कैंसर का खतरा होगा कोसों दूर: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जीवनशैली के ये 6 बदलाव रोक सकते हैं जानलेवा ट्यूमर का खतरा
आज के दौर में कैंसर दुनिया भर में सबसे तेजी से फैलने वाली और जानलेवा बीमारियों में से एक बन चुका है। खान-पान में मिलावट, गतिहीन जीवनशैली, अत्यधिक तनाव, वायु प्रदूषण और रसायनों के बढ़ते उपयोग के कारण हर साल लाखों लोग कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। आम तौर पर लोगों के बीच यह डर बना रहता है कि कैंसर किसी को भी कभी भी हो सकता है और इससे बचना नामुमकिन है। लेकिन आधुनिक ऑन्कोलॉजी (कैंसर विज्ञान) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वैश्विक शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि 40 से 50 प्रतिशत कैंसर के मामलों को केवल अपनी दैनिक जीवनशैली, खान-पान और आदतों में सही बदलाव करके पूरी तरह रोका जा सकता है।
कैंसर वास्तव में शरीर की कोशिकाओं के डीएनए में म्यूटेशन (विकार) और अनियंत्रित विभाजन के कारण पैदा होता है। जब हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और शरीर में लगातार क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन (दीर्घकालिक सूजन) बना रहता है, तो कैंसर कोशिकाएं तेजी से पनपने लगती हैं। अपने दैनिक जीवन में कुछ मूलभूत और वैज्ञानिक बदलाव लाकर आप अपने शरीर के भीतर ऐसा रक्षा कवच तैयार कर सकते हैं जिससे कैंसर की कोशिकाएं शरीर में पनप ही न पाएं।
एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर से भरपूर प्राकृतिक आहार: प्रोसेस्ड फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और रेड मीट से बनाएं दूरी
कैंसर की रोकथाम की पहली और सबसे मजबूत नींव आपकी खाने की थाली से शुरू होती है। अंतरराष्ट्रीय कैंसर रिसर्च एजेंसी (IARC) के अनुसार हमारा खान-पान शरीर के सेलुलर स्वास्थ्य को सीधे तय करता है।
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एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोन्यूट्रिएंट्स का सेवन: अपनी दैनिक डाइट में ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी जैसी क्रूसिफेरस सब्जियां शामिल करें। इनमें 'सल्फोराफेन' नामक शक्तिशाली तत्व पाया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकता है। इसके अलावा टमाटर (लाइकोपीन), गाजर (बीटा-कैरोटीन), हल्दी (करक्यूमिन), लहसुन और जामुन/बेरीज का नियमित सेवन करें जो फ्री रेडिकल्स को नष्ट कर डीएनए को डैमेज होने से बचाते हैं।
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फाइबर युक्त साबुत अनाज: दलिया, ब्राउन राइस, बाजरा, रागी और हरी पत्तेदार सब्जियों में प्रचुर मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है। फाइबर आंतों की नियमित सफाई करता है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है, जिससे कोलोरेक्टल (आंत) कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है।
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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड का त्याग: प्रिजर्वेटिव्स, कृत्रिम रंग और अत्यधिक सोडियम युक्त पैकेज्ड स्नैक्स, डिब्बाबंद जूस और फ्रोजन फूड्स शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं।
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प्रोसेस्ड मीट और ज्यादा तला-भुना खाना: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रोसेस्ड मीट (सॉसेज, बेकन, सलामी आदि) को ग्रुप-1 कार्सिनोजेन (सीधे कैंसर पैदा करने वाला) की श्रेणी में रखा है। साथ ही बार-बार गर्म किए गए तेल में तली चीजें खाने से एक्रिलामाइड जैसे विषैले तत्व बनते हैं जो पेट और आंतों के कैंसर को जन्म दे सकते हैं।
तंबाकू, धूम्रपान और शराब का पूर्ण त्याग: 40% कैंसर के मुख्य ट्रिगर्स पर लगाएं लगाम
तंबाकू और शराब कैंसर के सबसे बड़े और सिद्ध प्रत्यक्ष कारण हैं। भारत में सामने आने वाले कुल कैंसर मामलों में लगभग आधे केवल इन दो आदतों से जुड़े होते हैं।
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तंबाकू और सिगरेट (Tobacco & Smoking): चाहे सिगरेट, बीड़ी, सिगार हो या गुटखा, खैनी और जर्दा—तंबाकू में 70 से अधिक ज्ञात कार्सिनोजेनिक (कैंसर कारक) केमिकल्स पाए जाते हैं। तंबाकू मुंह, गले, फेफड़े, भोजन नली, मूत्राशय और अग्न्याशय (पैन्क्रियाज) के कैंसर की मुख्य जड़ है। तंबाकू का पूर्ण त्याग करते ही शरीर के फेफड़ों और ऊतकों की प्राकृतिक हीलिंग प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
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शराब (Alcohol) का सेवन: अल्कोहल जब शरीर में टूटता है तो वह 'एसिटाल्डिहाइड' नामक विषैले केमिकल में बदल जाता है, जो लिवर, आंत, गले और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। कैंसर से बचाव के लिए शराब से पूरी तरह दूरी बनाना ही सबसे सुरक्षित कदम है।
