देश में आधे से ज्यादा लोगों की थाली में प्रोटीन गायब! नेशनल न्यूट्रिशन रिपोर्ट में खुलासा, जानिए सेहत पर पड़ता है क्या बुरा असर

देश में आधे से ज्यादा लोगों की थाली में प्रोटीन गायब! नेशनल न्यूट्रिशन रिपोर्ट में खुलासा, जानिए सेहत पर पड़ता है क्या बुरा असर

आर्थिक विकास और बेहतर जीवनशैली के दावों के बीच देश के खान-पान को लेकर एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। राष्ट्रीय स्तर पर किए गए पोषण सर्वेक्षणों और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के दिशानिर्देशों के अध्ययन से खुलासा हुआ है कि भारत में 70 से 80 प्रतिशत से अधिक लोगों के दैनिक भोजन में आवश्यक प्रोटीन की भारी कमी है। सर्वेक्षण के मुताबिक, अधिकांश भारतीय परिवारों की थाली में लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा केवल कार्बोहाइड्रेट और वसा (फैट) का होता है, जबकि शरीर की कोशिकाओं, मांसपेशियों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के निर्माण के लिए अनिवार्य 'प्रोटीन' का कोटा आधा भी पूरा नहीं हो पाता।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में प्रोटीन को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह है कि लोग दाल या एक कटोरी दही खाने को पर्याप्त मान लेते हैं, जबकि मात्रा और गुणवत्ता (बायो-अवेलेबिलिटी) दोनों ही मानकों पर यह शरीर की न्यूनतम जरूरत से काफी कम बैठता है। देश में शाकाहारी आबादी का बड़ा हिस्सा इस कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित पाया गया है।

शरीर को रोजाना कितने प्रोटीन की जरूरत? क्या कहता है आईसीएमआर का मानक?

आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) के तय मानकों के अनुसार:

  • सामान्य वयस्क की जरूरत: एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना उसके शरीर के प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से कम से कम 0.83 से 1 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

  • सीधा गणित: यदि किसी व्यक्ति का वजन 60 किलोग्राम है, तो उसे दिनभर में कम से कम 50 से 60 ग्राम शुद्ध प्रोटीन मिलना चाहिए।

  • वास्तविक स्थिति: सर्वेक्षणों में पाया गया है कि एक औसत भारतीय दिनभर में मुश्किल से 25 से 35 ग्राम प्रोटीन ही ले पाता है, जिससे शरीर लगातार 'प्रोटीन डेफिसिट' में रहता है।

गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बढ़ते बच्चों और शारीरिक श्रम करने वाले युवाओं के लिए यह जरूरत 1.2 से 1.5 ग्राम प्रति किलोग्राम तक बढ़ जाती है, जहां यह अंतर और भी खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है।

प्रोटीन की कमी से शरीर पर होने वाले 5 गंभीर नुकसान

  1. मांसपेशियों का क्षय (सार्कोपेनिया): शरीर को जब भोजन से प्रोटीन नहीं मिलता, तो वह अपनी आंतरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए हड्डियों और मांसपेशियों से प्रोटीन खींचने लगता है। इससे कम उम्र में ही शरीर ढीला पड़ने लगता है और थकान बनी रहती है।

  2. धीमा मेटाबॉलिज्म और बढ़ता पेट (मोटापा): प्रोटीन तृप्ति (फुलनेस) का अहसास कराता है। इसकी कमी से बार-बार भूख लगती है और लोग कार्ब्स व चीनी खाते हैं, जिससे विसरल फैट (पेट की चर्बी) और फैटी लिवर का खतरा बढ़ता है।

  3. कमजोर इम्युनिटी और घाव भरने में देरी: एंटीबॉडीज और इम्यून सेल्स पूरी तरह प्रोटीन से बने होते हैं। प्रोटीन की कमी वाले लोग मौसमी संक्रमणों और बीमारियों की चपेट में जल्दी आते हैं।

  4. बालों का झड़ना और रूखी त्वचा: केराटिन और कोलेजन प्रोटीन की कमी से बाल तेजी से पतले होकर झड़ने लगते हैं और त्वचा की प्राकृतिक चमक खत्म हो जाती है।

  5. हड्डियों की कमजोरी: पर्याप्त प्रोटीन न मिलने से हड्डियों का घनत्व (Bone Density) घटता है, जिससे फ्रैक्चर और ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ जाता है।

अपनी दैनिक थाली में प्रोटीन कैसे बढ़ाएं? सस्ते और आसान विकल्प

पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक, महंगे प्रोटीन सप्लीमेंट्स के बिना भी घरेलू रसोई से इस कमी को पूरा किया जा सकता है:

  • शाकाहारी विकल्प: पनीर (100 ग्राम में लगभग 18-20 ग्राम प्रोटीन), सोया चंक्स (50 ग्राम में करीब 25 ग्राम प्रोटीन), टोफू, चना, राजमा, लोबिया, मूंग की दाल और स्प्राउट्स। इसके अलावा कद्दू के बीज, अलसी और भुने चने को दिन के स्नैक्स में शामिल करें।

  • मांसाहारी विकल्प: अंडे (प्रति अंडा 6 ग्राम प्रोटीन), चिकन ब्रेस्ट और मछली लीन प्रोटीन के सबसे उत्कृष्ट स्रोत हैं, जिनका अवशोषण शरीर में बहुत तेजी से होता है।

  • दूध और दही: रोजाना 2 गिलास दूध या एक बड़ा कटोरा ग्रीक योगर्ट/दही लेने से दैनिक जरूरत का 10-15 ग्राम आसानी से मिल जाता है।

विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि अगर भारतीय अपनी थाली में आधी रोटी या चावल कम करके उसकी जगह पनीर, दाल, स्प्राउट्स या अंडों की मात्रा दोगुनी कर दें, तो देश में कुपोषण और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है।