रह-रहकर आ रही सूखी खांसी और गले में चुभन? जानिए कहीं आप भी तो नहीं हो रहे जहरीली हवा और स्मॉग का शिकार
सर्दियों की शुरुआत के साथ ही जब आसमान पर धुंध और स्मॉग की घनी चादर तनने लगती है, तो हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सांसों के जरिए सीधे हमारे श्वसन तंत्र पर हमला बोलने लगते हैं। अगर आपको भी पिछले कुछ दिनों से अचानक गले में हल्की खुजली, लगातार सूखी खांसी और सीने में भारीपन महसूस हो रहा है, तो इसे केवल बदलता मौसम या सामान्य जुकाम मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। दरअसल, यह समस्या चिकित्सा विज्ञान में 'स्मॉग कफ' या एनवायर्नमेंटल ब्रोंकाइटिस के रूप में जानी जाती है, जो खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के कारण सीधे तौर पर पैदा होती है। उत्तर भारत के तमाम शहरों जैसे दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ, कानपुर और पटना में इन दिनों पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर सामान्य से कई गुना ऊपर बना हुआ है, जिसके चलते हवा में सांस लेना कई सिगरेट पीने के बराबर खतरनाक साबित हो रहा है।
सामान्य मौसमी एलर्जी और प्रदूषण जनित खांसी में क्या है अंतर
हर बदलते मौसम में लोगों को सर्दी-खांसी की शिकायत होती है, लेकिन प्रदूषण से होने वाली खांसी का मिजाज पूरी तरह अलग और बेहद जिद्दी होता है। सामान्य वायरल इन्फेक्शन या मौसमी फ्लू में आमतौर पर हल्का बुखार, बदन दर्द, नाक बहना और कफ वाली बलगम की शिकायत होती है, जो तीन से पांच दिनों में दवाओं या आराम से ठीक हो जाती है। इसके विपरीत, वायु प्रदूषण और स्मॉग के कारण होने वाली खांसी पूरी तरह सूखी होती है और गले के भीतर लगातार कांटे जैसी चुभन महसूस कराती है। जैसे ही आप घर से बाहर खुली हवा में कदम रखते हैं या सड़क पर निकलते हैं, यह खांसी अचानक तेज हो जाती है और फेफड़ों में खिंचाव पैदा करने लगती है। जहरीले रसायनों, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के कण विंडपाइप की नाजुक म्यूकोसा झिल्ली को छील देते हैं, जिससे शरीर रक्षात्मक प्रतिक्रिया के रूप में बार-बार खांसी पैदा करता है।
किन लोगों पर सबसे पहले और सबसे घातक पड़ता है इस जहरीली हवा का असर
हवा का यह जहर यूं तो हर उम्र के व्यक्ति के फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन इसका सबसे पहला और घातक असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ता है। अस्थमा, सीओपीडी या किसी भी तरह की क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए यह समय किसी गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल से कम नहीं होता, क्योंकि महीन कण फेफड़ों की नलियों में सूजन बढ़ाकर अचानक सांस का दौरा ला सकते हैं। इसके अलावा जो कामकाजी लोग सुबह की सैर पर निकलते हैं या रोजाना बाइक और सार्वजनिक वाहनों से लंबी दूरी का सफर तय करते हैं, उनके फेफड़ों में पीएम 2.5 के बेहद महीन कण जमा होने लगते हैं। ये सूक्ष्म कण रक्तप्रवाह तक पहुंचकर न केवल श्वसन तंत्र को बल्कि दिल और दिमाग की कार्यप्रणाली को भी बुरी तरह प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं, जिससे सिरदर्द और आंखों में लगातार जलन की शिकायत आम हो जाती है।
स्मॉग के बीच खुद को और परिवार को सुरक्षित रखने के जरूरी सुरक्षा कवच
जब हवा में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक खतरनाक श्रेणी में पहुंच जाए, तो सबसे पहला नियम यह है कि अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से सख्ती से बचा जाए। सुबह और शाम के समय जब हवा भारी होती है और स्मॉग जमीन की सतह के सबसे करीब रहता है, उस दौरान टहलने, दौड़ने या खुले में व्यायाम करने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए क्योंकि भारी सांस लेने से ज्यादा मात्रा में जहरीले कण फेफड़ों में प्रवेश करते हैं। यदि बाहर निकलना अपरिहार्य हो, तो सामान्य कपड़े या सर्जिकल मास्क के बजाय उचित फिटिंग वाले प्रमाणित एन-95 (N-95) मास्क का ही इस्तेमाल करें, जो हवा के 95 प्रतिशत सूक्ष्म कणों को छानने में सक्षम होते हैं। घर के भीतर खिड़कियां और दरवाजे उस समय बंद रखें जब बाहर धुआं या स्मॉग अधिक हो, और यदि संभव हो तो कमरे में एयर प्यूरीफायर चलाएं अथवा घर में इनडोर प्लांट्स जैसे स्नेक प्लांट, एलोवेरा और मनी प्लांट लगाएं जो प्राकृतिक रूप से हवा को शुद्ध करने में मददगार माने जाते हैं।
फेफड़ों को डिटॉक्स करने और गले की सूजन घटाने के अचूक घरेलू उपाय
घर पर रहकर प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों को कम करने के लिए शरीर के प्राकृतिक डिटॉक्स सिस्टम को मजबूत करना बेहद जरूरी हो जाता है। दिन में दो से तीन बार गर्म पानी की भाप लेना गले और श्वसन नलियों में जमे बारीक धूल कणों को साफ करने का सबसे सरल और असरदार तरीका है, जिसमें आप चाहें तो पुदीने की पत्तियां या अजवाइन मिला सकते हैं। इसके साथ ही गुनगुने पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक और हल्दी डालकर गरारे करने से गले की अंदरूनी सूजन तेजी से घटती है और लगातार उठने वाली खांसी के दौरे शांत होते हैं। रात को सोने से पहले कच्ची हल्दी को दूध में उबालकर पीना, अदरक और काली मिर्च के रस को शुद्ध शहद के साथ लेना और दिनभर खूब गुनगुना पानी पीते रहना फेफड़ों की सुरक्षा दीवार को मजबूत बनाता है तथा शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में तेजी लाता है।
कब समझें कि स्थिति गंभीर है और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना अनिवार्य है
अक्सर लोग सूखी खांसी को आम समझकर हफ्तों तक कफ सिरप पीते रहते हैं, जो कई बार समस्या को सुलझाने के बजाय और जटिल बना देता है क्योंकि हर सिरप एलर्जी या सूजन को ठीक नहीं कर सकता। यदि आपकी खांसी लगातार दो हफ्ते से अधिक समय तक बनी रहे, सीने में जकड़न के साथ सीटी जैसी आवाज आने लगे, या सामान्य चलने-फिरने में भी सांस फूलने लगे, तो इसे तत्काल मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए। इसके अतिरिक्त यदि थूक में खून की कोई बूंद दिखाई दे, तेज सीने में दर्द उठे या लगातार सिर चकराए, तो बिना किसी घरेलू नुस्खे के तुरंत किसी योग्य पल्मोनोलॉजिस्ट या फिजिशियन से मिलकर फेफड़ों की जांच और चेस्ट एक्स-रे कराना चाहिए ताकि समय रहते ब्रोंकाइटिस या गंभीर संक्रमण को रोका जा सके।