राम रहीम फिर जेल से बाहर... 30 दिन की मिली पैरोल, 20 साल की सजा के बीच 16वीं बार हो चुकी है 'अस्थायी रिहाई'

राम रहीम फिर जेल से बाहर... 30 दिन की मिली पैरोल, 20 साल की सजा के बीच 16वीं बार हो चुकी है 'अस्थायी रिहाई'

सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को लेकर एक बार फिर बड़ी खबर सामने आ रही है। दो साध्वियों से रेप के मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में बंद राम रहीम को सोमवार को एक बार फिर 30 दिन की पैरोल दे दी गई है। साल 2020 के बाद से यह 16वां मौका है जब डेरा प्रमुख को पैरोल या फरलो के जरिए अस्थायी रूप से जेल की सलाखों से बाहर आने की इजाजत मिली है। जेल रिकॉर्ड में कैदी नंबर 8647/C के तौर पर दर्ज राम रहीम को वर्ष 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने 20 साल की सजा सुनाई थी।

सजा के 406 दिन जेल से बाहर ही गुजारे

गुरमीत राम रहीम को मिली सजा और बार-बार मिलने वाली राहत को लेकर हमेशा चर्चा और विवादों का बाजार गर्म रहता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो डेरा प्रमुख ने अब तक अपनी सजा के कुल 3193 दिन (लगभग 8 साल और 8 महीने) पूरे कर लिए हैं। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन 3193 दिनों में से राम रहीम ने पूरे 406 दिन सुनारिया जेल से बाहर आजाद हवा में गुजारे हैं। हर बार उसकी रिहाई पर नियम और कानूनों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

इस साल का पैरोल कोटा खत्म, लेकिन अभी भी बाकी है एक रास्ता

हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (अस्थायी रिहाई) एक्ट, 2022 के नियमों के मुताबिक, किसी भी कैदी को एक कैलेंडर वर्ष (जनवरी से दिसंबर) में अधिकतम 10 हफ्ते की पैरोल मिल सकती है, जिसे वह दो अलग-अलग हिस्सों में ले सकता है। इस साल की शुरुआत में जनवरी महीने में राम रहीम को 40 दिन की पैरोल मिली थी। अब ताजा आदेश में 30 दिन की पैरोल और मिलने के साथ ही साल 2026 के लिए उसका 10 हफ्ते का पैरोल कोटा पूरी तरह से खत्म हो चुका है।

हालांकि, पैरोल का कोटा खत्म होने के बाद भी राम रहीम के पास इस साल जेल से बाहर आने का एक रास्ता अभी भी खुला हुआ है। वह इस साल तीन हफ्ते की 'फरलो' के लिए आवेदन कर सकता है। नियमों के अनुसार फरलो को टुकड़ों में नहीं दिया जा सकता, इसे एक बार में ही काटना होता है।

समझिए क्या है पैरोल और फरलो के नियमों में बड़ा अंतर

कानूनी नजरिए से पैरोल और फरलो में एक बड़ा तकनीकी अंतर होता है। जब कोई कैदी पैरोल पर जेल से बाहर जाता है, तो उस अवधि को उसकी कुल सजा के समय में नहीं जोड़ा जाता, यानी कैदी को वह दिन दोबारा जेल में काटने पड़ते हैं। इसके विपरीत, फरलो पर बिताया गया समय कैदी की सजा के हिस्से के रूप में ही गिना जाता है, यानी उस दौरान की सजा को माफ मान लिया जाता है। साल 2022 के संशोधित कानून के तहत जब राम रहीम अपनी रेप केस की सजा का तीन-चौथाई हिस्सा पूरा कर लेगा, तब वह एक साथ चार हफ्ते की फरलो का हकदार बन जाएगा।

किन मामलों में मिली सजा और कहां से हुआ बरी?

गुरमीत राम रहीम को साल 2017 में अपनी दो महिला अनुयायियों (साध्वियों) के साथ यौन शोषण का दोषी पाए जाने पर 20 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद साल 2019 में पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या और साल 2021 में डेरा के पूर्व मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या की साजिश रचने के संगीन मामलों में भी उसे विशेष अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

हालांकि, कानूनी मोर्चे पर राम रहीम को बड़ी राहत भी मिली है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उसे साल 2024 में रंजीत सिंह मर्डर केस से और इसी साल 2026 में पत्रकार राम चंद्र छत्रपति मर्डर केस से पूरी तरह बरी कर दिया है। लेकिन रेप के मामले में सजा बरकरार होने के कारण वह जेल में ही रहेगा और इसी मामले के तहत उसे यह ताजा पैरोल दी गई है।

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