बंगाल में UP स्टाइल में एनकाउंटर: 11वीं की छात्रा से रेप और हत्या के आरोपी प्रह्लाद दास को पुलिस ने किया ढेर

बंगाल में UP स्टाइल में एनकाउंटर: 11वीं की छात्रा से रेप और हत्या के आरोपी प्रह्लाद दास को पुलिस ने किया ढेर

पश्चिम बंगाल के अपराध और कानून-व्यवस्था के इतिहास में एक ऐसा नाटकीय मोड़ सामने आया है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। उत्तर 24 परगना जिले के गाईघाटा इलाके में 11वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा के साथ हैवानियत और उसकी निर्मम हत्या के मुख्य आरोपी प्रह्लाद दास को पुलिस ने तड़के एक मुठभेड़ में मार गिराया। उत्तर प्रदेश के 'योगी मॉडल' की तर्ज पर हुए इस कथित एनकाउंटर ने राज्य के सियासी पारे को एकाएक उबाल पर ला दिया है। जहां विपक्षी दल इस कार्रवाई को लेकर मानवाधिकार और कानूनी प्रक्रियाओं पर तीखे सवाल उठा रहे हैं, वहीं राज्य की सत्ता और शीर्ष नेतृत्व ने पुलिस का खुलकर समर्थन किया है। पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल बैठक के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया कि जब कोई अपराधी पुलिस पर गोली चलाएगा या कानून हाथ में लेने की कोशिश करेगा, तो खाकी वर्दी हाथ पर हाथ धरकर तमाशा नहीं देखेगी। उन्होंने खुले शब्दों में ऐलान किया कि महिलाओं की सुरक्षा और नशे के कारोबार के खात्मे के लिए पुलिस को पूरी तरह 'फ्री हैंड' यानी खुली छूट दी जा चुकी है।

गाईघाटा में छात्रा के साथ बर्बरता और खौफनाक वारदात की पूरी कहानी

इस सनसनीखेज एनकाउंटर की पृष्ठभूमि 24 अक्टूबर की उस मनहूस शनिवार की रात से जुड़ी है, जब उत्तर 24 परगना के गाईघाटा इलाके में रहने वाली 11वीं कक्षा की एक छात्रा अपने घर के पास आयोजित एक स्थानीय संगीत कार्यक्रम (म्यूजिकल प्रोग्राम) में शामिल होने गई थी। देर रात तक जब किशोरी अपने घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। अगली सुबह यानी रविवार को एक रिश्तेदार के घर के पिछले हिस्से में उसका क्षत-विक्षत शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। डॉक्टरों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई कि छात्रा के चेहरे, सिर और शरीर के कई हिस्सों पर भारी चोटों के निशान थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और स्थानीय परिस्थितियों ने इस बात की ओर साफ इशारा किया कि छात्रा के साथ पहले दरिंदगी की गई और फिर पहचान छिपाने के मकसद से उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस नृशंस कांड के सामने आते ही स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सड़कों पर उतरकर आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी और फांसी की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया।

क्राइम सीन री-क्रिएशन के दौरान रिवॉल्वर छीनी और हुई जवाबी फायरिंग

घटना के बाद हरकत में आई पुलिस टीम ने परिजनों की तहरीर और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य संदेही प्रह्लाद दास को फौरन गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस के अनुसार, मंगलवार तड़के जांच टीम आरोपी प्रह्लाद दास को अपराध स्थल पर साक्ष्य जुटाने और 'क्राइम सीन री-क्रिएशन' के लिए ले जा रही थी। जब पुलिस वाहन वापस लौट रहा था, तभी आरोपी ने शौच जाने का बहाना बनाकर गाड़ी रुकवाई। जैसे ही उसे सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला गया, उसने अचानक एक सब-इंस्पेक्टर की सरकारी सर्विस रिवॉल्वर छीन ली और पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि एक गोली ड्यूटी पर तैनात सब-इंस्पेक्टर को छूती हुई निकल गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। अपनी जान बचाने और आत्मरक्षा के तहत पुलिस टीम ने जवाबी कार्रवाई करते हुए चार राउंड गोलियां चलाईं, जो सीधे प्रह्लाद दास को जा लगीं। गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हुए आरोपी को आनन-फानन में बनगांव सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

