SIR प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग में बड़ा फेरबदल, CEC ज्ञानेश कुमार के 20 महीनों में बदले गए करीब 20 मुख्य निर्वाचन अधिकारी
देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के प्रशासनिक ढांचे में बड़े पैमाने पर फेरबदल की बात सामने आई है। फरवरी 2025 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) का पदभार संभालने वाले ज्ञानेश कुमार के 20 महीने के कार्यकाल के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 18 से 20 मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) का तबादला किया जा चुका है। इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में राज्य स्तर के शीर्ष निर्वाचन अधिकारियों का बदला जाना प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में गहन चर्चा और समीक्षा का विषय बन गया है।
3 साल के स्थापित मानक से पहले तबादले, 7 अफसरों का कार्यकाल 2 साल से भी कम
निर्वाचन आयोग की स्थापित परंपरा और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया में निरंतरता और समन्वय बनाए रखने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सामान्यतः कम से कम 3 साल तक पद पर बनाए रखा जाता है। हालांकि, हालिया फेरबदल के आंकड़ों से पता चलता है कि:
-
कार्यकाल की अवधि: हटाए गए या बदले गए अधिकारियों में से कम से कम 7 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों का कार्यकाल 2 साल से भी कम रहा।
-
तबादलों की गति: वर्ष 2025 में 8 से 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीईओ बदले गए, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 10 और तबादले किए जा चुके हैं।
-
पूर्व कार्यकालों से तुलना: पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के करीब 33 महीने के कार्यकाल में लगभग 23 तबादले हुए थे (जिसमें 2024 का आम चुनाव भी शामिल था), जबकि ज्ञानेश कुमार के 20 महीनों के भीतर ही 20 तबादले दर्ज किए गए हैं।
बिहार से शुरू हुआ सिलसिला, लक्षद्वीप में एक साल में तीन CEO
सीईओ स्तर पर तबादलों की यह तेज प्रक्रिया अप्रैल 2025 में बिहार से शुरू हुई थी, जहां जून 2025 में एसआईआर की शुरुआत होनी थी। वहां एच.आर. श्रीनिवास की जगह विनोद सिंह गुंजियाल को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद मई में नगालैंड और छत्तीसगढ़, जून में जम्मू-कश्मीर और हरियाणा, जुलाई में मध्य प्रदेश और कर्नाटक, तथा अगस्त में मणिपुर और लद्दाख में नए सीईओ नियुक्त किए गए।
वहीं, केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में तो प्रशासनिक स्थिरता का अभाव सबसे अधिक देखा गया:
-
2024 लोकसभा चुनाव कराने वाले गौरव सिंह राजावत को नवंबर 2025 में बदला गया।
-
इसके बाद जनवरी 2026 में अवनीश कुमार आए, जो केवल जुलाई 2026 तक ही पद पर रहे।
-
जुलाई के बाद ए.एस. शिवकुमार को नया सीईओ बनाया गया, यानी एक साल से भी कम समय में तीन अधिकारी बदल दिए गए।
दिल्ली में SIR की तैयारी के बीच हटीं CEO, बंगाल और केरल में भी बदलाव
राजधानी दिल्ली में भी यह फेरबदल खासा चर्चा में रहा। फरवरी 2026 में दिल्ली की मुख्य निर्वाचन अधिकारी आर. एलिस वाज को उस वक्त पद से हटा दिया गया, जब वे एसआईआर प्रक्रिया की व्यापक प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर चुकी थीं। दिल्ली के अलावा पंजाब, गुजरात, सिक्किम और चंडीगढ़ में भी 2026 के शुरुआती महीनों में नए अधिकारियों की तैनाती की गई।
विधानसभा चुनावों के संपन्न होने के बाद पश्चिम बंगाल और केरल में भी बड़े फेरबदल हुए:
-
पश्चिम बंगाल के सीईओ मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव बनाए जाने के बाद नीलम मणि ने कमान संभाली।
-
केरल में रथन यू. केलकर की जगह डी. साजिथ बाबू को नियुक्त किया गया, जबकि केलकर को राज्य में नई जिम्मेदारी मिलने पर भी सवाल उठे थे।
निर्वाचन सदन के शीर्ष स्तर पर भी फेरबदल, DEC अचानक मूल कैडर में वापस
यह प्रशासनिक फेरबदल केवल राज्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग के मुख्यालय 'निर्वाचन सदन' में भी उप चुनाव आयुक्त (DEC) स्तर पर कई बदलाव हुए:
-
मई 2025 में भानु प्रकाश येतुरु और सितंबर 2025 में पवन कुमार शर्मा को उप चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया।
-
अगस्त 2026 में उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार को अप्रत्याशित रूप से उनके मूल कैडर में वापस (Repatriate) भेज दिया गया, जिसके बाद अक्टूबर 2026 में प्रकाश राजपुरोहित की तैनाती की गई।
प्रशासनिक दक्षता बनाम निरंतरता: आयोग की कार्यप्रणाली पर नजर
आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ये सभी तबादले प्रशासनिक आवश्यकताओं, चुनावी दक्षता और मतदाता सूची पुनरीक्षण को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के उद्देश्य से किए गए हैं। हालांकि, विपक्षी दलों और चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि एसआईआर जैसी संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया के दौरान फील्ड के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों को बार-बार बदलने से कार्यों की निरंतरता प्रभावित हो सकती है और नए अधिकारियों को स्थानीय समीकरणों को समझने में समय लगता है।