अचानक कोई सामने बेहोश हो जाए तो घबराएं नहीं: डॉक्टरों ने बताए जान बचाने वाले 5 'गोल्डन रूल्स'
दफ्तर, सड़क, बाजार या घर में अचानक किसी का चक्कर खाकर गिर जाना या बेहोश (Fainting/Syncope) हो जाना एक आम आपातकालीन स्थिति है। अचानक दिमाग तक खून या ऑक्सीजन का प्रवाह कम होने, ब्लड प्रेशर या शुगर तेजी से गिरने, डीहाइड्रेशन या गंभीर मामलों में कार्डियक अरेस्ट की वजह से ऐसा हो सकता है। ऐसे नाज़ुक पलों में आसपास मौजूद लोगों की घबराहट और गलत कदम स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।
डॉक्टरों और इमरजेंसी मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, बेहोशी की हालत में शुरुआती 3 से 5 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। अगर सही तरीके से प्राथमिक उपचार (First Aid) दिया जाए, तो मरीज की जान आसानी से बचाई जा सकती है।
1. तुरंत पीठ के बल लिटाएं और पैर 12 इंच ऊपर उठाएं
जैसे ही कोई व्यक्ति गिरे, उसे तुरंत किसी समतल और सुरक्षित जगह पर पीठ के बल सीधा लिटा दें:
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पैर ऊपर उठाने का विज्ञान: मरीज के दोनों पैरों को तकिया, बैग या किसी सहारे से जमीन से लगभग 12 इंच (एक फीट) ऊपर उठा दें।
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ऐसा करने से पैरों और शरीर के निचले हिस्से में मौजूद रक्त गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से तेजी से दिल और दिमाग की ओर बहने लगता है, जिससे व्यक्ति को कुछ ही सेकंड में होश आ जाता है।
2. एयरवे (सांस की नली) साफ करें और कपड़े ढीले करें
बेहोशी में जीभ पीछे गिरकर सांस की नली को ब्लॉक कर सकती है, इसलिए एयरवे खुला रखना सबसे जरूरी है:
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सिर पीछे, ठुड्डी ऊपर (Head-Tilt, Chin-Lift): मरीज के सिर को धीरे से पीछे की तरफ झुकाएं और ठुड्डी को ऊपर उठाएं ताकि सांस का रास्ता पूरी तरह साफ रहे।
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कपड़े ढीले करें: गर्दन के कॉलर का बटन, टाई, बेल्ट या कसे हुए कपड़ों को तुरंत ढीला कर दें ताकि सांस लेने और ब्लड सर्कुलेशन में कोई रुकावट न आए।
3. ताजी हवा आने दें और भीड़ न लगाएं
अक्सर लोग किसी के बेहोश होते ही उसे चारों तरफ से घेर लेते हैं, जिससे मरीज को ऑक्सीजन की भारी कमी हो जाती है:
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भीड़ हटाएं: आसपास जमा लोगों को तुरंत दूर हटने के लिए कहें।
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वेंटिलेशन: यदि घटना किसी बंद कमरे में हुई है, तो तुरंत खिड़की-दरवाजे खोल दें या पंखा चलाएं ताकि मरीज को पर्याप्त ताजी हवा मिल सके।
4. पल्स और सांस की जांच करें: जरूरत पड़े तो तुरंत दें CPR
मरीज के कंधे को थपथपाकर पूछें—"क्या आप ठीक हैं?"। अगर कोई प्रतिक्रिया न मिले, तो 10 सेकंड के भीतर नब्ज और सांस की जांच करें:
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कैरोटिड पल्स चेक करें: गर्दन के किनारे हाथ रखकर नब्ज देखें और छाती का ऊपर-नीचे होना महसूस करें।
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अगर सांस या पल्स न मिले: यह साधारण बेहोशी नहीं बल्कि कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। बिना एक सेकंड गंवाए तुरंत एंबुलेंस को फोन करें और दोनों हाथों को मरीज की छाती के बीच में रखकर तेजी से और गहराई से सीपीआर (Chest Compressions) देना शुरू करें (प्रति मिनट 100 से 120 बार)।
5. होश आने पर रिकवरी पोजीशन (Recovery Position) में लिटाएं
जब मरीज को होश आने लगे, तो उसे तुरंत उठकर बैठने या चलने न दें:
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करवट दिलाएं: मरीज को एक तरफ करवट (Left Lateral / Recovery Position) दिलाकर लिटाएं। इससे अगर उसे उल्टी आती है, तो वह फेफड़ों में जाने के बजाय सीधे मुंह से बाहर निकल जाएगी और दम घुटने का खतरा टल जाएगा।
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मरीज को कम से कम 10 से 15 मिनट तक लेटे रहने दें।
भूलकर भी न करें ये 3 बड़ी गलतियां
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मुंह में पानी न डालें: बेहोश व्यक्ति के मुंह में कभी भी पानी, जूस या दवा डालने की कोशिश न करें। बेहोशी में निगलने की क्षमता बंद हो जाती है, जिससे पानी सीधे सांस की नली (Windpipe) में जाकर फेफड़ों को चोक कर सकता है, जो जानलेवा साबित होता है।
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थप्पड़ न मारें या हिलाएं नहीं: मरीज को होश में लाने के लिए जोर-जोर से हिलाना या चेहरे पर तेज थप्पड़ मारना खतरनाक हो सकता है, खासकर अगर गिरने से सिर या रीढ़ की हड्डी में चोट लगी हो।
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जूता या प्याज न सुंघाएं: यह पूरी तरह एक अवैज्ञानिक मिथक है। किसी भी बदबूदार चीज को सुंघाने से कोई मेडिकल फायदा नहीं होता, बल्कि इससे मरीज के श्वसन तंत्र में जलन हो सकती है।
(डिस्क्लेमर: यदि व्यक्ति को 1-2 मिनट के भीतर होश न आए, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में दर्द की शिकायत हो या मरीज डायबिटीज का मरीज हो, तो बिना समय गंवाए तत्काल नजदीकी अस्पताल या आपातकालीन मेडिकल सेवा से संपर्क करें।)