'पुलिस चुपचाप तमाशा नहीं देख सकती': शुभेंदु अधिकारी का सख्त संदेश

इस एनकाउंटर के बाद कोलकाता स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में हड़कंप मच गया और शीर्ष अधिकारियों की एक आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई गई। बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस की आत्मरक्षा की कार्रवाई को पूरी तरह जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि पुलिस पहले ही प्रेस ब्रीफिंग में एनकाउंटर से जुड़े तमाम तकनीकी और तथ्यात्मक पहलुओं को स्पष्ट कर चुकी है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब कोई खतरनाक अपराधी पुलिस की कस्टडी से भागने के लिए हथियार छीनकर खाकी पर ही गोलियां बरसाने लगे, तो क्या पुलिसकर्मी अपनी जान देने का इंतजार करेंगे? अधिकारी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि राज्य में कानून का राज स्थापित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी सूरत में गुंडों और बलात्कारियों को सिर उठाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे अपने कर्तव्य का निर्वहन करने वाले पुलिसकर्मियों के साथ चट्टान की तरह मजबूती से खड़े हैं और समाज को भयमुक्त बनाने के लिए पुलिस जो भी कड़े कदम उठाएगी, उसे सरकार का पूरा संरक्षण हासिल होगा।

दो क्षेत्रों में पुलिस को खुली छूट: महिलाओं की सुरक्षा और नशाखोरी पर जीरो टॉलरेंस

शुभेंदु अधिकारी ने अपने वक्तव्य में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण नीतिगत रुख का ऐलान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने पुलिस तंत्र को दो विशिष्ट मोर्चों पर असीमित अधिकार और खुली छूट दे रखी है। पहला मोर्चा है हमारी माताओं, बहनों और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरा मोर्चा है समाज की रगों में जहर घोल रहे ड्रग्स और नशीले पदार्थों के सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ फेंकना। उन्होंने कहा कि इन दोनों ही मामलों में अपराधियों के खिलाफ किसी भी तरह की कागजी ढिलाई या राजनीतिक दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जहां भी जरूरत होगी, पुलिस मौके पर त्वरित, सख्त और प्रभावी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। अधिकारी के अनुसार, बंगाल को अपराध मुक्त बनाने के लिए कानून का ऐसा खौफ अपराधियों के दिलों में पैदा करना बेहद जरूरी है, जिससे कोई भी शख्स किसी महिला की तरफ आंख उठाने से पहले सौ बार सोचे।

यूपी मॉडल की चर्चा, पीड़िता के परिवार को मिला कलेजे को सुकून

बंगाल में हुई इस मुठभेड़ की तुलना राजनीतिक विश्लेषक उत्तर प्रदेश के चर्चित 'योगी मॉडल' से कर रहे हैं, जहां संगीन अपराधों में लिप्त बदमाशों के खिलाफ त्वरित और सख्त पुलिसिया कार्रवाई देखने को मिलती रही है। इससे पहले जुलाई के महीने में दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में भी 13 साल की बच्ची से रेप और मर्डर के आरोपी प्रभास मंडल को इसी तरह पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया था, जब उसने भी पुलिस पर हमला कर भागने की कोशिश की थी। महज कुछ महीनों के भीतर उत्तर और दक्षिण 24 परगना में हुए इन दो बड़े एनकाउंटर्स ने राज्य के प्रशासनिक रवैये में आए आक्रामक बदलाव को रेखांकित किया है। इस बीच, मृतका के पीड़ित माता-पिता ने आरोपी के खात्मे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यद्यपि वे अपनी लाडली बेटी को अब कभी वापस नहीं पा सकेंगे, लेकिन आरोपी के मारे जाने से उनके सीने में जल रही बदले और इंसाफ की आग को कुछ शांति जरूर मिली है। परिजनों ने कहा कि जिस दरिंदे ने उनकी मासूम बच्ची के साथ इतनी क्रूरता की, वह जीवित रहने के लायक ही नहीं था।

कानूनी प्रक्रिया और सियासी महाभारत: विपक्ष ने खड़े किए सवाल

जहां एक तरफ स्थानीय जनता और पीड़िता के परिजन पुलिसिया कार्रवाई को त्वरित न्याय के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस एनकाउंटर को लेकर एक नया संग्राम छिड़ गया है। तृणमूल कांग्रेस और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर तीखी आपत्ति जताते हुए इसे संविधान और अदालत की अवहेलना बताया है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि कानून को दरकिनार कर 'जंगलराज' जैसी व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है और पुलिस हिरासत में आरोपियों की मौतों की न्यायिक जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा और सत्तारूढ़ खेमे के नेताओं का पलटवार है कि वर्षों से बंगाल में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके थे कि उन्हें कानून का कोई भय ही नहीं रह गया था। इस तरह की सख्त कार्रवाई से अपराधियों में भय का संचार होगा और महिलाओं के लिए राज्य की सड़कें सुरक्षित बन सकेंगी। अब देखना यह होगा कि गाईघाटा एनकाउंटर की यह गूंज आने वाले दिनों में अदालत और जनसभाओं के मंचों पर क्या नया मोड़ लेती है।