Parenting Tips: बच्चा आपके बजाय पार्टनर से ज्यादा है अटैच? मन में आती है जलन तो बिल्कुल न लें टेंशन, एक्सपर्ट के ये नुस्खे बदल देंगे आपकी जिंदगी
माता-पिता बनना दुनिया के सबसे खूबसूरत एहसासों में से एक है, लेकिन इसके साथ ही यह सफर कई तरह के अनकहे इमोशन्स और मानसिक चुनौतियों से भी भरा होता है। बहुत से माता-पिता शायद समाज या परिवार के डर से खुलकर इस बात को कभी स्वीकार नहीं करते, लेकिन अपने ही जिगर के टुकड़े को खुद के बजाय अपने लाइफ पार्टनर (पति या पत्नी) के ज्यादा करीब देखकर मन में हल्की सी जलन, हीनभावना या असुरक्षा महसूस होना एक बेहद सामान्य मानवीय व्यवहार है। यह भावना अक्सर अचानक और अनजाने में पैदा होती है, जो दिल में भीतर तक चुभ सकती है। जब भी बच्चा हर छोटी-मोटी मदद के लिए सिर्फ एक ही पैरेंट को पुकारता है, उनके ऑफिस से आते ही ज्यादा खुश दिखाई देता है या हर बार उन्हीं की गोद में सोने की जिद करता है, तो दूसरे पैरेंट के मन में खुद के अनदेखा और रिजेक्ट किए जाने का अहसास गहरा होने लगता है। अगर आप भी इन दिनों पैरेंटिंग के इसी दौर से गुजर रहे हैं, तो परेशान होने के बजाय एक्सपर्ट्स के इन बेहद खास और प्रैक्टिकल पैरेंटिंग टिप्स को समझें, जो आपके और बच्चे के रिश्ते में दोबारा वही पुराना अपनापन और मजबूती वापस ला सकते हैं।
आखिर क्यों मन में पैदा होती है असुरक्षा और जलन की यह भावना?
पैरेंटिंग एक्सपर्ट्स और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जब बच्चा किसी एक पैरेंट को ज्यादा तवज्जो देता है, तो दूसरे पैरेंट के मन में आने वाला यह रिएक्शन सिर्फ बच्चे की पसंद या नापसंद तक सीमित नहीं होता। असल में इस भावना के पीछे माता-पिता की अत्यधिक शारीरिक थकान, इमोशनल असुरक्षा, पार्टनर के साथ अनजानी तुलना या खुद को एक पैरेंट के रूप में कम महत्वपूर्ण और असफल महसूस करने का डर छिपा होता है। हमारे समाज में पैरेंटिंग (परवरिश) को हमेशा से एक बेहद निस्वार्थ, आदर्श और संतुलित रूप में पेश किया जाता है, यही वजह है कि जब किसी माता या पिता के मन में अपने ही बच्चे को लेकर ऐसी नकारात्मक भावनाएं आती हैं, तो वे खुद को ही दोषी मानने लगते हैं और आत्मग्लानि से भर जाते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स का साफ मानना है कि यह किसी बुरे माता-पिता होने की निशानी बिल्कुल नहीं है, बल्कि यह एक बेहद स्वाभाविक इमोशनल और साइकोलॉजिकल प्रतिक्रिया है, जो किसी के साथ भी हो सकती है।
जानिए बच्चे क्यों करते हैं पक्षपात, क्या है इसके पीछे का असली कारण?