वजन नियंत्रण और नियमित वर्कआउट: मोटापे से जुड़े 13 प्रकार के कैंसर का जोखिम करें कम
अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार मोटापा और गतिहीन (Sedentary) जीवनशैली आज धूम्रपान के बाद कैंसर का दूसरा सबसे बड़ा रोके जा सकने वाला कारण बन चुका है।
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मोटापे और कैंसर का जैविक संबंध: शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी (Visceral Fat) लगातार एस्ट्रोजन, इंसुलिन और इन्फ्लेमेटरी साइटोकिन्स जैसे हार्मोन्स का अत्यधिक स्राव करती है। हार्मोन्स का यह असंतुलन महिलाओं में स्तन (ब्रेस्ट) और गर्भाशय (एंडोमेट्रियल) कैंसर तथा पुरुषों में प्रोस्टेट, किडनी और लिवर कैंसर का कारण बनता है।
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दैनिक 30 से 45 मिनट का मध्यम व्यायाम: सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम कार्डियो एक्सरसाइज (जैसे तेज चलना, जॉगिंग, स्विमिंग, योग या साइक्लिंग) करें। व्यायाम करने से इंसुलिन संवेदनशीलता सुधरती है, शरीर में सूजन घटती है और इम्यून सिस्टम की नेचुरल किलर (NK) सेल्स सक्रिय होकर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने लगती हैं।
प्लास्टिक के बर्तनों, माइक्रोवेव और केमिकल टॉक्सिन्स से बनाएं दूरी
हमारी रसोई और घरों में उपयोग होने वाले कई आधुनिक उत्पाद जाने-अनजाने हमारे शरीर में धीमा जहर घोल रहे हैं।
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गर्म भोजन और प्लास्टिक का संपर्क: प्लास्टिक के बर्तनों या पॉलीथिन में गर्म चाय, दाल या खाना रखने से 'बिस्फिनोल-ए' (BPA) और 'थैलेट्स' (Phthalates) जैसे खतरनाक केमिकल्स भोजन में घुल जाते हैं। ये केमिकल्स शरीर में एंडोक्राइन डिसरप्टर (हार्मोन बिगाड़ने वाले) की तरह काम करते हैं। प्लास्टिक के बर्तनों में खाना माइक्रोवेव करने से बचें और कांच, मिट्टी, पीतल या स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करें।
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नॉन-स्टिक बर्तनों का सावधानीपूर्वक उपयोग: पुराने या स्क्रैच लगे नॉन-स्टिक बर्तनों की टेफ्लॉन कोटिंग से निकलने वाले PFAS (फॉरएवर केमिकल्स) स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक होते हैं।
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शुद्ध पेयजल और पेस्टिसाइड्स से बचाव: सब्जियों और फलों को पकाने से पहले हल्के गुनगुने पानी और सिरके या नमक से अच्छी तरह धोएं ताकि कीटनाशकों (पेस्टिसाइड्स) के अवशेष निकल जाएं। हमेशा फिल्टर किया हुआ शुद्ध पानी ही पिएं।
7 से 8 घंटे की गहरी नींद और तनाव प्रबंधन: डीएनए रिपेयर का प्राकृतिक समय
मानव शरीर को प्राकृतिक रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह दिनभर में डैमेज हुई कोशिकाओं की मरम्मत रात के समय नींद के दौरान करता है।
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मेलाटोनिन हार्मोन की भूमिका: रात को अंधेरे कमरे में गहरी नींद लेने से मस्तिष्क की पीनियल ग्रंथि से 'मेलाटोनिन' (Melatonin) हार्मोन निकलता है। मेलाटोनिन शरीर का सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है जो डीएनए म्यूटेशन को रोकता है और ट्यूमर सप्रेसर जींस को एक्टिव रखता है।
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क्रॉनिक स्ट्रेस का प्रभाव: लगातार अत्यधिक मानसिक तनाव में रहने से शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन हार्मोन की बाढ़ आ जाती है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को दबा (Immunosuppression) देती है। नियमित ध्यान (Meditation), प्राणायाम और प्रकृति के बीच समय बिताने से इम्यून सिस्टम सशक्त रहता है।
समय पर टीकाकरण और नियमित प्रिवेंटिव हेल्थ स्क्रीनिंग की आदत
कैंसर से पूरी तरह सुरक्षित रहने के लिए जीवनशैली के साथ-साथ मेडिकल साइंस के प्रिवेंटिव टूल्स का उपयोग करना बेहद आवश्यक है।
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लाइफरक्षक टीके (Vaccines): सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर से बचाव के लिए 9 से 26 वर्ष की लड़कियों और महिलाओं को 'एचपीवी वैक्सीन' (HPV Vaccine) जरूर लगवानी चाहिए। इसी प्रकार लिवर कैंसर से सुरक्षा के लिए 'हेपेटाइटिस-बी' का टीका लगवाना अनिवार्य है।
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नियमित मेडिकल चेकअप: 40 की उम्र पार करने के बाद महिलाओं को मैमोग्राफी और पैप स्मीयर टेस्ट तथा पुरुषों को प्रोस्टेट (PSA) और सामान्य ब्लड टेस्ट हर 1-2 साल में करवाने चाहिए। शुरुआती अवस्था (स्टेज 1) में पहचाना गया कैंसर लगभग 95% मामलों में पूरी तरह ठीक हो जाता है।