भारत-UK ट्रेड डील: 15 जुलाई से बदलेगा व्यापार का भूगोल; पीयूष गोयल का बड़ा दावा- 99% टैरिफ खत्म, ब्रिटेन में भारतीय प्रॉडक्ट्स की मचेगी धूम

भारत-UK ट्रेड डील: 15 जुलाई से बदलेगा व्यापार का भूगोल; पीयूष गोयल का बड़ा दावा- 99% टैरिफ खत्म, ब्रिटेन में भारतीय प्रॉडक्ट्स की मचेगी धूम

भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाले ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा ऐलान किया है। पीयूष गोयल ने साफ किया कि आगामी 15 जुलाई से लागू होने वाली यह महा-डील पूरी तरह से आम नागरिकों, किसानों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के हितों को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। इस समझौते के लागू होते ही ब्रिटेन का प्रीमियम और हाई-वैल्यू बाजार भारतीय निर्यातकों, महिला उद्यमियों, युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए पूरी तरह खुल जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की व्यापारिक धाक कई गुना मजबूत होने जा रही है।

99% टैरिफ लाइनें होंगी तत्काल जीरो, 100% व्यापार मूल्य को कवर करेगी यह ऐतिहासिक डील

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, 15 जुलाई का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक नया सवेरा लेकर आएगा। इस समझौते के तहत ब्रिटेन के बाजार में प्रवेश करने वाले लगभग 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों (टैरिफ लाइनों) पर लगने वाला सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) तत्काल प्रभाव से पूरी तरह समाप्त (शून्य) कर दिया जाएगा। यह छूट लगभग 100 प्रतिशत द्विपक्षीय व्यापार मूल्य को कवर करती है। इस बड़े कदम से भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labor-Intensive Sectors) जैसे कपड़ा, चमड़ा और रत्न-आभूषण उद्योगों को सबसे बड़ा बूस्टर डोज मिलेगा। आपको बता दें कि पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ऐतिहासिक मुलाकात के दौरान इस मेगा डील पर अंतिम मुहर लगाई गई थी।

प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों को ब्रिटेन में ड्यूटी-फ्री एंट्री, किसानों और मछुआरों की चमकेगी किस्मत

इस व्यापार समझौते से भारत के कृषि और डेयरी सेक्टर को मिलने वाले फायदों का ब्योरा देते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि हमारे किसानों को बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के ब्रिटेन के सबसे महंगे बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी। भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादित होने वाली हल्दी, काली मिर्च, इलायची, आम का गूदा (मैंगो पल्प), आचार और विभिन्न प्रकार की दालों जैसे प्रसंस्कृत (Processed) कृषि उत्पादों को ब्रिटेन में पूरी तरह से शुल्क-मुक्त प्रवेश (Duty-Free Entry) दिया जाएगा। इससे न केवल भारत का कृषि निर्यात बढ़ेगा, बल्कि पैकेजिंग और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में लाखों नए रोजगार पैदा होंगे, जिससे सीधे तौर पर किसानों की आय में भारी इजाफा होगा। इसके साथ ही भारतीय मछुआरों को समुद्री खाद्य पदार्थों (सी-फूड) के निर्यात पर भी भारी रियायतें मिलेंगी।

सुरक्षा कवच: संवेदनशील कृषि और डेयरी सेक्टर को समझौते से रखा गया बाहर

विपक्ष और किसान संगठनों की चिंताओं को दूर करते हुए वाणिज्य मंत्री ने पूरी तरह आश्वस्त किया कि भारत सरकार ने देश के मूल और संवेदनशील आर्थिक हितों से रत्ती भर भी समझौता नहीं किया है। भारतीय किसानों और घरेलू बाजार को किसी भी बाहरी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए डेयरी उत्पाद (दूध, पनीर, घी), अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), सेब, ओट्स और खाद्य तेल जैसे अति-संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को इस पूरी ट्रेड डील से सख्त तौर पर बाहर (एक्सक्लूड) रखा गया है। सरकार का यह रणनीतिक फैसला देश की खाद्य सुरक्षा, घरेलू कीमतों में स्थिरता और देश के छोटे व सीमांत किसान समुदायों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

तिरुपुर के करघों से लेकर सूरत के हीरों तक, भारतीय विनिर्माण को मिलेगी नई उड़ान

पीयूष गोयल ने इस समझौते को आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी जीत बताते हुए कहा कि शून्य-शुल्क पहुंच से भारतीय विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) की ताकत दुनिया देखेगी। खेल के सामान बनाने वाले भारतीय एमएसएमई (MSMEs) के लिए यह लॉटरी की तरह है; अब भारत में बनी फुटबॉल, क्रिकेट के उपकरण, रग्बी बॉल और स्वदेशी खिलौने ब्रिटेन के स्टोर्स में सीधे बिकेंगे। उन्होंने रेखांकित किया कि तिरुपुर के कपड़ा उद्योग से लेकर बेंगलुरु की हाई-टेक प्रयोगशालाओं, सूरत के हीरा तराशने वाले कारीगरों और हैदराबाद के विश्व प्रसिद्ध सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों तक, यह ऐतिहासिक व्यापार समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के हर छोटे-बड़े पहिये को एक नई और अभूतपूर्व रफ्तार देने का काम करेगा।