मेकेदातु डैम विवाद: केंद्रीय मंत्री के बयान से नाराज हुए तमिलनाडु के CM विजय, पीएम मोदी को पत्र लिखकर की सीधी दखल की मांग
तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से चले आ रहे मेकेदातु डैम विवाद को लेकर एक बार फिर राजनीतिक तनातनी चरम पर पहुंच गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री के एक बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। सीएम विजय ने पीएम से इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने और मेकेदातु परियोजना को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान को वापस लेने की मांग की है।
राज्यसभा में दिए गए किस बयान से भड़के सीएम विजय?
यह पूरा विवाद 27 जुलाई को राज्यसभा में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी द्वारा दिए गए एक लिखित उत्तर के बाद गरमाया है। मंत्री ने अपने बयान में कहा था कि 16 फरवरी 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ऐसा कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है कि कावेरी नदी पर कोई भी ढांचा (डैम) बनाने से पहले कर्नाटक को निचले तटीय राज्य (तमिलनाडु) की सहमति लेनी होगी।
मुख्यमंत्री विजय ने इस बयान को 'निराशाजनक' और अंतर-राज्यीय जल विवादों के स्थापित कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार इस बयान को तुरंत वापस ले।
सीएम विजय की मुख्य मांगें और दलीलें
प्रधानमंत्री को भेजी गई चिट्ठी में मुख्यमंत्री विजय ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए हैं:
-
वैधानिक मंजूरी पर रोक: मेकेदातु परियोजना को तब तक कोई भी प्रशासनिक या वैधानिक मंजूरी न दी जाए, जब तक यह कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के पूरी तरह अनुकूल न हो।
-
निचले राज्यों की सहमति जरूरी: सीएम ने सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा 'अलमट्टी डैम मामले' का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में निचले तटीय राज्य की सहमति और केंद्र की मंजूरी अनिवार्य होती है।
-
लाखों किसानों की लाइफलाइन: मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कावेरी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं है, बल्कि यह दक्षिण भारत के लाखों किसानों की जीवनरेखा है, इसलिए इस पर कोई भी एकतरफा फैसला नहीं लिया जाना चाहिए।
ट्रिब्यूनल के नियमों का दिया हवाला
मुख्यमंत्री ने ट्रिब्यूनल के नियमों (क्लॉज XI और XX) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ऊपरी राज्य यानी कर्नाटक आपसी सहमति के बिना ऐसा कोई निर्माण नहीं कर सकता जिससे तमिलनाडु को मिलने वाले तय पानी के हिस्से या शेड्यूल पर कोई असर पड़े। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने से पहले सभी निचले राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाए।