अस्पतालों की तरह 24 घंटे खुलेंगी अदालतें CJI सूर्यकांत का ऐतिहासिक बयान, देश की न्याय व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव

अस्पतालों की तरह 24 घंटे खुलेंगी अदालतें CJI सूर्यकांत का ऐतिहासिक बयान, देश की न्याय व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव

भारत की न्याय व्यवस्था (Judiciary) में लंबित मामलों के भारी बोझ और आम जनता को समय पर न्याय न मिल पाने की समस्या को लेकर देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक बेहद क्रांतिकारी और ऐतिहासिक विचार सामने रखा है। एक राष्ट्रीय कानूनी सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब न्यायपालिका को अपनी पारंपरिक कार्यप्रणाली से बाहर निकलना होगा और देश की अदालतों को अस्पतालों (Hospitals) की तरह चौबीसों घंटे (24 Hours) काम करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। मुख्य न्यायाधीश के इस बयान के बाद कानूनी गलियारों और प्रशासनिक हल्कों में एक नई बहस शुरू हो गई है।

"इलाज की तरह न्याय भी है एक आपातकालीन सेवा"

सीजेआई सूर्यकांत ने देश भर की अदालतों में लंबित पड़े करोड़ों मामलों (Case Pendency) पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "जिस तरह किसी मरीज की जान बचाने के लिए अस्पताल और डॉक्टर दिन-रात, 24 घंटे तत्पर रहते हैं, ठीक उसी तरह किसी नागरिक की स्वतंत्रता, उसके मौलिक अधिकारों की रक्षा और न्याय की आवश्यकता भी एक आपातकालीन सेवा है। न्याय पाने के लिए किसी व्यक्ति को सालों-साल अदालतों के चक्कर नहीं काटने चाहिए। हमें एक ऐसी सुदृढ़ व्यवस्था का निर्माण करना होगा जहां पीड़ित किसी भी समय अदालत का दरवाजा खटखटा सके।"

लंबित मामलों के अंबार को खत्म करने के लिए 'शिफ्ट सिस्टम' का सुझाव

मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अदालतों को 24 घंटे संचालित करने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा जजों और वकीलों को बिना थके दिन-रात काम करना होगा। इसके बजाय उन्होंने एक व्यावहारिक मॉडल का सुझाव दिया:

  • मल्टीपल शिफ्ट्स (Multiple Shifts): अदालतों को सुबह, दोपहर और रात की अलग-अलग शिफ्टों में चलाया जा सकता है।

  • नाइट कोर्ट्स (Night Courts): शाम और रात के समय विशेष 'नाइट कोर्ट्स' का संचालन किया जा सकता है, जो छोटे अपराधों, यातायात चालान, पारिवारिक विवादों और बेल (जमानत) याचिकाओं की सुनवाई कर सकें।

  • संसाधनों का अधिकतम उपयोग: इस व्यवस्था से अदालतों के मौजूदा बुनियादी ढांचे (Court Infrastructure) का शत-प्रतिशत उपयोग हो सकेगा, जो वर्तमान में शाम के बाद बंद हो जाता है।

डिजिटल और वर्चुअल अदालतों (e-Courts) से मिलेगी इस विजन को रफ्तार

सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि अदालतों को 24 घंटे चालू रखने के इस विजन को धरातल पर उतारने में तकनीक (Technology) सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ई-फाइलिंग (e-Filing) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित दस्तावेजीकरण के जरिए वर्चुअल कोर्ट्स को रात के समय भी आसानी से संचालित किया जा सकता है। इससे न तो वकीलों को देर रात अदालत परिसर में रुकना होगा और न ही वादियों को दूर-दराज के इलाकों से सफर करना पड़ेगा।

जजों की संख्या बढ़ाने और ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिया जोर

इस महा-योजना को लागू करने के रास्ते में आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इसके लिए देश में जजों की संख्या (Judge-to-Population Ratio) को बड़े पैमाने पर बढ़ाना होगा। सरकार के सहयोग से न्यायिक अधिकारियों के खाली पदों को तेजी से भरने और कोर्ट स्टाफ की नई भर्तियां करने की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि कार्यपालिका (Executive) और न्यायपालिका (Judiciary) मिलकर इस दिशा में ठोस नीति बनाएं, तो यह भारतीय न्यायिक इतिहास का सबसे बड़ा और सफल सुधारात्मक कदम साबित होगा।

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