवा सकती हैं ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी?
यह सर्जरी हर उस महिला के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो अपने भारी स्तनों के कारण लगातार शारीरिक दर्द या अपनी लाइफस्टाइल की सीमाओं से जूझ रही हैं। हालांकि, इसके लिए कुछ जरूरी मेडिकल मापदंड तय किए गए हैं। डॉक्टर्स की सलाह के मुताबिक, यह सर्जरी तभी कराई जानी चाहिए जब स्तनों का प्राकृतिक विकास पूरी तरह से हो चुका हो (आमतौर पर 18-20 वर्ष की उम्र के बाद)। इसके साथ ही, सर्जरी कराने वाली महिला का वजन भी एक स्थिर और सही पैमाने पर होना चाहिए ताकि रिकवरी में कोई बाधा न आए।
क्या इस सर्जरी के कुछ साइड इफेक्ट्स और जोखिम भी हैं?
चिकित्सा जगत में किसी भी अन्य सर्जरी की तरह ब्रेस्ट रिडक्शन के साथ भी कुछ सामान्य साइड इफेक्ट्स और रिस्क जुड़े होते हैं, जिनके बारे में मरीज को पहले से पता होना चाहिए। सर्जरी के बाद शुरुआती दिनों में प्रभावित हिस्से पर सूजन, हल्का दर्द और टांकों के निशान (Scars) होना बेहद सामान्य है, जो समय के साथ धुंधले पड़ जाते हैं। कुछ मामलों में निप्पल की संवेदनशीलता (Sensation) में अस्थायी बदलाव आ सकता है या दोनों स्तनों के आकार में हल्की असमानता रह सकती है। इसके अलावा घाव भरने में देरी, ब्लीडिंग या इन्फेक्शन का खतरा बेहद कम मामलों में देखा जाता है। एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि कुछ महिलाओं को भविष्य में ब्रेस्टफीडिंग (स्तनपान) कराने में थोड़ी कठिनाई हो सकती है, इसलिए सर्जरी से पहले डॉक्टर से इस विषय पर खुलकर परामर्श करना अनिवार्य है।