बुखार को वायरल समझने की भूल पड़ेगी भारी! एक्सपर्ट से जानिए कब कराएं मलेरिया टेस्ट और क्या हैं इसके एडवांस तरीके

बुखार को वायरल समझने की भूल पड़ेगी भारी! एक्सपर्ट से जानिए कब कराएं मलेरिया टेस्ट और क्या हैं इसके एडवांस तरीके

मानसून की दस्तक के साथ ही मौसम खुशनुमा जरूर हो जाता है, लेकिन यह अपने साथ मच्छरों से पैदा होने वाली कई जानलेवा बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इन बीमारियों में मलेरिया सबसे आम और गंभीर संक्रमणों में से एक है। अक्सर लोग तेज बुखार, बदन दर्द और कंपकंपी के साथ ठंड लगने जैसी शुरुआती दिक्कतों को सामान्य मौसमी वायरल बुखार समझकर घरेलू नुस्खों या ओवर-द-काउंटर दवाओं के सहारे टालते रहते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यही लापरवाही बाद में बीमारी को बेहद क्रोनिक और जानलेवा बना देती है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, समय रहते मलेरिया की सही पहचान और सटीक जांच ही इस बीमारी से बचने का एकमात्र सुरक्षित उपाय है।

क्या हैं मलेरिया के शुरुआती लक्षण? इन 5 चेतावनियों को भूलकर भी न करें इग्नोर

चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, मलेरिया के शुरुआती लक्षण काफी हद तक सामान्य फ्लू या वायरल इन्फेक्शन से मिलते-जुलते होते हैं, जिसकी वजह से मरीज सही समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते। यदि आपको या परिवार में किसी को अचानक तेज बुखार के साथ बहुत तेज ठंड लग रही है, शरीर का तापमान कम होने पर अत्यधिक पसीना आ रहा है, या फिर बार-बार अंतराल पर बुखार लौट रहा है, तो यह मलेरिया का स्पष्ट संकेत हो सकता है। इसके अलावा गंभीर सिरदर्द, मांसपेशियों में असहनीय दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी और हर समय थकान बने रहना भी इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप हाल ही में किसी ऐसे इलाके से यात्रा करके लौटे हैं जहां मच्छरों का प्रकोप ज्यादा है, तो आपको इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।

24 से 48 घंटे हैं बेहद महत्वपूर्ण: एक्सपर्ट से जानिए टेस्ट कराने का सबसे सही समय

अगर आपको बुखार आ रहा है और पेरासिटामोल जैसी सामान्य दवाएं लेने के बाद भी 24 से 48 घंटे के भीतर स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है, तो बिना एक मिनट गंवाए ब्लड टेस्ट कराना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर लैब टेस्ट कराने से न केवल संक्रमण के प्रकार का पता चलता है, बल्कि बिना डॉक्टर की सलाह के अनावश्यक रूप से एंटीबायोटिक्स या हैवी मलेरिया दवाएं खाने के साइड इफेक्ट्स से भी बचा जा सकता है। समय पर जांच होने से सही इलाज तुरंत शुरू हो जाता है, जिससे मरीज बहुत जल्दी रिकवर कर जाता है।

प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम का खतरा: देरी करने पर फेल हो सकते हैं शरीर के मुख्य अंग

हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि मलेरिया का एक खास परजीवी, जिसे 'प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम' (Plasmodium Falciparum) कहा जाता है, शरीर के भीतर बेहद तेजी से फैलता है। अगर इसके संक्रमण की पहचान और इलाज में थोड़ी सी भी देरी हो जाए, तो यह मरीज को गंभीर एनीमिया (खून की भारी कमी) की स्थिति में धकेल देता है। इसके अलावा, यह खतरनाक परजीवी सीधे मरीज के दिमाग पर असर डाल सकता है जिसे सेरेब्रल मलेरिया कहते हैं। इसकी वजह से किडनी डैमेज होना, सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ होना और शरीर के कई अंगों का एक साथ काम करना बंद कर देना (मल्टीपल ऑर्गन फेलियर) जैसी बेहद नाजुक और जानलेवा स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

RDT से लेकर PCR तक: जानिए मलेरिया जांच के 3 सबसे आधुनिक और सटीक तरीके

आजकल चिकित्सा विज्ञान में मलेरिया की पहचान के लिए कई अत्याधुनिक और त्वरित जांच प्रणालियां उपलब्ध हैं। जहां ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में पारंपरिक माइक्रोस्कोपी की सुविधा नहीं होती, वहां डॉक्टर इन आधुनिक टेस्ट का सहारा लेते हैं:

  • रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT): यह एक बेहद तेज और आसान ब्लड टेस्ट है, जो मात्र कुछ ही मिनटों में मलेरिया परजीवी की मौजूदगी की सटीक रिपोर्ट दे देता है। आपातकालीन स्थितियों में यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

  • क्वांटिटेटिव बफी कोट (QBC) टेस्ट: कुछ विशेष और उलझे हुए मामलों में, जहां परजीवी की संख्या खून में बहुत कम होती है, वहां तेजी से और सूक्ष्मता से जांच करने के लिए इस एडवांस तकनीक का उपयोग किया जाता है।

  • पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (PCR) टेस्ट: जब अन्य सभी टेस्ट रिपोर्ट स्पष्ट नहीं कर पाते, तब सबसे सटीक, संवेदनशील और डीएनए-आधारित परिणाम पाने के लिए पीसीआर टेस्ट किया जाता है, जो संक्रमण की 100% सही जानकारी देता है।