Ajit Doval on Terrorism: आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अब नहीं चलेंगे दोहरे मापदंड! मॉस्को में NSA अजीत डोभाल ने दुनिया को सुनाई दो टूक
रूस की राजधानी मॉस्को से भारत की कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा को लेकर एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। गुरुवार को मॉस्को में आयोजित एक बेहद महत्वपूर्ण सुरक्षा बैठक को संबोधित करते हुए अजीत डोभाल ने बिना किसी लाग-लपेट के दो टूक कहा कि आतंकवाद के खिलाफ चल रही वैश्विक लड़ाई में अब किसी भी देश के दोहरे मापदंड बर्दाश्त नहीं किए जा सकते। उन्होंने आतंकवाद के समूल नाश के लिए पूरी दुनिया से एक सुर में एकजुट होकर कड़ा प्रहार करने की पुरजोर वकालत की है।
अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा फोरम में गरजे डोभाल, सर्गेई शोइगु की मेजबानी में हुई हाई-लेवल बैठक
एक आधिकारिक सरकारी बयान के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 28 मई 2026 को रूस के दिग्गज सुरक्षा अधिकारी सर्गेई शोइगु द्वारा आयोजित सुरक्षा मामलों के उच्च प्रतिनिधियों की 14वीं बैठक और पहले अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा फोरम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस बेहद हाई-प्रोफाइल फोरम का मुख्य विषय "बहुध्रुवीय विश्व के उदय के संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष चुनौतियां और खतरे" रखा गया था। इस वैश्विक मंच से दुनिया के तमाम बड़े देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए डोभाल ने आतंकवाद को शह देने वाले मुल्कों को आड़े हाथों लिया।
आतंकवाद के प्रायोजकों का मुकाबला करें जिम्मेदार देश, डोभाल ने दुनिया को दिया कड़ा संदेश
सभा में अपनी बात रखते हुए एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि आज समय आ गया है जब दुनिया के सभी जिम्मेदार देशों को एक बेहद साफ और ठोस फैसला करना होगा। उन्होंने कहा कि देशों को यह तय करना होगा कि वे आतंकवाद के प्रायोजकों (स्पॉन्सर्स) का परोक्ष रूप से समर्थन करते रहेंगे या फिर एक निर्णायक और कठोर कार्रवाई के जरिए उनका डटकर मुकाबला करेंगे। एनएसए ने कड़े शब्दों में दोहराया, "आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड रखने की नीति अब पूरी तरह विफल हो चुकी है।" इसके साथ ही उन्होंने सीमा पार से होने वाले आतंकी खतरों से निपटने के लिए एक व्यापक और एकजुट वैश्विक प्रतिक्रिया तंत्र तैयार करने की जरूरत पर विशेष जोर दिया।
वैश्विक संस्थाओं के पुराने ढांचे में तत्काल सुधार की मांग, द्वितीय विश्व युद्ध के नियमों पर उठाए सवाल
अपने संबोधन के दौरान अजीत डोभाल ने साल 1945 में दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद स्थापित की गई वैश्विक संस्थाओं (जैसे संयुक्त राष्ट्र और अन्य सुरक्षा एजेंसियां) और उनके पुराने पड़ चुके ढांचों में तत्काल प्रभाव से बड़े सुधारों की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने तर्क दिया कि दशकों पुराने ये नियम और संस्थाएं आज की जटिल अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक दौर के खतरों से निपटने में पूरी तरह असरदार साबित नहीं हो पा रही हैं, इसलिए इनमें बदलाव लाना बेहद जरूरी हो चुका है ताकि वैश्विक सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
'ग्लोबल साउथ' को मिले ज्यादा प्रतिनिधित्व, डोभाल ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा पर जताई चिंता
एनएसए ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इन अंतरराष्ट्रीय सुधारों के जरिए 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील और तीसरी दुनिया के देशों) को वैश्विक मंचों पर ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। वैश्विक स्तर पर लिए जाने वाले बड़े और नीतिगत फैसलों की प्रक्रियाओं में इन देशों के विचारों और हितों को प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के मौजूदा हालातों और तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए डोभाल ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर जैसे बेहद महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से होकर गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों का सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के आवागमन सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। आपको बता दें कि 28 और 29 मई को चलने वाले इस दो दिवसीय फोरम के दौरान अजीत डोभाल की कई देशों के सुरक्षा प्रमुखों के साथ अलग से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें होने की भी उम्मीद है।