अपनी ही सरकार वाले कर्नाटक में कांग्रेस का सूपड़ा साफ: बैलेट पेपर से हुए MLC चुनाव में मिली 0 सीट, BJP ने राहुल गांधी पर कसा तीखा तंज

अपनी ही सरकार वाले कर्नाटक में कांग्रेस का सूपड़ा साफ: बैलेट पेपर से हुए MLC चुनाव में मिली 0 सीट, BJP ने राहुल गांधी पर कसा तीखा तंज

देश के चुनावी विमर्श में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पुरजोर वकालत करने वाली कांग्रेस पार्टी को अपने ही शासन वाले राज्य कर्नाटक में एक अप्रत्याशित और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कर्नाटक विधान परिषद (MLC) की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की चार सीटों पर मतपत्र यानी बैलेट पेपर के जरिए संपन्न हुए चुनावों के जो नतीजे सामने आए हैं, उनमें सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका और पार्टी शून्य (0) सीटों पर सिमट गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल सेक्युलर (JDS) के एनडीए गठबंधन ने राज्य की सभी चारों सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए क्लीन स्वीप कर दिया है। कांग्रेस पार्टी जहां राष्ट्रीय स्तर पर ईवीएम में कथित धांधली और मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर आंदोलन की रणनीति बना रही थी, वहीं अपनी ही सरकार और अपने ही प्रशासन के साए में बैलेट पेपर से हुए मतदान में मिली इस करारी हार ने पार्टी नेतृत्व को असहज स्थिति में डाल दिया है। इस परिणाम के फौरन बाद भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखे सियासी हमले शुरू कर दिए हैं।

कर्नाटक में एनडीए का क्लीन स्वीप: कांग्रेस के हाथ लगी सिर्फ निराशा

कर्नाटक विधान परिषद के इस द्विवार्षिक चुनाव में चार प्रमुख सीटों—बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर-पूर्व शिक्षक क्षेत्र, दक्षिण-पूर्व स्नातक क्षेत्र और पश्चिम स्नातक क्षेत्र पर मतदान हुआ था। इन सभी सीटों पर पारंपरिक रूप से मतपत्र (बैलेट पेपर) और प्रेफरेंशियल वोटिंग सिस्टम के जरिए मतदान कराया गया था। नतीजों में भाजपा ने तीन सीटों—उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक सीट—पर शानदार जीत बरकरार रखी। वहीं, सबसे हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली बेंगलुरु शिक्षक सीट पर भाजपा-जेडीएस गठबंधन के साझा उम्मीदवार ए. पी. रंगनाथ ने मौजूदा कांग्रेस एमएलसी पुत्तन्ना को कड़े मुकाबले में 908 वोटों से हरा दिया। पुत्तन्ना इससे पहले जेडीएस छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे और उन्हें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया व उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार का करीबी माना जाता था। राज्य में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार होने और शिक्षित वर्ग (शिक्षकों व स्नातकों) द्वारा सीधे वोट डाले जाने के बावजूद चारों सीटों पर मिली यह शिकस्त कांग्रेस के लिए गहरा आत्मघाती झटका मानी जा रही है।

'बैलेट पेपर पर भी जीरो': भाजपा ने राहुल गांधी को लिया आड़े हाथ

चुनाव नतीजों के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी ने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी पिछले कई महीनों से ईवीएम को कोसने और 'वोट चोरी' का नैरेटिव गढ़ने में जुटी हुई थी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में तो कांग्रेस की अपनी सरकार है, वहां का प्रशासनिक अमला उनका था और चुनाव भी उनकी मनपसंद तकनीक यानी बैलेट पेपर से हुए थे, फिर भी जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया। त्रिवेदी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब जनता का विश्वास ही खो चुका हो, तो फिर चाहे चुनाव ईवीएम से हों या बैलेट पेपर से, कांग्रेस का नतीजा शून्य ही रहेगा। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को अब हार का ठीकरा मशीनों या चुनाव आयोग पर फोड़ने की अपनी पुरानी आदत छोड़कर जमीनी हकीकत और जनता के मूड को स्वीकार करना चाहिए।

चार राज्यों के एमएलसी चुनावों में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला

यह झटका केवल कर्नाटक तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि हाल ही में संपन्न हुए विभिन्न राज्यों के विधान परिषद चुनावों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित चार राज्यों में 28 सीटों पर हुए एमएलसी चुनावों के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें कांग्रेस का कुल स्कोर शून्य रहा है। बिहार में जहां तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र प्रसाद सिंह ने बाजी मारी, वहीं प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी एमएलसी चुनावों में पहली बार अपना खाता खोला। उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुख्य मुकाबला देखने को मिला। इन चारों राज्यों के संपूर्ण नतीजों में कांग्रेस का एक भी सीट न जीत पाना यह स्पष्ट करता है कि पार्टी का जनाधार केवल आम मतदाताओं में ही नहीं, बल्कि मध्यम वर्ग, सरकारी कर्मचारियों और बुद्धिजीवी वर्ग के बीच भी लगातार खिसक रहा है।

2028 के विधानसभा चुनाव का सेट हो गया टोन: एचडी कुमारस्वामी

इस बंपर जीत के बाद केंद्रीय मंत्री और जेडीएस नेता एच. डी. कुमारस्वामी ने इसे कर्नाटक के भविष्य की राजनीति का टर्निंग पॉइंट करार दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत दर्शाती है कि राज्य में भाजपा और जेडीएस का गठबंधन जमीनी स्तर पर बेहद मजबूत और एकजुट है। कुमारस्वामी के अनुसार, सिद्धारमैया सरकार के कथित कुशासन, भ्रष्टाचार और वादों की नाकामी से शिक्षित वर्ग पूरी तरह तंग आ चुका है और इन नतीजों ने साल 2028 में होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव की दिशा अभी से तय कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एमएलसी चुनाव मुख्य रूप से शिक्षकों और डिग्री धारक युवाओं द्वारा लड़े जाते हैं, जिन्हें समाज का सबसे सजग तबका माना जाता है। ऐसे में राजधानी बेंगलुरु और अन्य क्षेत्रों में शिक्षकों का कांग्रेस के खिलाफ जाना राज्य सरकार की नीतियों और कामकाजी शैली पर एक गंभीर जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है।