रूस में 'न्यूमोनिक प्लेग' के खौफ के बीच 70 हजार भारतीयों पर खतरा? जानिए विदेश मंत्रालय का फुल-प्रूफ इमरजेंसी एक्शन प्लान
रूस में 'न्यूमोनिक प्लेग' के खौफ के बीच 70 हजार भारतीयों पर खतरा? जानिए विदेश मंत्रालय का फुल-प्रूफ इमरजेंसी एक्शन प्लान
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रूस के साइबेरियाई शहर इरकुत्स्क से सामने आई एक संदिग्ध मौत और न्यूमोनिक प्लेग की आशंका ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली 28 वर्षीय महिला कर्मचारी डार्या शिपिलोवा की अचानक गंभीर निमोनिया के चलते जान चली गई, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर करीब 200 लोगों को मेडिकल क्वारंटाइन में भेज दिया। इस घटनाक्रम के सार्वजनिक होते ही भारत में उन हजारों परिवारों की धड़कनें तेज हो गई हैं, जिनके बच्चे या परिजन रूस में रह रहे हैं। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक रूस के विभिन्न शहरों में 30 हजार से अधिक मेडिकल व तकनीकी छात्र और लगभग 70 हजार भारतीय नागरिक निवास कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच पहले से ही संवेदनशील बने माहौल में प्लेग जैसी जानलेवा बीमारी की आहट ने परिजनों की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे हर किसी की निगाहें अब भारत सरकार और विदेश मंत्रालय के अगले कदम पर टिक गई हैं।
विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान: किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए भारत पूरी तरह तैयार
नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रूस के ताजा हालात पर सरकार का पक्ष पूरी मजबूती से रखा। जब उनसे रूस में कथित प्लेग के खतरे और वहां मौजूद 70 हजार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार पैनी नजर रखे हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ किया कि रूस में हमारे 30,000 से ज्यादा छात्र और करीब 70,000 नागरिक मौजूद हैं, और जब भी किसी नागरिक को सहायता की आवश्यकता होगी, भारत सरकार उनकी मदद के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। हालांकि उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बीमारी के तकनीकी पहलुओं और संक्रमण की वास्तविक स्थिति पर स्पष्ट जानकारी देना संबंधित देश और वहां के स्वास्थ्य प्राधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन भारतीय राजनयिक तंत्र किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर है।
मास्को दूतावास का सुरक्षा तंत्र और भारतीय छात्रों के लिए जारी दिशा-निर्देश
रूस की राजधानी मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास और सेंट पीटर्सबर्ग व व्लादिवोस्तोक स्थित वाणिज्य दूतावासों ने साइबेरिया और सुदूर पूर्वी प्रांतों के विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों से सीधा संपर्क साधा है। रूस के इरकुत्स्क स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, पर्म स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, कज़ान फेडरल यूनिवर्सिटी, कुर्स्क, ट्यूमेन और साइबेरियाई क्षेत्र के अन्य संस्थानों में बड़ी तादाद में भारतीय छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। भारतीय मिशन ने संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासनों से सुरक्षा प्रोटोकॉल की विस्तृत जानकारी मांगी है और छात्र संघों के साथ व्हाट्सएप व हॉटलाइन नेटवर्क सक्रिय कर दिए हैं। छात्रों और कामगारों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें, स्थानीय स्वास्थ्य निगरानी संस्था 'रोसपोत्रेबनादजोर' के दिशा-निर्देशों का पालन करें और यदि किसी को भी बुखार, सांस लेने में तकलीफ या खांसी जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत स्थानीय अस्पताल और भारतीय दूतावास को सूचित करें।
