बंगाल में महा-एक्शन 2021 की चुनावी हिंसा की खुलीं फाइलें, 181 नई FIR दर्ज होने से मची खलबली
पश्चिम बंगाल में साल 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भड़की भीषण हिंसा के मामले में एक बार फिर कानून का शिकंजा बेहद कस गया है। इस मामले में एक ऐसा बड़ा और अभूतपूर्व एक्शन लिया गया है, जिसने राज्य की राजनीति से लेकर पुलिस महकमे तक में हड़कंप मचा दिया है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, 2021 की चुनावी हिंसा से जुड़ीं 59 पुरानी फाइलों को दोबारा खोल दिया गया है और इस संबंध में कुल 181 नई एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सियासी जंग चरम पर पहुंच गई है।
बंद हो चुकी फाइलों को दोबारा खोलने के पीछे क्या है वजह?
साल 2021 के चुनाव नतीजों के बाद बंगाल के अलग-अलग हिस्सों से बड़े पैमाने पर तोड़फोड़, आगजनी, हत्या और मारपीट की खबरें सामने आई थीं। उस वक्त कई मामलों को सबूतों के अभाव या अन्य तकनीकी कारणों से बंद (Closer Report) कर दिया गया था। लेकिन, पीड़ित परिवारों की लगातार अपीलों, कानूनी लड़ाई और केंद्रीय जांच एजेंसियों व अदालतों के कड़े रुख के बाद अब इन मामलों को दोबारा से एक्टिव किया गया है। इन 59 मामलों की री-ओपनिंग से साफ है कि दोषियों को बख्शने के मूड में जांच एजेंसियां नहीं हैं।
शुभेंदु अधिकारी के दबाव का दिखा असर!
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी लगातार ममता बनर्जी सरकार पर हिंसा के दोषियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में राज्यपाल से मुलाकात कर और अदालतों में याचिकाएं दायर कर मांग की थी कि पीड़ित बीजेपी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को न्याय मिलना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस ताजा और कड़े एक्शन के पीछे विपक्षी दलों का चौतरफा दबाव और कानून का बढ़ता डंडा है, जिसने ममता सरकार और बंगाल पुलिस को बैकफुट पर ला दिया है।
181 नई FIR दर्ज होने से TMC खेमे में बेचैनी
जो 181 नई एफआईआर दर्ज की गई हैं, उनमें सत्तारूढ़ दल टीएमसी के कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि इन नई प्राथमिकियों में गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं, जिनमें गवाहों को डराने, सबूत मिटाने और जानलेवा हमले करने के आरोप शामिल हैं। पुलिस अब इन मामलों में नए सिरे से गवाहों के बयान दर्ज कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में कई बड़ी गिरफ्तारियां देखने को मिल सकती हैं।
टीएमसी का आरोप: 'केंद्रीय एजेंसियों के जरिए राजनीतिक प्रतिशोध'
इस बड़ी कानूनी कार्रवाई पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से बंगाल में चुनाव नहीं जीत पा रही है, इसलिए वह केंद्रीय जांच एजेंसियों और पुराने मामलों का सहारा लेकर राज्य सरकार को परेशान करने की साजिश रच रही है। टीएमसी ने दावा किया कि 2021 की हिंसा के अधिकांश मामलों का निपटारा पहले ही हो चुका है और अब जबरन पुरानी फाइलें खोलकर केवल राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम किया जा रहा है। हालांकि, बीजेपी का साफ कहना है कि जब तक हर पीड़ित को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।