क्या आपको भी बार-बार होता है सनबर्न, मामूली रैशेज और जलन को न करें नजरअंदाज, बढ़ सकता है स्किन कैंसर का खतरा
गर्मियों का मौसम आते ही चुभती धूप और बेहिसाब पसीने से लोग बेहाल होने लगते हैं। इस मौसम में तेज धूप के संपर्क में आने से त्वचा पर रेडनेस (लाल चकत्ते), तेज जलन और सनबर्न होना एक बेहद आम बात है। ज्यादातर लोग इसे मौसम का सामान्य असर या मामूली टैनिंग मानकर नजरअंदाज कर देते हैं और बाजार में मिलने वाली साधारण क्रीम लगाकर छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी लापरवाही आगे चलकर कितनी बड़ी मुसीबत बन सकती है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार सनबर्न की समस्या से जूझना त्वचा के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि यह आगे चलकर स्किन कैंसर (त्वचा के कैंसर) जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है। आइए इस विषय पर सोनीपत के एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल की रेडिएशन ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. पर्ल आनंद से जानते हैं कि धूप की ये झुलसन कैसे कैंसर में बदल जाती है।
जानिए कैसे सनबर्न की वजह से पनपता है स्किन कैंसर?
डॉ. पर्ल आनंद बताती हैं कि जब हम लंबे समय तक तेज धूप में बिना किसी सुरक्षा के रहते हैं, तो हमारी त्वचा सीधे तौर पर सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों के संपर्क में आती है। ये घातक किरणें हमारी त्वचा की ऊपरी और अंदरूनी परतों को गहराई तक नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे स्किन सेल्स (त्वचा की कोशिकाओं) के डैमेज होने का रिस्क बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। जब इन किरणों के कारण त्वचा का डीएनए (DNA) डैमेज हो जाता है, तो सेल्स असामान्य और अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, जो धीरे-धीरे ट्यूमर और कैंसर का रूप ले लेती हैं। डॉ. आनंद के मुताबिक, सनबर्न के कारण मुख्य रूप से तीन तरह के स्किन कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है, जिनमें 'बेसल सेल कार्सिनोमा', 'स्कवैमस सेल कार्सिनोमा' और सबसे खतरनाक माना जाने वाला 'मेलानोमा' शामिल है। इसके अलावा, अगर बचपन या टीनएज की उम्र में किसी को गंभीर सनबर्न हुआ हो, तो बड़े होने पर उसमें स्किन कैंसर विकसित होने का जोखिम कई गुना अधिक पाया गया है।
गर्मी के मौसम में सनबर्न से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय
गर्मियों के दिनों में धूप से पूरी तरह से दूरी बना लेना व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं है, लेकिन अपनी जीवनशैली और आदतों में कुछ छोटे बदलाव करके सनबर्न के खतरे को पूरी तरह टाला जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले धूप के पीक ऑवर्स को समझना जरूरी है। सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 4 बजे के बीच सूरज की यूवी किरणें अपने सबसे आक्रामक और हानिकारक स्तर पर होती हैं। कोशिश करें कि इस समयावधि के दौरान सीधे तौर पर तेज धूप में बाहर निकलने से बचें और यदि निकलना जरूरी हो, तो जितना हो सके छांव वाले रास्तों का ही इस्तेमाल करें।
सनस्क्रीन का सही इस्तेमाल और सुरक्षात्मक पहनावा है बेहद जरूरी
धूप की मार से त्वचा को बचाने के लिए सबसे अचूक हथियार सनस्क्रीन है। घर से बाहर कदम रखने से कम से कम 20-30 मिनट पहले अपनी त्वचा पर एसपीएफ 30 (SPF 30) या उससे अधिक क्षमता वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन जरूर लगाएं। ध्यान रखने वाली बात यह है कि एक बार सनस्क्रीन लगाने के बाद उसका असर केवल 2 से 3 घंटे ही रहता है। इसलिए यदि आप लंबे समय तक फील्ड में काम कर रहे हैं, आपको बहुत अधिक पसीना आ रहा है या आप स्विमिंग कर रहे हैं, तो हर 2 घंटे में सनस्क्रीन को दोबारा (Re-apply) लगाना न भूलें। इसके साथ ही, गर्मियों में हमेशा सूती, हल्के रंग के और पूरी बाजू के ढीले-ढाले कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय चौड़े किनारे वाली टोपी और यूवी-प्रोटेक्टिव सनग्लासेस (चश्मा) जरूर कैरी करें ताकि आपका चेहरा, कान, गर्दन और आंखें धूप से सुरक्षित रहें।
त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए खुद को रखें पूरी तरह हाइड्रेटेड
तेज धूप और उमस भरे मौसम में हमारे शरीर से पानी और जरूरी मिनरल्स पसीने के रूप में बहुत तेजी से बाहर निकल जाते हैं। त्वचा की अंदरूनी नमी को बनाए रखने और सनबर्न के हानिकारक असर को कम करने के लिए शरीर को अंदर से हाइड्रेटेड रखना बेहद आवश्यक है। इसके लिए दिनभर में कम से कम 3 से 4 लीटर सादा पानी पीने के साथ-साथ अपनी डाइट में नारियल पानी, नींबू पानी, लस्सी या ताजे फलों के जूस जैसी चीजों को शामिल करें। यह तरल पदार्थ त्वचा की कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाने में मदद करते हैं।
त्वचा में दिखने वाले इन संकेतों को न करें नजरअंदाज, तुरंत लें डॉक्टर की सलाह
सनबर्न केवल कुछ दिनों की मामूली जलन या त्वचा का लाल होना भर नहीं है, बल्कि यह आपकी स्किन को लंबे समय के लिए बीमार बना देता है। अगर आपको अपनी त्वचा में कुछ खास किस्म के असामान्य बदलाव दिखाई दें, तो बिना समय गंवाए तुरंत किसी अच्छे स्किन स्पेशलिस्ट या ऑन्कोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। जैसे कि त्वचा पर बार-बार अत्यधिक लालिमा आना, असहनीय जलन होना या पानी वाले छाले पड़ना। इसके अलावा, यदि आपके शरीर पर पहले से मौजूद किसी तिल या मस्से के आकार, रंग, बॉर्डर या बनावट में अचानक कोई बदलाव दिखने लगे या त्वचा पर कोई ऐसा घाव या दाग हो जाए जो महीनों से इलाज के बाद भी ठीक न हो रहा हो, तो यह स्किन कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं जिनकी तुरंत जांच जरूरी है।