'ब्लैक डेथ' का इतिहास और न्यूमोनिक प्लेग का घातक विज्ञान: यह आम प्लेग से कितना अलग है?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्लेग येरसिनिया पेस्टिस (Yersinia pestis) नामक बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है, जिसने मध्यकाल में यूरोप की एक तिहाई आबादी को लील लिया था। प्लेग मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है—ब्यूबोनिक, सेप्टिसीमिया और न्यूमोनिक। इनमें से न्यूमोनिक प्लेग को सबसे ज्यादा संक्रामक और जानलेवा माना जाता है क्योंकि यह सीधे फेफड़ों पर हमला करता है। ब्यूबोनिक प्लेग जहां संक्रमित पिस्सुओं या चूहों व जंगली मारमोट के काटने से फैलता है, वहीं न्यूमोनिक प्लेग एक इंसान से दूसरे इंसान में खांसने, छींकने और सांस की बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के जरिए हवा के माध्यम से फैल सकता है। इसका इनक्यूबेशन पीरियड मात्र 24 घंटे से लेकर 3 दिन का होता है, और यदि शुरुआती 24 घंटे के भीतर स्ट्रेप्टोमाइसिन, जेंटामाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन या डॉक्सीसाइक्लिन जैसी एंटीबायोटिक्स न दी जाएं, तो यह फेफड़ों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर देता है। यही कारण है कि लैब वर्कर की संदिग्ध मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खतरे की घंटी बजा दी है।
रूस का आधिकारिक रुख बनाम डब्ल्यूएचओ और अमेरिका की निगरानी
इस पूरे मामले में मॉस्को के बयानों और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच एक पर्दा नजर आ रहा है। रूस की संघीय स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी रोसपोत्रेबनादजोर ने दावा किया है कि महिला की मौत 'अज्ञात कारणों से हुए निमोनिया' से हुई है और व्यापक जांच में यह साबित नहीं हुआ कि वह संस्थान में मौजूद खतरनाक जीवाणुओं के संपर्क में आई थी। रूसी अधिकारियों का कहना है कि इरकुत्स्क क्षेत्र में महामारी का कोई जोखिम नहीं है और 5000 से अधिक टेस्ट निगेटिव आए हैं। दूसरी तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रूस से विस्तृत डेटा और लैब रिपोर्ट तलब की है। WHO की महामारी प्रबंधन प्रमुख मारिया वान केरखोव ने स्पष्ट कहा कि एजेंसी यह समझना चाहती है कि महिला की मौत का वास्तविक पैथोजेन क्या था। वहीं अमेरिकी रोग नियंत्रण केंद्र (CDC) भी इस पर नजर रखे हुए है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत करने और पूरी पारदर्शिता बरतने की आवश्यकता पर बल दिया है।
संकट गहराने पर क्या है भारत सरकार की 'निकासी और सुरक्षा रणनीति'?
भारतीय विदेश नीति के इतिहास में विदेशों में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद मजबूत और अचूक रहा है। अतीत में यूक्रेन संकट के समय चलाया गया 'ऑपरेशन गंगा', सूडान से नागरिकों को निकालने वाला 'ऑपरेशन कावेरी' या कोविड महामारी के दौरान दुनिया का सबसे बड़ा एयरलिफ्ट 'वंदे भारत मिशन' इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि भारत अपने लोगों को कभी अधर में नहीं छोड़ता। यदि रूस के किसी भी प्रांत में स्वास्थ्य संबंधी आपातकाल गंभीर रूप लेता है, तो भारत सरकार ने पहले से ही एक त्रि-स्तरीय आकस्मिक कार्ययोजना तैयार रखी है। पहले चरण के तहत प्रभावित इलाकों से भारतीय छात्रों और नागरिकों को सुरक्षित गैर-संक्रमित शहरों या सुरक्षित जोनों में शिफ्ट किया जाएगा। दूसरे चरण में चार्टर्ड कमर्शियल उड़ानों और जरूरत पड़ने पर भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों की मदद से सुरक्षित एयरलिफ्ट कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। तीसरे चरण के लिए भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर पोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (PHO) को अलर्ट पर रखा गया है, ताकि रूस से आने वाले किसी भी यात्री की थर्मल स्कैनिंग और लक्षण दिखने पर आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करने की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की जा सके।
घबराहट नहीं, सजगता ही सबसे बड़ा बचाव: स्वास्थ्य विशेषज्ञों की दो टूक राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और संक्रामक रोग वैज्ञानिकों का स्पष्ट मानना है कि 14वीं सदी की तुलना में आज की आधुनिक चिकित्सा प्रणाली बेहद उन्नत है। आज हमारे पास शक्तिशाली ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स का विशाल भंडार उपलब्ध है, जिससे प्लेग के बैक्टीरिया को शुरुआती अवस्था में ही पूरी तरह नष्ट किया जा सकता है। रूस में स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है और वहां दैनिक जीवन सामान्य रूप से चल रहा है। भारत में रह रहे परिजनों को सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट और भ्रामक खबरों से घबराने के बजाय केवल भारत सरकार के विदेश मंत्रालय, स्थानीय दूतावास और आधिकारिक स्वास्थ्य बुलेटिन पर ही भरोसा करना चाहिए। भारत सरकार अपने 70 हजार नागरिकों की हिफाजत के लिए पूरी तरह मुस्तैद, साधन-संपन्न और प्रतिबद्ध है।