'सोशल मीडिया से प्लेइंग-11 तय नहीं होती': वैभव सूर्यवंशी को बाहर बैठाने पर हेड कोच गौतम गंभीर ने तोड़ी चुप्पी

'सोशल मीडिया से प्लेइंग-11 तय नहीं होती': वैभव सूर्यवंशी को बाहर बैठाने पर हेड कोच गौतम गंभीर ने तोड़ी चुप्पी

घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महज 15 साल की उम्र में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से सनसनी मचाने वाले युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया की प्लेइंग-11 में लगातार मौके न मिलने को लेकर क्रिकेट फैंस और सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब इन तमाम चर्चाओं और आलोचनाओं पर भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने चुप्पी तोड़ी है। गंभीर ने स्पष्ट कर दिया है कि वैभव कितने भी प्रतिभाशाली और फॉर्म में क्यों न हों, टीम में प्लेइंग-11 का चयन 'सोशल मीडिया के शोर' से नहीं, बल्कि टीम की स्थिरता और निष्पक्षता के आधार पर तय होता है।

गंभीर ने विस्तार से समझाया कि आखिर क्यों वैभव सूर्यवंशी को अभी अपनी बारी के लिए इंतजार करना होगा।

1. 'सोशल मीडिया और बाहर का शोर प्लेइंग-11 तय नहीं करता'

गौतम गंभीर ने अपने बेबाक अंदाज में दो-टूक कहा कि टीम मैनेजमेंट किसी बाहरी हाइप या सोशल मीडिया के ट्रेंड्स को देखकर फैसले नहीं लेता।

  • मैच जीतने वाला संयोजन प्राथमिकता: गंभीर के अनुसार, किसी भी मैच में उतरते वक्त सिर्फ यह देखा जाता है कि टीम के लिए सबसे संतुलित और मैच जिताने वाला संयोजन क्या है।

  • सिर्फ किसी खिलाड़ी के नाम की चर्चा या प्रशंसकों की मांग के आधार पर उन खिलाड़ियों को नहीं हटाया जा सकता, जो लंबे समय से टीम के लिए पसीना बहा रहे हैं।

2. 'संजू या अभिषेक को अचानक बाहर करना नाइंसाफी होगी'

गंभीर ने शीर्ष क्रम में संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा के योगदान का बचाव करते हुए कहा कि ड्रेसिंग रूम में सुरक्षा (Security) का माहौल बनाए रखना एक कोच की पहली जिम्मेदारी होती है:

"हम जानते हैं कि वैभव कितना गजब का टैलेंट है और वह क्या करने में सक्षम है। लेकिन जो खिलाड़ी पिछले डेढ़-दो साल से टीम के लिए लगातार खेल रहे हैं और जिन्होंने प्रभाव डाला है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। अगर आज वैभव को सीधे टीम में शामिल किया जाता है, तो यह मेरे और उस खिलाड़ी के बीच बहुत मुश्किल बातचीत होगी जिसे बाहर बैठना पड़ेगा—चाहे वह संजू सैमसन हों या अभिषेक शर्मा। हम उस कॉम्बिनेशन को रातों-रात नजरअंदाज नहीं कर सकते। ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों को सुरक्षा की भावना देना जरूरी है।'

3. 'उम्र 15 साल हो या 30, सबको अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है'

गंभीर ने खुलासा किया कि उन्होंने टीम में शामिल होने पर वैभव सूर्यवंशी से खुद बात की थी और उन्हें पूरी स्थिति समझाई थी।

  • धैर्य का सबक: कोच ने युवा बल्लेबाज को समझाया कि अच्छी फॉर्म में होने के बावजूद कई बार टीम में ऐसे स्थापित खिलाड़ी होते हैं, जिनकी वजह से बेंच पर बैठना पड़ता है।

  • क्रिकेट में उम्र मायने नहीं रखती—चाहे कोई खिलाड़ी 15 साल का हो या 30 साल का, टीम में अपनी स्थायी जगह पक्की करने के लिए प्रोसेस और धैर्य से गुजरना ही पड़ता है।

वैभव सूर्यवंशी का भविष्य और टीम इंडिया की रणनीति

गंभीर के इस स्पष्टीकरण से साफ है कि टीम मैनेजमेंट वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट के एक बेहद अनमोल भविष्य के रूप में देखता है, लेकिन उन्हें जल्दबाजी में उतारकर न तो उन पर अतिरिक्त दबाव बनाना चाहता है और न ही मौजूदा स्थापित खिलाड़ियों का विश्वास तोड़ना चाहता है। वैभव टीम की योजनाओं का अभिन्न हिस्सा बने रहेंगे और सही अवसर आने पर उन्हें मौका दिया जाएगा।