दलीप ट्रॉफी फाइनल से पत्ता कटने पर गरमाई बहस: करुण नायर ने ठोका शानदार शतक, क्या अनुभवी दिग्गज को बाहर बैठाकर पछताएगी तिलक ब्रिगेड?

दलीप ट्रॉफी फाइनल से पत्ता कटने पर गरमाई बहस: करुण नायर ने ठोका शानदार शतक, क्या अनुभवी दिग्गज को बाहर बैठाकर पछताएगी तिलक ब्रिगेड?

घरेलू क्रिकेट के दिग्गज और टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक जड़ने का कारनामा कर चुके अनुभवी बल्लेबाज करुण नायर ने एक बार फिर अपने बल्ले से चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन को कड़ा संदेश दिया है। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में ईस्ट जोन के खिलाफ जारी दलीप ट्रॉफी फाइनल मुकाबले में साउथ जोन की प्लेइंग इलेवन से लगातार दूसरे मैच में बाहर रखे जाने के बाद नायर ने निराश होकर बैठने के बजाय मैदान पर रन बनाकर जवाब देना बेहतर समझा।

साउथ जोन का कैंप छोड़कर बेंगलुरु पहुंचे करुण नायर ने डॉ. (कैप्टन) के. थिम्माप्पैया मेमोरियल टूर्नामेंट में केएससीए सेक्रेटरी इलेवन (KSCA Secretary's XI) की ओर से खेलते हुए छत्तीसगढ़ के खिलाफ 183 गेंदों पर 104 रनों की शानदार शतकीय पारी खेल डाली। उनकी इस पारी में 12 चौके और एक छक्का शामिल रहा।

फाइनल में ईस्ट जोन का पहाड़ जैसा स्कोर, क्या खलेगी करुण नायर की कमी?

चेन्नई में खेले जा रहे खिताबी मुकाबले की परिस्थितियां अब कप्तान तिलक वर्मा और साउथ जोन प्रबंधन के फैसले पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

  • ईशान किशन का दोहरा शतक: ईस्ट जोन ने विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन के 270 रनों के विशाल दोहरे शतक के दम पर पहली पारी में 700 से अधिक रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया है।

  • दबाव में साउथ जोन: इतने बड़े स्कोर का पीछा करने या मैच बचाने के लिए साउथ जोन के मध्यक्रम को लंबी और धैर्यवान पारियों की सख्त दरकार होगी।

  • प्रथम श्रेणी में 9,000+ रन: करुण नायर के पास 9,300 से ज्यादा प्रथम श्रेणी रन और 26 शतकों का लंबा अनुभव है। उन्होंने पिछले रणजी सत्र में भी 58.25 की औसत से 699 रन बनाए थे। ऐसे में जब टीम को सबसे ज्यादा क्रीज पर टिकने वाले बल्लेबाज की जरूरत है, तब नायर का टीम में न होना तिलक ब्रिगेड के लिए भारी पड़ सकता है।

कप्तान तिलक वर्मा और कोच का तर्क: 'रणनीतिक मजबूरी'

करुण नायर जैसे इन-फॉर्म और अनुभवी बल्लेबाज को सेमीफाइनल और फाइनल दोनों से बाहर रखने के पीछे साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा और कोच विक्रम वर्मा ने तकनीकी संयोजन (Team Combination) का हवाला दिया था:

  • बाएं हाथ के बल्लेबाज को तरजीह: कप्तान तिलक वर्मा के अनुसार, विपक्षी टीम में गुणवत्ता वाले बाएं हाथ के स्पिनर्स मौजूद थे। मिडिल ऑर्डर में लेफ्ट-हैंडर विकल्प रखने के लिए उन्होंने युवा बल्लेबाज कोडिमाला हिमातेजा को तरजीह दी। हालांकि, हिमातेजा सेमीफाइनल में बिना खाता खोले शून्य पर आउट हो गए थे।

  • देवदत्त पडिक्कल की वापसी: फाइनल के लिए देवदत्त पडिक्कल की टीम में वापसी के चलते भी प्लेइंग इलेवन में जगह कम पड़ गई थी।

  • निजी कारणों का हवाला: टीम प्रबंधन ने कहा कि नायर ने पारिवारिक कारणों से अनुमति लेकर कैंप छोड़ा था, लेकिन बेंगलुरु पहुंचते ही उनका मैच खेलना यह साफ दिखाता है कि वे लगातार ड्रॉप किए जाने से आहत थे।

'समझ से परे कहना भी कम होगा': सोशल मीडिया पर तंज

मैदान के बाहर भी इस विवाद ने तूल पकड़ लिया है। खेल पत्रकारों ने जब सोशल मीडिया पर करुण नायर को लगातार दो नॉकआउट मैचों से बाहर रखने के फैसले को 'समझ से परे' (Inexplicable) बताया, तो करुण नायर ने खुद उस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा—"Inexplicable would be an understatement" (इसे सिर्फ समझ से परे कहना भी कम होगा)।

नायर का यह व्यंग्यात्मक जवाब सीधे तौर पर साउथ जोन के नेतृत्व और चयन प्रक्रिया पर तीखा कटाक्ष माना जा रहा है। यदि फाइनल की दूसरी पारी में साउथ जोन की बल्लेबाजी लड़खड़ाती है, तो तिलक वर्मा के इस रणनीतिक प्रयोग और अनुभवी करुण नायर को बेंच पर बैठाने के फैसले पर क्रिकेट जगत में उठ रहे सवाल और ज्यादा तीखे हो जाएंगे।

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