NDA का बड़ा आरोप- 'घर-घर नहीं, मस्जिदों और कम्युनिटी हॉल में बैठकर भरे जा रहे फॉर्म'

NDA का बड़ा आरोप- 'घर-घर नहीं, मस्जिदों और कम्युनिटी हॉल में बैठकर भरे जा रहे फॉर्म'

कर्नाटक में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने एक बड़े सियासी विवाद का रूप ले लिया है। बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने राज्य सरकार और चुनाव प्रक्रिया में लगे अधिकारियों पर भारी धांधली का सनसनीखेज आरोप लगाया है। एनडीए नेताओं का दावा है कि नियमों को ताक पर रखकर घर-घर जाने की बजाय मस्जिदों और कम्युनिटी हॉल में मास-एनरोलमेंट कैंप लगाए जा रहे हैं। इसे लेकर एनडीए के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी. अंबुकुमार से मिलकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और मामले की तत्काल जांच की मांग की है।

चुनाव आयोग पहुंचा NDA का दिग्गज प्रतिनिधिमंडल

मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिलने पहुंचे एनडीए के इस प्रतिनिधिमंडल में कई कद्दावर नेता शामिल थे। इनमें केंद्रीय मंत्री और जेडीएस (JD-S) नेता एच.डी. कुमारस्वामी, बीजेपी कोटे से केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी व शोभा करंदलाजे, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक और विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष छलावदी नारायणस्वामी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए मस्जिदों में बुलाने का दावा

एनडीए नेताओं ने अपने शिकायती पत्र में दावा किया है कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक घर-घर जाकर फॉर्म भरने और हर सदस्य की व्यक्तिगत पहचान सुनिश्चित करनी होती है, लेकिन ग्राउंड जीरो पर इसकी खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि बीएलओ घर-घर जाने के बजाय कम्युनिटी हॉल, मस्जिदों और अपने निजी घरों पर बैठकर वोटर फॉर्म भर रहे हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि लोगों को कम्युनिटी हॉल और मस्जिदों में इकट्ठा करने के लिए बकायदा व्हाट्सऐप (WhatsApp) ग्रुप बनाए गए हैं। एनडीए का कहना है कि सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया में इन अनियमितताओं के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। नेताओं ने चेतावनी दी कि यह प्रक्रिया चुनाव के धर्मनिरपेक्ष चरित्र और तटस्थता पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है और इससे तैयार होने वाली वोटर लिस्ट पूरी तरह 'अविश्वसनीय' हो जाएगी।

कांग्रेस सरकार पर 'अवैध प्रवासियों' को शामिल कराने का आरोप

पिछले कुछ समय से बीजेपी और जेडीएस लगातार सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली राज्य की कांग्रेस सरकार पर हमलावर हैं। विपक्ष का सीधा आरोप है कि कांग्रेस सरकार अपने राजनीतिक फायदे के लिए अधिकारियों का 'दुरुपयोग' कर रही है और मास-एनरोलमेंट कैंप लगाकर 'अवैध प्रवासियों' का नाम गुपचुप तरीके से वोटर लिस्ट में जुड़वा रही है।

NDA की मुख्य मांगें:

  • अब तक भरे गए सभी फॉर्म्स की अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर दोबारा जांच (री-वेरिफिकेशन) की जाए।

  • इस पूरी धांधली की तत्काल प्रभाव से गहन जांच के आदेश दिए जाएं।

  • नियमों को तोड़ने वाले अधिकारियों और इसमें शामिल राजनीतिक पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

चुनाव आयोग का सख्त निर्देश

विपक्ष के इन गंभीर आरोपों और लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अंबुकुमार ने शुक्रवार को ही कड़े निर्देश जारी किए थे। उन्होंने सभी अधिकारियों और बीएलओ को स्पष्ट किया था कि भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए और फॉर्म बांटने व सत्यापन के लिए घर-घर जाना ही सुनिश्चित किया जाए।

आपको बता दें कि कर्नाटक में वोटर लिस्ट संशोधन के लिए घर-घर जाकर सत्यापन का यह अहम चरण 30 जून से शुरू हुआ था, जो 29 जुलाई तक चलेगा। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग एनडीए की इस शिकायत पर आगे क्या ठोस एक्शन लेता है।