अकेले शपथ नहीं लेंगे डीके शिवकुमार, 4 डिप्टी सीएम और 10 मंत्रियों के साथ संभालेंगे सत्ता की बागडोर
कर्नाटक की राजनीति में इस वक्त का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आ रहा है। कांग्रेस आलाकमान ने राज्य की सत्ता और संगठन को पूरी तरह रीसेट करने का मन बना लिया है। निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि उपमुख्यमंत्री और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार सूबे के अगले कप्तान होंगे। लेकिन इस बार कहानी सिर्फ मुख्यमंत्री बदलने तक सीमित नहीं है; बल्कि कांग्रेस एक बेहद चौंकाने वाले फॉर्मूले पर काम कर रही है जिसके तहत डीके शिवकुमार के साथ एक पूरी नई फौज मैदान में उतारी जा रही है।
राजनीतिक सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, डीके शिवकुमार आगामी 3 जून 2026 को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ले सकते हैं। खास बात यह है कि वह अकेले राजभवन की सीढ़ियां नहीं चढ़ेंगे। उनके साथ शुरुआती दौर में 8 से 10 नए मंत्रियों को भी शपथ दिलाई जाएगी, जबकि पूरे मंत्रिमंडल का पूर्ण विस्तार 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के संपन्न होने के बाद किया जाएगा।
बेंगलुरु में आज शाम 4 बजे कांग्रेस विधायक दल की महाबैठक, पर्यवेक्षक पहुंचे
इस बड़े तख्तापलट और ऐतिहासिक बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए बेंगलुरु में आज यानी शनिवार शाम 4 बजे कांग्रेस विधायक दल (CLP) की एक बेहद औपचारिक और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। कांग्रेस विधायक दल के सचिव ए. पाटिल द्वारा सभी विधायकों को भेजे गए पत्र के मुताबिक, यह हाई-प्रोफाइल बैठक विधान सौध के सम्मेलन कक्ष में आयोजित होगी। यह पूरा सियासी घटनाक्रम राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा शुक्रवार को सिद्धरमैया का इस्तीफा स्वीकार करने और उनके नेतृत्व वाले पुराने मंत्रिमंडल को भंग करने के बाद तेजी से बदला है।
पार्टी आलाकमान ने इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के वरिष्ठ पर्यवेक्षक केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला को बेंगलुरु भेजा है, जो इस बैठक की सीधी निगरानी करेंगे। बैठक के दौरान सभी विधायकों की सहमति से नए विधायक दल के नेता का चुनाव किया जाएगा, जिसके तुरंत बाद डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री पद के लिए राजभवन जाकर अपना दावा पेश करेंगे।
4 डिप्टी सीएम और 50 फीसदी नए चेहरे: क्या है कांग्रेस का नया 'कामराज प्लान'?
कर्नाटक की सत्ता को लेकर जो नया खाका तैयार किया गया है, वह बेहद हैरान करने वाला है। पार्टी के रणनीतिकार क्षेत्रीय, सामाजिक और जातीय समीकरणों को पूरी तरह साधने के लिए राज्य में 4 उपमुख्यमंत्री (Deputy CMs) बनाने की बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं। इस कदम का मकसद सिद्दारमैया के हटने के बाद किसी भी वर्ग में असंतोष को पनपने से रोकना है।
इसके अलावा, नए मंत्रिमंडल के स्वरूप को लेकर भी 'कामराज प्लान' का एक संशोधित रूप देखने को मिल सकता है। पार्टी लगभग 50 फीसदी पुराने मंत्रियों की छुट्टी करके उनकी जगह बिल्कुल नए और ऊर्जावान चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने जा रही है, ताकि साल 2028 में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव के लिए एक नई और मजबूत लीडरशिप तैयार की जा सके। जिन मंत्रियों को तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है, उन्हें कैबिनेट से हटाकर संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
वाईएस शर्मिला को राज्यसभा भेजने की तैयारी, आंध्र से कर्नाटक तक सियासी हलचल
कर्नाटक में चल रहे इस सबसे बड़े पावर ट्रांजेक्शन के बीच एक और नाम ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की बेहद तेज चर्चा है कि आंध्र प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष वाईएस शर्मिला को पार्टी इस बार राज्यसभा भेजने की तैयारी में है।
शर्मिला का नाम राज्यसभा चुनाव की रेस में सबसे आगे चल रहा है और पार्टी उन्हें उच्च सदन में भेजकर दक्षिण भारत की राजनीति में एक नया और मजबूत संदेश देना चाहती है। कुल मिलाकर देखें तो कांग्रेस ने कर्नाटक में सरकार और संगठन के ढांचे को पूरी तरह बदलकर सत्ता की कमान डीके शिवकुमार के हाथों में सौंपने का एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिससे आगामी चुनावों का रास्ता साफ हो सके।