अक्सर छोटे बच्चों का मानसिक और भावनात्मक विकास लगातार बदलता रहता है। बच्चे किसी एक पैरेंट को उस समय इसलिए ज्यादा चुनते हैं या उनके इर्द-गिर्द घूमते हैं, क्योंकि उस विशेष समय में वह पैरेंट उन्हें ज्यादा शांत, खुलकर खेलते हुए, आसानी से उपलब्ध या ज्यादा मजेदार (फन-लविंग) लग रहा होता है। कई बार यह भी देखा गया है कि जिस पैरेंट के साथ बच्चा दिनभर में सबसे कम समय बिता पाता है (जैसे कामकाजी माता-पिता), उनकी ओर बच्चे का अट्रैक्शन अचानक ज्यादा बढ़ जाता है। इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि घर पर रहने वाला या दूसरा पैरेंट बच्चे को कम प्यार करता है या बच्चा उससे हमेशा के लिए दूर हो रहा है। बच्चों का लगाव समय और उम्र के साथ अलग-अलग रूप लेता रहता है। यह स्थिति खासतौर पर तब ज्यादा तकलीफदेह और कष्टकारी हो जाती है, जब एक पैरेंट घर की रोजमर्रा की जिम्मेदारियों, स्कूल के होमवर्क, समय पर खाना खिलाने और अनुशासन बनाए रखने जैसी कठिन व अदृश्य मेहनत में दिन-रात लगा रहता है, जबकि दूसरे पैरेंट को सिर्फ बच्चे की प्यारी सी मुस्कान, खेलकूद और ढेर सारा प्यार आसानी से मिलता दिखाई देता है। ऐसे में यह जलन केवल बच्चे के रिश्ते से नहीं, बल्कि आपकी शारीरिक मेहनत और भावनात्मक थकान (इमोशनल बर्नआउट) की वजह से पैदा होती है।
प्रतियोगिता करने के बजाय अपनी भावनाओं को गहराई से समझना है जरूरी
पैरेंटिंग एक्सपर्ट्स की मानें तो इस तरह की कड़वी या असुरक्षित भावनाओं को मन में दबाने या खुद को कोसने के बजाय उन्हें गहराई से समझना बेहद जरूरी है। ऐसे समय में खुद से पूरी ईमानदारी के साथ यह सवाल पूछें कि आखिर आपको सबसे ज्यादा चोट किस बात से लग रही है? क्या आप बच्चे से खुद की बढ़ती दूरी से परेशान हैं, पार्टनर के साथ अपनी तुलना कर रहे हैं या फिर खुद को कम पसंद किए जाने के डर से घबरा रहे हैं? जब आप अपनी इस भावना की असली वजह को स्पष्ट रूप से समझ लेंगे, तो उसे संभालना और दूर करना बहुत आसान हो जाता है। ऐसे संवेदनशील समय में कई पैरेंट बच्चे का प्यार और ध्यान जबरदस्ती अपनी तरफ खींचने के लिए पार्टनर के साथ एक कंपटीशन (प्रतियोगिता) शुरू कर देते हैं, जो बच्चे के कोमल मन पर उल्टा और नकारात्मक असर डाल सकता है।
इन छोटी-छोटी आदतों से बच्चे के साथ अपने रिश्ते को बनाएं दोबारा मजबूत
बच्चे के दिल में अपनी जगह दोबारा बनाने और रिश्ते को मजबूत करने के लिए आपको किसी बड़े बदलाव की नहीं, बल्कि स्वाभाविक और धीरे-धीरे प्रयास करने की जरूरत होती है। बच्चे अपने माता-पिता से किसी परफेक्शन (पूर्णता) की उम्मीद नहीं रखते, वे केवल आपकी भरोसेमंद और प्यार भरी मौजूदगी को याद रखते हैं। रिश्ते में अपनापन बढ़ाने के लिए बच्चे के साथ कुछ छोटी-छोटी निजी आदतें और खास रूटीन बनाएं। उदाहरण के लिए, रात को सोते समय उन्हें अपने हाथों से कोई मजेदार कहानी सुनाएं, शाम को पार्क में उनके साथ छोटी सी वॉक या टहलने जाएं, या फिर वीकेंड पर उनका कोई पसंदीदा छोटा सा इनडोर गेम साथ मिलकर खेलें। यह छोटी-छोटी गतिविधियां बच्चे को यह अहसास कराएंगी कि आप उनके जीवन में कितने महत्वपूर्ण और सुरक्षित स्तंभ हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि अगर अनदेखा किए जाने की यह भावना आपके मन में बहुत ज्यादा गहरी हो जाए, आपके वैवाहिक जीवन को प्रभावित करने लगे और आप बार-बार अपनी ही अहमियत पर सवाल उठाने लगें, तो बिना किसी संकोच के एक अच्छे मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट या काउंसलर की सहायता जरूर लेनी चाहिए।