सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जजों की नियुक्ति को हरी झंडी! सीनियर एडवोकेट वी मोहना ने सीधे जज बनकर रचा इतिहास, जानें बाकी 4 नाम

सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जजों की नियुक्ति को हरी झंडी! सीनियर एडवोकेट वी मोहना ने सीधे जज बनकर रचा इतिहास, जानें बाकी 4 नाम

देश की शीर्ष अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट की ताकत में एक बड़ा इजाफा हुआ है। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जजों की नियुक्ति को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी खुद केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने साझा की। हाल ही में एक अध्यादेश के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 किया गया था। इस नए विस्तार और 5 जजों की नियुक्ति के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत जजों की मौजूदा संख्या 37 हो गई है, जो शीर्ष अदालत में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने के लिहाज से एक बड़ा कदम है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इन नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी। इस लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा सीनियर एडवोकेट वी मोहना की हो रही है, जिन्होंने शीर्ष अदालत में जज के रूप में नियुक्त होकर एक नया इतिहास रच दिया है।

वी. मोहना का ऐतिहासिक सफर: बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली दूसरी महिला

सीनियर एडवोकेट वी मोहना ने देश की न्यायिक प्रणाली में कई बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं। जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बाद वे भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में केवल दूसरी ऐसी महिला वकील बनी हैं, जिन्हें सीधे बार (वकील) से पदोन्नत कर सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही, वे सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की महज 12वीं महिला जज होंगी। वर्तमान में वे जस्टिस बी.वी. नागरत्ना के साथ देश की शीर्ष अदालत में दूसरी मौजूदा महिला जज के रूप में अपनी सेवाएं देंगी। सीधे बार से नियुक्त होने के कारण उन्हें 5 साल का एक लंबा कार्यकाल मिला है और वे जून 2031 में सेवानिवृत्त होंगी।

तमिलनाडु के कोयंबटूर में 27 जून 1966 को जन्मीं वी मोहना ने 1988 में कोयंबटूर लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की थी। देश के दिग्गज वकील सी एस वैद्यनाथन के मार्गदर्शन में वकालत की बारीकियां सीखने के बाद वह 1996 में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बनीं और 2015 में उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज के वी विश्वनाथन के साथ पूर्व अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल के दफ्तर में भी काम किया है। वी मोहना ने सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिलाने, वरिष्ठ नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की रक्षा और चर्चित कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध जैसे कई बेहद संवेदनशील व बड़े मामलों में अदालत के सामने दमदार पैरवी की है।

इन 4 राज्यों के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को भी मिली पदोन्नति

सीनियर एडवोकेट वी मोहना के अलावा जिन 4 अन्य अनुभवी जजों को सुप्रीम कोर्ट भेजा गया है, वे सभी अपने-अपने राज्यों के उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे:

1. जस्टिस शील नागू (पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट): पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस शील नागू अपने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े ऐतिहासिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। इसके साथ ही वे चर्चित जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड की जांच करने वाली इन-हाउस कमेटी के बेहद महत्वपूर्ण सदस्य भी रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल दिसंबर 2029 तक रहेगा।

2. जस्टिस श्री चंद्रशेखर (बॉम्बे हाईकोर्ट): झारखंड की राजधानी रांची में जन्मे और वर्तमान में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत जस्टिस श्री चंद्रशेखर की नियुक्ति देश की शीर्ष अदालत के लिए बेहद खास है, क्योंकि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में झारखंड राज्य का कोई प्रतिनिधित्व नहीं था। उन्होंने अपने करियर में सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर, मालेगांव ब्लास्ट और वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड प्रोजेक्ट जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों की लंबी सुनवाई की है।

3. जस्टिस संजीव सचदेवा (मध्य प्रदेश हाईकोर्ट): दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी करने वाले जस्टिस संजीव सचदेवा दो दशकों से भी अधिक समय तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के स्थायी वकील रहे हैं। वे 1995 में सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बने और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी सेवाएं दीं। जुलाई 2025 में उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। सुप्रीम कोर्ट में इनका कार्यकाल करीब साढ़े तीन साल का होने वाला है।

4. जस्टिस अरुण पल्ली (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट): जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस अरुण पल्ली पूर्व में पंजाब के एडिशनल एडवोकेट जनरल भी रह चुके हैं। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के चीफ जस्टिस बनने वाले जस्टिस पल्ली को मध्यस्थता (Mediation) और लोक अदालतों के माध्यम से सालों से पेंडिंग पड़े मुकदमों को रिकॉर्ड समय में निपटाने के लिए जाना जाता है।

 

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