चुनाव आयोग के एक फैसले को कांग्रेस क्यों बता रही अपनी जीत? बोली- राहुल गांधी और विपक्ष के दबाव के आगे झुका EC; 'मशीन रीडेबल' वोटर लिस्ट पर बड़ा फैसला

चुनाव आयोग के एक फैसले को कांग्रेस क्यों बता रही अपनी जीत? बोली- राहुल गांधी और विपक्ष के दबाव के आगे झुका EC; 'मशीन रीडेबल' वोटर लिस्ट पर बड़ा फैसला

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के वितरण को लेकर जारी किए गए एक नए प्रशासनिक निर्देश को कांग्रेस पार्टी अपनी बड़ी नैतिक और रणनीतिक जीत बता रही है। चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देश दिया है कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों को अब ड्राफ्ट और फाइनल वोटर लिस्ट की सॉफ्ट कॉपी "मशीन रीडेबल पीडीएफ फॉर्मेट" (Readable PDF) में बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाएगी। इस फैसले के सामने आते ही कांग्रेस ने दावा किया है कि चुनाव आयोग को आखिरकार विपक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कड़े रुख के आगे झुकना पड़ा है।

'मशीन रीडेबल' पीडीएफ क्या है और यह फैसला क्यों है इतना अहम?

अब तक चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक दलों को दी जाने वाली डिजिटल वोटर लिस्ट "इमेज पीडीएफ" (Image PDF यानी स्कैन की गई तस्वीरों) के रूप में होती थी।

तकनीकी रूप से दोनों में यह बड़ा अंतर है:

  • इमेज पीडीएफ की सीमाएं: स्कैन की गई पीडीएफ में कंप्यूटर का कोई सर्च कमांड (Ctrl+F), डेटा स्क्रैपिंग टूल या एल्गोरिद्म काम नहीं करता। यदि किसी दल को किसी विधानसभा क्षेत्र में डुप्लीकेट नाम, फर्जी पते, एक ही मकान नंबर पर दर्ज सैकड़ों मतदाता या विलोपित किए गए नामों की जांच करनी होती थी, तो कार्यकर्ताओं को लाखों पन्नों की सूची मैन्युअल (एक-एक नाम पढ़कर) जांचनी पड़ती थी।

  • रीडेबल पीडीएफ की ताकत: नए निर्देश के तहत मिलने वाली फाइल में टेक्स्ट को कॉपी, सर्च और डेटाबेस में प्रोसेस किया जा सकेगा। इससे राजनीतिक दल अपने सॉफ्टवेयर और तकनीकी टूल्स के जरिए कुछ ही मिनटों में बोगस वोटरों, डुप्लीकेट ईपीआईसी (EPIC) नंबरों और असंगत एंट्रीज को आसानी से ट्रैक कर सकेंगे।

कांग्रेस का दावा: 'राहुल गांधी की लगातार उठाई जा रही मांग रंग लाई'

कांग्रेस पार्टी के संचार विभाग और वरिष्ठ नेताओं ने इस निर्देश के जारी होने के बाद बयान जारी करते हुए कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से मतदाता सूचियों में कथित धांधली, वोट चोरी और फर्जी एंट्रीज को पकड़ने के लिए 'सर्च करने योग्य' डिजिटल डेटा की मांग कर रहे थे।

कांग्रेस ने कहा कि कर्नाटक के बैंगलोर सेंट्रल विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए पार्टी ने पहले भी बताया था कि स्कैन की गई इमेज फाइलों को मैन्युअल रूप से जांचने और उसमें से हजारों विसंगतियां निकालने में उनकी डेटा टीम को 6 महीने से ज्यादा का समय और हजारों मैन-ऑवर्स खर्च करने पड़े थे। पार्टी के अनुसार, चुनाव आयोग जो पहले इस व्यवस्था को लागू करने से हिचकिचा रहा था, उसे विपक्ष के सड़क से लेकर अदालत तक चले अभियान और जनदबाव के कारण यह सुधार लागू करने पर विवश होना पड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है मामला, 'इंडिया' गठबंधन का था कड़ा दबाव

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी निष्पक्षता को लेकर विपक्षी दलों का 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन लगातार हमलावर बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में भी मतदाता सूची को पारदर्शी और मशीन-रीडेबल फॉर्मेट में उपलब्ध कराने को लेकर याचिकाएं लंबित हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की संभावित सख्त टिप्पणियों और विपक्षी दलों द्वारा लगातार निर्वाचन सदन पर बनाए जा रहे दबाव के बीच चुनाव आयोग ने यह सुधारात्मक कदम उठाकर चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को बहाल करने की दिशा में संकेत दिया है।

चुनावी पारदर्शिता में कैसे मील का पत्थर साबित होगा यह कदम?

निर्वाचन विश्लेषकों के मुताबिक, इस फैसले से भविष्य के विधानसभा और आम चुनावों में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे:

  • फर्जी मतदान पर लगाम: बूथ स्तर पर एक ही मतदाता के कई स्थानों पर दर्ज होने की पहचान चुनाव से पहले ही हो सकेगी।

  • पारदर्शिता और जवाबदेही: बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) द्वारा ड्राफ्ट लिस्ट में किए गए बदलावों को राजनीतिक दल आसानी से क्रॉस-वेरीफाई कर सकेंगे।

  • समय की बचत: राजनीतिक दलों को आपत्तियां और दावे दर्ज कराने के लिए तय समय सीमा (Claim & Objection Period) के भीतर पुख्ता सबूत जुटाने में मदद मिलेगी।

कांग्रेस भले ही इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में प्रचारित कर रही हो, लेकिन निर्वाचन विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी सुधार भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और सभी राजनीतिक दलों के लिए चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक स्वागत योग्य निर्णय है।