क्या बदल गई तमिलनाडु की सियासी हवा, सीएम विजय के बदले सुर, एक महीने में दूसरी बार पीएम मोदी से मुलाकात...
तमिलनाडु की सियासत और केंद्र-राज्य संबंधों के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य की कमान संभालने के बाद नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के राजनीतिक तेवरों में एक अभूतपूर्व और बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चुनावी मैदान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अपनी पार्टी का धुर 'वैचारिक दुश्मन' घोषित करने वाले थलपति विजय अब सत्ता के शीर्ष पर बैठते ही केंद्र सरकार के प्रति बेहद व्यावहारिक, परिपक्व और सकारात्मक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की हाई-प्रोफाइल बैठक में मुख्यमंत्री विजय न केवल शामिल हुए, बल्कि उन्होंने पूर्ववर्ती द्रमुक (DMK) सरकार की टकराव वाली पुरानी नीति को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया।
एक महीने के भीतर प्रधानमंत्री से दूसरी बार मिले सीएम विजय, तमिलनाडु के विकास के लिए मांगा सहयोग
नीति आयोग की इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक के खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अकेले में विशेष मुलाकात की। राजनीति के जानकारों के लिए यह खबर इसलिए बड़ी है क्योंकि पिछले एक महीने से भी कम समय के भीतर प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री विजय की यह दूसरी आधिकारिक मुलाकात है। इससे पहले पिछले महीने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद विजय ने 27 मई को दिल्ली का दौरा कर पीएम मोदी से भेंट की थी। उस दौरान उन्होंने तमिलनाडु की महत्वाकांक्षी जनकल्याणकारी और बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) परियोजनाओं के लिए भारी वित्तीय सहायता, प्रमुख विकास कार्यों को त्वरित मंजूरी और बेहद संवेदनशील मेकेदातू जल विवाद (Mekedatu Water Dispute) में केंद्र सरकार के सीधे हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात कर राज्य के लिए अतिरिक्त बजटीय आवंटन का अनुरोध किया था।
नीति आयोग की बैठक में मजबूती से गूंजा NEET का मुद्दा, 12वीं के अंकों के आधार पर दाखिले की वकालत
नीति आयोग के मंच पर दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के हक और तमिल जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर अपनी बात पूरी मजबूती और तर्कों के साथ रखी। उन्होंने मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) का तमिलनाडु की तरफ से पुराना विरोध एक बार फिर दोहराया। सीएम विजय ने नीति आयोग के सामने पुरजोर तर्क दिया कि इस राष्ट्रीय परीक्षा ने ग्रामीण पृष्ठभूमि और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के होनहार छात्रों के डॉक्टर बनने के सपनों और उनके भविष्य पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डाला है। उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष आग्रह किया कि तमिलनाडु को एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS) और आयुष (AYUSH) पाठ्यक्रमों के तहत राज्य कोटे की सभी सीटों को केवल कक्षा 12वीं के बोर्ड अंकों के आधार पर ही भरने की विशेष संवैधानिक अनुमति दी जाए।
केंद्र और बीजेपी पर सीधे तीखे हमलों से किया साफ परहेज, विजय की मैच्योर पॉलिटिक्स से विपक्ष हैरान
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात मुख्यमंत्री विजय की बदली हुई राजनीतिक शैली रही। जहां देश भर के कई विपक्षी सूरमाओं और मुख्यमंत्रियों ने नीट-यूजी परीक्षा विवाद को लेकर सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार की घेराबंदी की, वहीं विजय ने केंद्र पर कोई भी व्यक्तिगत या राजनीतिक कीचड़ उछालने के बजाय खुद को पूरी तरह से परीक्षा प्रणाली की तकनीकी कमियों तक ही सीमित रखा। उन्होंने इसे किसी पार्टी की गलती बताने के बजाय राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रणाली में मौजूद संरचनात्मक खामियों का एक पुख्ता सबूत बताया। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के रूप में तमिलनाडु विधानसभा में दिए गए अपने पहले ऐतिहासिक भाषण में भी विजय ने बीजेपी या केंद्र की मोदी सरकार की प्रत्यक्ष आलोचना करने से पूरी तरह परहेज किया था, जिसे उनकी 'मैच्योर पॉलिटिक्स' का हिस्सा माना जा रहा है।
पूर्व सीएम एमके स्टालिन के टकराव वाले रुख से बिल्कुल जुदा है थलपति विजय का यह नया अंदाज
मुख्यमंत्री विजय का यह नया और लचीला रुख उनके पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के पुराने रवैये से बिल्कुल उलट और जुदा है। स्टालिन ने केंद्र सरकार पर तमिलनाडु के साथ लगातार सौतेला व्यवहार और बजटीय भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगाते हुए लगातार तीन बार नीति आयोग की महत्वपूर्ण बैठकों का पूर्ण बहिष्कार किया था। स्टालिन के कार्यकाल में चेन्नई से लेकर दिल्ली तक केंद्र और राज्य के बीच हमेशा तलवारें खिंची रहती थीं। लेकिन नए सीएम विजय ने टकराव का रास्ता छोड़ संवाद का रास्ता चुना है, जो यह साफ संकेत देता है कि वे राज्य के विकास की खातिर केंद्र के साथ मिलकर चलने की एक नई और व्यावहारिक राजनीति की शुरुआत कर चुके हैं।