'विद्वानों के भरोसे नहीं बना MP, अंडरवर्ल्ड से मिले 92% वोट': नागपुर में नितिन गडकरी का बेबाक बयान, शिक्षित वर्ग की वोटिंग सुस्ती पर कसा तंज
अपने बेबाक और स्पष्टवादी बयानों के लिए मशहूर वरिष्ठ भाजपा नेता व केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर चुनावी राजनीति और मतदाता व्यवहार पर खरी-खरी टिप्पणी की है। नागपुर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अपने राजनीतिक अनुभवों को साझा करते हुए नितिन गडकरी ने मंच पर बैठे तथाकथित बुद्धिजीवियों और संभ्रांत वर्ग पर चुटीला तंज कसा।
गडकरी ने कहा कि वे सामने बैठे विद्वानों के भरोसे सांसद नहीं बने हैं, क्योंकि चुनाव वाले दिन शिक्षित वर्ग अक्सर घरों से निकलने में ही टालमटोल करता रह जाता है। उन्होंने हैरान करने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्हें पॉश और शिक्षित इलाकों की तुलना में उन क्षेत्रों से कहीं अधिक वोट मिले, जिन्हें अंडरवर्ल्ड, आपराधिक गतिविधियों या रेड लाइट एरिया के रूप में जाना जाता है।
'5 बज जाते हैं और वोट डालने नहीं आते': प्रबुद्ध वर्ग की उदासीनता पर कसा तंज
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने मजाकिया लेकिन कड़े लहजे में कहा कि आज हमारे लोकतंत्र में बुद्धिजीवी वर्ग वोटिंग के प्रति सबसे ज्यादा लापरवाह दिखता है।
उन्होंने कहा, "यह आज भी पूरी तरह सच है कि आप जैसे जितने विद्वान लोग यहां बैठे हैं, आपके भरोसे मैं एमपी (सांसद) नहीं बना हूं। चुनाव के दिन आप लोग बोलते हैं—'मैं अभी निकलता हूं, थोड़ी देर बाद जाता हूं' और ऐसे करते-करते शाम के 5 बज जाते हैं। आप वोट डालने पोलिंग बूथ तक नहीं पहुंचते और फिर बाद में हमसे मिलकर पूछते हैं कि 'इस देश का क्या होगा?' जब आप वोट तक नहीं करते, तो फिर क्यों व्यर्थ में ज्ञान देते हैं और हमारा समय खराब करते हैं? आप किसी को भी वोट दीजिए, लेकिन कम से कम वोट तो डालिए।"
'शिक्षित इलाकों में 75% तो अंडरवर्ल्ड वाले इलाकों में मिले 92% वोट'
नितिन गडकरी ने अपनी चुनावी जीत के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके काम और जमीन से जुड़ाव ने उन्हें हर वर्ग का समर्थन दिलाया है।
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आंकड़ों का अंतर: गडकरी ने बताया कि नागपुर के बड़े-बड़े पढ़े-लिखे और पॉश इलाकों में उन्हें कुल मतदान का अधिकतम 70 से 75 प्रतिशत वोट मिला।
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अंडरवर्ल्ड और उपेक्षित इलाकों का रुख: वहीं दूसरी तरफ जिन इलाकों को क्रिमिनल, अंडरवर्ल्ड या रेड लाइट एरिया माना जाता है, वहां के बूथों पर उन्हें 92 प्रतिशत तक एकतरफा वोट हासिल हुए।
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क्रिमिनल्स का समर्थन नहीं, विकास की जीत: उन्होंने तुरंत स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, "इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि मेरा उनसे कोई अवैध संबंध है या मैं उनके आपराधिक कृत्यों का समर्थन करता हूं। वहां मैंने सड़कें बनवाई हैं, सीवर और पानी की व्यवस्था की है और समाज कल्याण के बुनियादी काम किए हैं। जनता ने मेरे द्वारा किए गए विकास और सामाजिक कार्यों के बदले में मुझे वोट दिया है। नागपुर के अंडरवर्ल्ड से जुड़े 99 फीसदी लोग मेरे सोशल वर्क के प्रशंसक हैं।"
अटल बिहारी वाजपेयी और जॉर्ज फर्नांडिस के साथ के संस्मरण किए साझा
अपने संबोधन के दौरान नितिन गडकरी ने भारतीय राजनीति के दो दिग्गज नेताओं—पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को याद करते हुए उन्हें अपना आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि दोनों ही नेताओं का उन्हें भरपूर स्नेह और सानिध्य मिला।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहने के दिनों का एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए गडकरी ने बताया, "जॉर्ज फर्नांडिस साहब जब मुंबई में मलबार हिल पर मेरे सरकारी आवास पर आते थे, तो एक बार मैंने उनसे पूछा था कि 'जॉर्ज साहब, आपकी पार्टी में सभी इतने बड़े और दिग्गज नेता हैं, लेकिन किसी की किसी से पटरी क्यों नहीं बैठती?' इस पर जॉर्ज साहब ने मुस्कुराते हुए कहा था—'यही तो लोकतंत्र है'। तब मुझे समझ आया कि राजनीति दरअसल अंतर्विरोधों, बाध्यताओं और सीमाओं का खेल है (Politics is a game of contradictions, compulsions, and limitations)।"
'नेता नहीं, जाति-धर्म में बंटी जनता लोकतंत्र की सबसे बड़ी समस्या'
गडकरी ने चुनावी सुधार और मतदाता जागरूकता पर बल देते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी खराबी कोई राजनीतिक दल या नेता नहीं है, बल्कि जनता का खुद सही मुद्दों पर जागरूक न होना है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक आम नागरिक जात-पात, पंथ, धर्म और भाषा के संकीर्ण दायरों से ऊपर उठकर शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और आर्थिक मुद्दों के आधार पर सही उम्मीदवार का चुनाव नहीं करेंगे, तब तक लोकतंत्र में वास्तविक बदलाव आना संभव नहीं है। गडकरी का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और चुनावी राजनीति में पढ़े-लिखे तबके की उदासीनता पर नई बहस छेड़ रहा है।