BRICS के समापन सत्र में PM मोदी ने जताई वैश्विक संघर्षों पर गहरी चिंता: होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और सीफेयरर्स की सुरक्षा पर दिया कड़ा संदेश
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर में बढ़ते युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और उनसे आम जनजीवन पर पड़ रहे गंभीर प्रभावों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन सहित प्रमुख वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में पीएम मोदी ने दो टूक शब्दों में कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट केवल एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।
सत्र के दौरान प्रधानमंत्री ने खासतौर पर पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट), लाल सागर और दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के तनाव की ओर इशारा करते हुए जहाजों और नाविकों (Seafarers) की सुरक्षा पर अभूतपूर्व प्रस्ताव रखा।
होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री नाविकों की सुरक्षा पर बड़ा संदेश
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने पर व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भारत पर पड़ा है। इसी संदर्भ में पीएम मोदी ने मंच से मजबूत आवाज उठाई:
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सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क का प्रस्ताव: पीएम मोदी ने ब्रिक्स देशों के बीच एक साझा 'ब्रिक्स सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क' (Seafarers Emergency Support Network) बनाने की पेशकश की। इसके तहत संकट में फंसे जहाजों, नाविकों को मेडिकल सहायता, संकट अलर्ट और तत्काल सुरक्षित निकासी (Evacuation) की व्यवस्था की जाएगी।
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व्यापारिक जहाजों पर हमले अस्वीकार्य: प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि वैश्विक व्यापार तभी सुरक्षित रह सकता है जब समुद्री रास्ते (Sea Lanes) खुले रहें और नाविक सुरक्षित हों। हाल के महीनों में होर्मुज और ओमान तट के निकट भारतीय मर्चेंट नेवी के नाविकों की मौतों और जहाजों पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए भारत ने ईरानी नेतृत्व की मौजूदगी में स्पष्ट किया कि नागरिक नाविकों को युद्ध का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए।
सप्लाई चेन और आम नागरिकों पर युद्ध का असर
समापन भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संघर्षों के आर्थिक नतीजों पर जोर दिया:
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उन्होंने कहा कि दुनिया भर में संघर्षों और तनाव की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसका सबसे नकारात्मक और दूरगामी प्रभाव आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।
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महामारी, जलवायु आपदाओं और युद्धों ने लॉजिस्टिक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बुरी तरह तोड़ा है, जिससे ईंधन, उर्वरक और खाद्यान्न की कीमतें आसमान छू रही हैं।
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इसके समाधान के लिए भारत की अध्यक्षता में 'ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स आपूर्ति शृंखला सहयोग ढांचा' तैयार करने पर जोर दिया गया, ताकि सदस्य देश बाहरी झटकों से सुरक्षित रह सकें।
तकनीक और दुर्लभ खनिजों (Rare Minerals) के 'हथियारीकरण' पर चेतावनी
सत्र के दौरान पीएम मोदी ने एक और गंभीर मुद्दे पर सभी महाशक्तियों का ध्यान खींचा:
"प्रौद्योगिकी (Technology) और क्रिटिकल/दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) को रणनीतिक दबाव या प्रतिबंधों के हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करने से मानवता की साझा प्रगति और समृद्धि की राह में गंभीर बाधाएं खड़ी हो सकती हैं। इसीलिए भारत तकनीक को समावेशी और जन-सुलभ बनाने की वकालत करता है।"
विश्लेषकों के अनुसार, पीएम मोदी का यह बयान चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर पाबंदियों और पश्चिमी देशों द्वारा चिप व तकनीकी प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाने की प्रवृत्ति दोनों पर एक संतुलित और कड़ा कूटनीतिक संदेश था।
भारतीय अध्यक्षता के 'चार स्तंभ' और ठोस कार्ययोजना
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स सम्मेलन ने अपने प्रयासों को चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित रखा है: लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और वहनीयता (Sustainability)।
सत्र के अंत में उन्होंने अपील की कि ब्रिक्स देशों के बीच बनी आम सहमति केवल कागजों या फाइलों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारा जाए ताकि दुनिया को संकटों से निपटने का ठोस और स्थायी समाधान मिल सके।