जिनपिंग की 'पावर डिप्लोमेसी': भारत को आंख दिखाने वालों की चीन में शाही खातिरदारी, पाकिस्तान से निभाई 'अटूट' दोस्ती

जिनपिंग की 'पावर डिप्लोमेसी': भारत को आंख दिखाने वालों की चीन में शाही खातिरदारी, पाकिस्तान से निभाई 'अटूट' दोस्ती

बीजिंग में इन दिनों कुछ ऐसी हलचल चल रही है जो सीधे तौर पर दक्षिण एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) को प्रभावित कर सकती है। चीन ने एक बार फिर भारत के खिलाफ लामबंद होने वाले अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए रेड कारपेट बिछा दिया है। दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस समय चीन के आधिकारिक दौरे पर हैं, जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद उनकी आवभगत में जुटे हुए हैं।

बीजिंग के ग्रेट हॉल में 'अटूट' भाईचारे का प्रदर्शन

दिखने को तो इस हाई-प्रोफाइल दौरे का मुख्य एजेंडा ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने और पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने का रास्ता खोजना बताया जा रहा है, लेकिन बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' से जो तस्वीरें और बयान सामने आ रहे हैं, वे चीन-पाक के गहरे होते गठजोड़ की गवाही दे रहे हैं। बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शहबाज शरीफ को अपना 'पुराना मित्र' संबोधित किया। जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों ने दशकों से हर मुश्किल वक्त में एक-दूसरे पर भरोसा किया है और यह दोस्ती अटूट है। इतना ही नहीं, जिनपिंग ने अमेरिका-ईरान संकट के बीच पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर द्वारा निभाई गई मध्यस्थता की भूमिका की भी खुलकर तारीफ की।

शहबाज शरीफ ने मांगी चीनी पीएम से मदद

पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने चीनी प्रधानमंत्री ली क्विंग से भी मुलाकात की है। इस बैठक में शरीफ ने पश्चिम एशिया में शांति बहाली के प्रयासों के लिए चीन की तकनीकी और कूटनीतिक मदद की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जिनपिंग द्वारा दिए गए शांति प्रस्ताव ही इस क्षेत्र को संकट से बाहर निकाल सकते हैं। पाकिस्तान की इस कूटनीति के पीछे चीन का हाथ होने से साफ है कि ड्रैगन अब मध्य-पूर्व (Middle-East) के मामलों में पाकिस्तान के जरिए अपनी वैश्विक धाक जमाना चाहता है।

CPEC के नए चरण पर मुहर और 15 बड़े समझौते

इस दौरे के दौरान भारत की चिंताओं को दरकिनार करते हुए शहबाज शरीफ ने विवादित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के अगले चरण को और अधिक गति देने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सहित 15 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। चीन इस कॉरिडोर के जरिए पूरी दुनिया में कनेक्टिविटी का नया 'बॉस' बनने की फिराक में है, जबकि भारत शुरू से ही इसका कड़ा विरोध करता रहा है क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है, जो भारत का अभिन्न अंग है।

वैश्विक तनाव के बीच भारत के लिए क्यों बढ़ी रणनीतिक चुनौती?

चीन और पाकिस्तान का यह खुला याराना नई दिल्ली के लिए सुरक्षा और रणनीतिक लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से वैश्विक संतुलन डगमगा रहा है। हाल ही में चीन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया था कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान उसने भारत के खिलाफ पाकिस्तान की खुलकर मदद की थी। ऐसे में जब चीन पाकिस्तान के सैन्य और आर्थिक तंत्र को मजबूत कर रहा है, तो भारत के लिए दोतरफा मोर्चे (Two-Front Challenge) पर अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चौकन्ना रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

Tags: