सीआईडी के बाद अब ईडी के चक्रव्यूह में फंसे अभिषेक बनर्जी: कोलकाता के CGO कॉम्प्लेक्स में दो दर्जन सवालों से हुआ सामना
पश्चिम बंगाल की राजनीति और केंद्रीय जांच एजेंसियों के गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की कानूनी मुश्किलें हर बीतते दिन के साथ दोगुनी होती जा रही हैं। फर्जी हस्ताक्षर के एक बेहद पेचीदा मामले में पश्चिम बंगाल क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) द्वारा की गई लंबी पूछताछ की आंच अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें अपने शिकंजे में ले लिया है। पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित प्राथमिक स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सोमवार 15 जून 2026 को ईडी के आला अधिकारियों ने कोलकाता के साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स (CGO Complex) कार्यालय में अभिषेक बनर्जी को तलब कर घंटों मैराथन पूछताछ की है। पीटीआई और लाइव हिन्दुस्तान के विशेष संवाददाता प्रमोद प्रवीण की इस एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड लाइव इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में जानिए आखिर ईडी दफ्तर के भीतर टीएमसी के इस सबसे कद्दावर नेता से किन दो दर्जन तीखे सवालों पर जवाब मांगा गया।
रविवार को CID की 8 घंटे की ग्रिलिंग और सोमवार सुबह 11 बजे ED दफ्तर में एंट्री, चौतरफा घिरे टीएमसी सांसद
डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से सांसद अभिषेक बनर्जी इस समय दोहरी जांच के चक्रव्यूह में फंस चुके हैं। गौरतलब है कि ठीक एक दिन पहले यानी रविवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से जुड़े विधायकों के हस्ताक्षरों की कथित जालसाजी (Forgery) के मामले में भवानी भवन में सीआईडी ने उनसे करीब साढ़े आठ घंटे की मैराथन पूछताछ की थी। इस थका देने वाली ग्रिलिंग के ठीक अगले ही दिन यानी सोमवार सुबह करीब 11 बजे अभिषेक बनर्जी भारी सुरक्षा घेरे के बीच साल्ट लेक में ईडी के सीजीओ कॉम्प्लेक्स दफ्तर पहुंच गए। करोड़ों रुपये के 'नौकरी के बदले कैश' (Cash-for-Jobs Scams) घोटाले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत समन मिलने पर पहुंचे अभिषेक ने दफ्तर में दाखिल होते समय मीडिया के कैमरों के सामने किसी भी तरह की टिप्पणी करने या बयान देने से साफ इनकार कर दिया।
सवालों की लिस्ट के साथ तैयार थे दिल्ली और कोलकाता के अफसर, पूरी पूछताछ की हुई हाई-टेक वीडियोग्राफी
प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस हाई-प्रोफाइल पूछताछ के लिए दो दर्जन से भी अधिक बेहद चुनिंदा और तीखे सवालों की एक विस्तृत प्रश्नावली (Questionnaire) पहले से ही तैयार कर रखी थी। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूरी पूछताछ प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी रखने के लिए इसकी लाइव वीडियोग्राफी कराई जा रही है। अभिषेक बनर्जी के इस पूरे बयान और रिकॉर्डिंग का बाद में डिजिटल रूप से सत्यापन (Verification) किया जाएगा। इसके साथ ही इस महा-घोटाले में पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके अन्य मुख्य आरोपियों, बिचौलियों और गवाहों के बयानों व साक्ष्यों से इसका आमना-सामना (Cross-Verification) करवाकर मिलान किया जाएगा ताकि सच को सामने लाया जा सके।
अवैध पैसे के लेन-देन (Money Trail) की कड़ियों को जोड़ने में जुटी ईडी, पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा से मिले सबूतों पर मांगा स्पष्टीकरण
ईडी के जांचकर्ताओं का मुख्य फोकस इस बात पर है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती के नाम पर जो करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की गई, उस अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) का असली स्रोत क्या था और उसे कहां-कहां खपाया गया। अधिकारी ने खुलासा किया कि बैंक दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड्स और पूर्व में की गई छापेमारी के दौरान जब्त की गई सामग्री के बीच कई गंभीर विसंगतियां (Discrepancies) पाई गई हैं। एजेंसी यह पता लगा रही है कि इस अकूत काले धन का प्रबंधन कौन कर रहा था, इसे किन फर्जी शेल कंपनियों और बैंक खातों के माध्यम से देश-विदेश में ट्रांसफर किया गया और क्या इसके वास्तविक मालिक को छिपाने के लिए लेयरिंग (Layering) की गई थी। इस मामले में जांच एजेंसी पहले ही सूबे के पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा सहित कई रसूखदार लोगों से पूछताछ कर चुकी है और उनसे मिले इनपुट के आधार पर ही अभिषेक बनर्जी से तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं।
राहत की उम्मीद नहीं: 16 जून को फिर भवानी भवन में सीआईडी के सामने होना होगा पेश, अमित शाह को धमकी देने का है आरोप
केंद्रीय एजेंसी ईडी की इस मैराथन पूछताछ से बाहर निकलते ही अभिषेक बनर्जी को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है क्योंकि कल यानी मंगलवार 16 जून 2026 को उन्हें एक बार फिर राज्य की पुलिस एजेंसी सीआईडी के समक्ष पेश होना है। सीआईडी ने उन्हें भवानी भवन स्थित अपने मुख्यालय में हाजिर होने का एक नया नोटिस थमाया है। यह मामला एक पुरानी एफआईआर (FIR) से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि तृणमूल कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने अपनी एक राजनीतिक रैली और जनसंपर्क मुहिम के दौरान न सिर्फ आम जनता में भारी हिंसा भड़काने की कोशिश की थी, बल्कि देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी खुले मंच से सीधे तौर पर गंभीर धमकी दी थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैक-टू-बैक दो-दो जांच एजेंसियों की इस आक्रामक कार्रवाई से पश्चिम बंगाल की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।