कार्डियोलॉजिस्ट ने बताईं दिल को हमेशा जवान रखने वाली 4 आदतें, हार्ट अटैक का जोखिम होगा आधा
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियंत्रित खानपान, मानसिक तनाव और शारीरिक निष्क्रियता के चलते हृदय रोग केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि युवा भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं। आए दिन कम उम्र के लोगों में अचानक कार्डियक अरेस्ट और दिल के दौरे के बढ़ते मामले गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं। ऐसे समय में देश और दुनिया के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों यानी कार्डियोलॉजिस्ट्स ने रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ बुनियादी बदलाव करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि किसी महंगे इलाज या जटिल सप्लीमेंट्स के बजाय अगर व्यक्ति अपनी दैनिक दिनचर्या में सिर्फ चार प्राथमिक आदतों को ईमानदारी से शामिल कर ले, तो दिल की बीमारियों और ब्लॉकेज के खतरे को आधे से ज्यादा कम किया जा सकता है।
हृदय हमारे शरीर का वह इंजन है जो बिना एक सेकंड रुके चौबीसों घंटे रक्त संचार बनाए रखता है। जब इस इंजन को खराब खानपान, सिगरेट के धुएं या अत्यधिक तनाव से नुकसान पहुंचता है, तो रक्त वाहिकाओं में प्लाक जमने लगता है, जिससे धमनियां संकरी हो जाती हैं। कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि दवाओं से पहले जीवनशैली में अनुशासन लाना ही प्राथमिक सुरक्षा कवच है।
आदत 1: रोजाना 30 मिनट का मध्यम व्यायाम और गतिशीलता
हृदय एक मांसपेशी है, और किसी भी मांसपेशी को मजबूत रखने के लिए नियमित कसरत सबसे जरूरी खुराक होती है। कार्डियोलॉजिस्ट्स के अनुसार, दिल को तंदुरुस्त रखने के लिए आपको जिम में जाकर भारी वजन उठाने की कतई आवश्यकता नहीं है। रोजाना केवल 30 से 40 मिनट की तेज चाल (ब्रिस्क वॉक), हल्की जॉगिंग, साइकिल चलाना या तैराकी ही दिल की मांसपेशियों को सक्रिय रखने के लिए पर्याप्त है। जब आप तेज चलते हैं, तो आपकी हृदय गति बढ़ती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम होकर अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, जो लोग डेस्क जॉब में घंटों एक ही जगह बैठे रहते हैं, उन्हें हर 45 मिनट में उठकर 2-3 मिनट टहलने की आदत जरूर डालनी चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक लगातार बैठना भी दिल के लिए सिगरेट पीने जितना ही घातक माना गया है।
आदत 2: प्लेट में सोडियम, ट्रांस फैट कम और फाइबर की मात्रा अधिक
भोजन की गुणवत्ता सीधे तौर पर आपकी धमनियों की सेहत तय करती है। विशेषज्ञों के मुताबिक दिल को सुरक्षित रखने का दूसरा सबसे अहम नियम आपकी रसोई से होकर गुजरता है। अपने भोजन में प्रोसेस्ड फूड, डीप फ्राइड स्नैक्स, पैकेज्ड चिप्स और बेकरी उत्पादों को पूरी तरह सीमित करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि इनमें ट्रांस फैट और पाम ऑयल का अत्यधिक इस्तेमाल होता है जो नसों को ब्लॉक करता है। इसके विपरीत, आहार में मौसमी हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, ताजे फल और बादाम-अखरोट जैसे मेवों को प्राथमिकता दें। साथ ही, नमक यानी सोडियम के सेवन पर कड़ा नियंत्रण रखें; अधिक नमक सीधे रक्तचाप (Blood Pressure) को बढ़ाता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का सबसे बड़ा मूक कारक बनता है।
आदत 3: 7 से 8 घंटे की गहरी नींद और तनाव प्रबंधन
तनाव और अधूरी नींद को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कार्डियोलॉजिस्ट्स इसे दिल का 'साइलेंट किलर' मानते हैं। जब आप लगातार तनाव में रहते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है, जिससे दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर दोनों लगातार हाई बने रहते हैं। इसी तरह, रात में 7 से 8 घंटे की बिना रुकावट वाली नींद न मिलने से शरीर की आंतरिक मरम्मत की प्रक्रिया बाधित होती है और धमनियों में सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ती है। तनाव को नियंत्रित करने के लिए रोजाना 10-15 मिनट ध्यान, प्राणायाम, गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं और सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल व लैपटॉप की स्क्रीन से दूरी बना लें।
आदत 4: अपने नंबर्स की पहचान और नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग
दिल को सुरक्षित रखने की चौथी और सबसे व्यावहारिक आदत है अपने स्वास्थ्य के प्रमुख आंकड़ों यानी 'हेल्थ नंबर्स' की नियमित जांच करवाना। 30 की उम्र पार करते ही हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार अपना लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल टेस्ट), फास्टिंग ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और एचबीए1सी (HbA1c) की जांच अवश्य करानी चाहिए। यदि आपके परिवार में किसी को कम उम्र में दिल की बीमारी का इतिहास रहा है, तो ईसीजी (ECG) और टीएमटी (TMT) जैसे बेसिक टेस्ट डॉक्टर की सलाह पर समय-समय पर कराते रहें। किसी भी बीमारी का शुरुआती चरण में पता चलना ही सबसे बड़ा बचाव है, क्योंकि धमनियों में 70% तक ब्लॉकेज होने पर भी कई बार शरीर में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।