तेजी से पांव पसार रहा स्वाइन फ्लू (H1N1 Virus)! जानिए इसके शुरुआती लक्षण और किन 5 वर्ग के लोगों के लिए बेहद खतरनाक है यह संक्रमण

तेजी से पांव पसार रहा स्वाइन फ्लू (H1N1 Virus)! जानिए इसके शुरुआती लक्षण और किन 5 वर्ग के लोगों के लिए बेहद खतरनाक है यह संक्रमण

मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव और मानसूनी नमी के बीच देश के विभिन्न राज्यों में 'स्वाइन फ्लू' यानी H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अस्पतालों की ओपीडी (OPD) में सर्दी, खांसी, तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आम फ्लू जैसा दिखने वाला यह वायरल संक्रमण लापरवाही बरतने पर बेहद गंभीर और जानलेवा रूप ले सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी है। स्वाइन फ्लू एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र (Respiratory System) पर हमला करती है।

स्वाइन फ्लू H1N1 टाइप-ए इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है। हालांकि शुरुआत में यह संक्रमण सूअरों (Swine) के जरिए फैला था, लेकिन अब यह पूरी तरह से इंसानों से इंसानों में फैलने वाली (Human-to-Human transmission) बीमारी बन चुका है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो उसकी सांस और थूक की सूक्ष्म बूंदें (Droplets) हवा में फैल जाती हैं। हवा में मौजूद इस वायरस की चपेट में आने या किसी संक्रमित सतह को छूने के बाद अपनी आंख, नाक या मुंह को छूने से स्वस्थ व्यक्ति भी इसका शिकार हो जाता है।

स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण: इसे सामान्य सर्दी-जुकाम समझने की न करें भूल

स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण आम मौसमी फ्लू (Seasonal Flu) से काफी मिलते-जुलते होते हैं, जिसके कारण अधिकांश लोग शुरुआत में इसे मामूली सर्दी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन इसके लक्षणों की तीव्रता सामान्य जुकाम से कहीं ज्यादा तेज और गंभीर होती है।

स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षणों में 100 डिग्री से अधिक तेज बुखार होना, शरीर में भयानक ऐंठन व जोड़ों का दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना शामिल है। इसके साथ ही सूखी या बलगम वाली तेज खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, ठंड लगना और बहती नाक इसके प्राथमिक संकेत हैं। कुछ मरीजों में इसके साथ ही उल्टी, दस्त (डायरिया) और पेट में मरोड़ जैसी पाचन संबंधी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। यदि संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच जाता है, तो मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ और सीने में दर्द महसूस होने लगता है।

किन लोगों को है स्वाइन फ्लू से सबसे ज्यादा खतरा? (High-Risk Groups)

यद्यपि स्वाइन फ्लू किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कुछ विशेष वर्ग के लोगों के लिए यह संक्रमण बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है। इन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity) कमजोर या संवेदनशील होती है, जिससे इनमें निमोनिया और लंग फेलियर जैसी जटिलताएं (Complications) होने की संभावना बहुत अधिक होती है।

पहला वर्ग गर्भवती महिलाओं (Pregnant Women) का है। गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल और प्रतिरक्षा परिवर्तनों के कारण वायरस का हमला बहुत घातक हो सकता है। गर्भवती महिलाओं में स्वाइन फ्लू के कारण भ्रूण के विकास में बाधा और समय से पहले प्रसव (Preterm Labor) का खतरा बढ़ जाता है।

दूसरा वर्ग 5 वर्ष से कम उम्र के छोटे बच्चे और नवजात शिशु हैं। छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह से विकसित नहीं होता है, जिससे वायरस बहुत तेजी से उनके फेफड़ों में फैल जाता है और वे बहुत जल्दी निर्जलीकरण (Dehydration) व सांस की गंभीर समस्या का शिकार हो जाते हैं।

तीसरा वर्ग 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग (Senior Citizens) हैं। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राकृतिक रूप से कम हो जाती है, जिससे बुजुर्गों का शरीर वायरस से ठीक से मुकाबला नहीं कर पाता।

चौथा वर्ग वे लोग हैं जो पहले से ही किसी न किसी पुरानी या गंभीर बीमारी (Comorbidities) से पीड़ित हैं। इसमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) या कैंसर के मरीज शामिल हैं। ऐसे मरीजों में स्वाइन फ्लू का वायरस मौजूदा बीमारियों को और अधिक भयानक बना देता है।

पांचवां वर्ग ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित वे लोग हैं जो स्टेरॉयड, कीमोथेरेपी या इम्युनोसप्रेसिव दवाएं ले रहे हैं। इन दवाओं के कारण उनका शरीर संक्रमण से लड़ने में असमर्थ होता है।

बचाव के उपाय और कब जाना चाहिए अस्पताल?

स्वाइन फ्लू से बचाव का सबसे कारगर तरीका व्यक्तिगत स्वच्छता और सावधानी है। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें और बाहर निकलते समय मास्क (N95 या ट्रिपल लेयर) का इस्तेमाल अवश्य करें। अपने हाथों को समय-समय पर साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं या अल्कोहल-आधारित सैनिटाइजर का उपयोग करें। यदि आपके आसपास किसी को सर्दी-खांसी है, तो उससे कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।

फ्लू सीजन की शुरुआत में हर साल 'वार्षिक फ्लू वैक्सीन' (Annual Flu Vaccine) जरूर लगवाएं, विशेष रूप से हाई-रिस्क ग्रुप वाले लोगों के लिए यह टीका बेहद सुरक्षात्मक साबित होता है। भरपूर मात्रा में पानी पीएं, पौष्टिक और इम्युनिटी बढ़ाने वाला आहार लें। यदि आपको या परिवार के किसी सदस्य को सांस लेने में कठिनाई, सीने में तेज दर्द, नीले पड़ते होंठ, लगातार तेज बुखार या भ्रम की स्थिति महसूस हो, तो बिना एक पल गंवाए तुरंत अस्पताल के आपातकालीन विभाग में संपर्क करें और डॉक्टर की सलाह से एंटी-वायरल दवाएं (जैसे ऑसेल्टामिविर/टेमीफ्लू) शुरू करें।