Bengal Politics Live: फलता में करारी हार के बाद भड़के अभिषेक बनर्जी, इलेक्शन कमीशन को घेरा तो सीएम शुभेंदु अधिकारी बोले- 'सामने आया माफिया कंपनी का सच'

Bengal Politics Live: फलता में करारी हार के बाद भड़के अभिषेक बनर्जी, इलेक्शन कमीशन को घेरा तो सीएम शुभेंदु अधिकारी बोले- 'सामने आया माफिया कंपनी का सच'

पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एकतरफा और ऐतिहासिक जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) और बीजेपी एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। बीजेपी की इस प्रचंड जीत से तिलमिलाए टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े करते हुए पक्षपात के संगीन आरोप लगाए हैं। वहीं दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तीखा पलटवार करते हुए इसे तृणमूल कांग्रेस के कुशासन और 'डायमंड हार्बर मॉडल' के अंत की शुरुआत बताया है।

बीजेपी के देबांग्शु पांडा की बंपर जीत, चौथे नंबर पर खिसकी टीएमसी

फलता सीट के चुनावी नतीजों ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। बीजेपी के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी माकपा (CPIM) के शंभु नाथ कुर्मी को कम से कम 1,09,021 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त देकर एकतरफा जीत हासिल की है। इस त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मुल्ला महज 10 हजार वोटों के साथ तीसरे स्थान पर सिमट कर रह गए। सबसे बड़ा झटका सत्तारूढ़ दल रही टीएमसी को लगा है, जिसके उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे नंबर पर खिसक गए। इस शर्मनाक हार के तुरंत बाद डायमंड हार्बर से टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने मोर्चा खोलते हुए चुनाव आयोग से वोटों की गिनती की प्रक्रिया पर लिखित स्पष्टीकरण की मांग कर डाली है।

वोटों की गिनती की रफ्तार पर अभिषेक बनर्जी ने उठाए सवाल, लगाया बड़ा आरोप

अभिषेक बनर्जी ने मतगणना की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस चुनाव में कई तरह की बड़ी विसंगतियां साफ तौर पर देखी गई हैं। उन्होंने हैरान करने वाला आंकड़ा देते हुए कहा कि अमूमन चुनाव के बाद दोपहर तीन बजे तक केवल 2 से 4 राउंड की ही गिनती पूरी हो पाती थी, लेकिन इस बार दोपहर 3 बजे तक अचानक 21 राउंड की गिनती कैसे पूरी कर ली गई? बनर्जी ने आरोप लगाया कि फलता में टीएमसी के 1000 से ज्यादा सक्रिय कार्यकर्ताओं को डरा-धमकाकर घर से भगा दिया गया और चुनाव आयोग पूरी तरह आंखों पर पट्टी बांधकर तमाशा देखता रहा। दिन-दहाड़े पार्टी दफ्तरों पर हमले हुए, आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई गईं और बीजेपी के अलावा बाकी सभी दलों के पोलिंग एजेंटों को बूथों से बाहर खदेड़ दिया गया, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है।

ईवीएम पर इत्र छिड़कने का विवाद और 86 फीसदी रीपोलिंग का सच

आपको बता दें कि फलता सीट पर शुरुआती मतदान के दौरान व्यापक स्तर पर धांधली और अजीबोगरीब गड़बड़ियों की शिकायतें आई थीं। कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम मशीन पर इत्र जैसी कोई चीज छिड़कने, विपक्षी दलों के चुनाव चिह्न को जानबूझकर टेप से ढकने और बूथ कैप्चरिंग के गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद कड़ा संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को इस सीट के सभी 285 बूथों पर दोबारा मतदान (Repolling) करवाने का आदेश जारी किया था। रीपोलिंग के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और किसी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं आई। इस दौरान जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और शाम 5 बजे तक रिकॉर्ड 86 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था। चुनाव से ठीक पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था, हालांकि तकनीकी रूप से ईवीएम पर उनका नाम दर्ज था।

सीएम शुभेंदु अधिकारी का करारा जवाब: '15 साल बाद जनता को मिली वोट की आजादी'

अभिषेक बनर्जी के हमलावर बयानों पर पलटवार करने में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी देर नहीं की। उन्होंने फलता के नतीजों का स्वागत करते हुए कहा कि पूरे 15 साल के लंबे इंतजार के बाद बंगाल की जनता को बिना किसी डर के खुलकर वोट डालने की असली आजादी मिली है, और जब लोगों ने स्वतंत्र रूप से बटन दबाया तो सारा सच दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। सीएम शुभेंदु ने टीएमसी नेतृत्व पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस अब एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक 'माफिया कंपनी' बन चुकी थी, जिसने राज्य की पूरी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके जनता की गाढ़ी कमाई को दोनों हाथों से लूटा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस 'डायमंड हार्बर मॉडल' का ये लोग ढिंढोरा पीटते थे, वही मॉडल आज फलता में टीएमसी की सबसे शर्मनाक हार का असली कारण बन गया है।

 

Tags: