ताजपुर पोर्ट योजना रद्द, अब दादनपात्रबार में अडाणी समूह को मिलेगी 1700 एकड़ नई जमीन

ताजपुर पोर्ट योजना रद्द, अब दादनपात्रबार में अडाणी समूह को मिलेगी 1700 एकड़ नई जमीन

पश्चिम बंगाल की राजनीति और औद्योगिक गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने पूर्व मेदिनीपुर जिले में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी ताजपुर डीप-सी पोर्ट (गहरे समुद्र के बंदरगाह) परियोजना को लेकर एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला फैसला लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि पर्याप्त सरकारी जमीन की भारी कमी के कारण अब ताजपुर में इस मेगा पोर्ट का निर्माण करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं रह गया है। हालांकि, राज्य के औद्योगिक विकास को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह बंद करने के बजाय इसके विकल्प के तौर पर पास के ही दादनपात्रबार में स्थानांतरित करने का बड़ा प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री की अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) के प्रबंध निदेशक (MD) करण अडाणी के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक भी हो चुकी है।

ताजपुर में क्यों नामुमकिन हुआ पोर्ट का निर्माण? मुख्यमंत्री ने बताई असली वजह

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस मेगा प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत को स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल दावों से बंदरगाह नहीं बनते। उन्होंने करण अडाणी के साथ हुई बैठक का हवाला देकते हुए बताया कि अडाणी समूह पहले ही इस परियोजना की अव्यावहारिकता के कारण इससे दूरी बना चुका था, क्योंकि पूर्ववर्ती सरकार के पास वहां पर्याप्त जमीन ही नहीं थी। सीएम के अनुसार, किसी भी बड़े डीप-सी पोर्ट को सुचारू रूप से चलाने के लिए मजबूत रेल कनेक्टिविटी, विशाल गोदाम (Warehouses) और कई हजार एकड़ जमीन की सख्त जरूरत होती है, जो ताजपुर में उपलब्ध नहीं थी। राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के मार्गदर्शन में उद्योग सचिव वंदना यादव के विभाग द्वारा किए गए विस्तृत मूल्यांकन और सर्वे में भी यही बात सामने आई कि ताजपुर में बिना सरकारी जमीन के इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना पूरी तरह से नामुमकिन है।

दादनपात्रबार बनेगा नया औद्योगिक हब, अडाणी समूह को दिया गया 1,700 एकड़ का नया विकल्प

मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार राज्य में आने वाले इतने बड़े निवेश और विकास के सुनहरे मौके को किसी भी हाल में हाथ से जाने नहीं देगी। उन्होंने विकल्प की जानकारी देते हुए बताया कि ताजपुर से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दादनपात्रबार में एक बेहतरीन विकल्प मौजूद है, जहां पहले नमक का बड़ा कारखाना हुआ करता था। इस क्षेत्र में सरकार के पास लगभग 1,700 एकड़ की विशाल सरकारी जमीन उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने यह जमीन करण अडाणी को प्रोजेक्ट के लिए सुझाई है, जिस पर अडाणी समूह की तकनीकी टीम विचार करने के बाद अंतिम फैसला लेगी। यह महत्वपूर्ण घोषणा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर के साथ राज्य सचिवालय में हुई एक द्विपक्षीय बैठक के बाद की गई। मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार केंद्र के साथ राजस्व साझाकरण (Revenue Sharing) करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

टीएमसी सरकार के दौर में बना था 25 हजार करोड़ का यह पूरा खाका

गौरतलब है कि इस बेहद चर्चित ताजपुर डीप-सी पोर्ट परियोजना की पूरी परिकल्पना राज्य की तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में की गई थी। इस महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड पोर्ट प्रोजेक्ट के तहत करीब 15,000 करोड़ रुपये के सीधे निवेश का अनुमान लगाया गया था। इसके साथ ही, बंदरगाह से जुड़े अन्य बुनियादी ढांचों (Infrastructure) और औद्योगिक गलियारों के विकास से राज्य में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश आने की बड़ी उम्मीद थी। अक्टूबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद कोलकाता में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान करण अडाणी को इस प्रोजेक्ट के लिए आधिकारिक 'लेटर ऑफ इंटेंट' (LOI) सौंपा था, लेकिन तमाम सियासी दावों के बाद भी यह काम धरातल पर एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सका।

केंद्रीय मंजूरियों का पेंच और जून 2025 में रद्द हुआ था पुराना करार

सचिवालय के उच्च पदस्थ सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछली टीएमसी सरकार ने कभी भी सार्वजनिक रूप से अडाणी समूह के इस प्रोजेक्ट से पीछे हटने की बात को स्वीकार नहीं किया था। हकीकत यह थी कि सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी होने के बावजूद अडाणी समूह की कंपनी APSEZ को देश के केंद्रीय गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और जहाजरानी मंत्रालय से अनिवार्य सुरक्षा और तकनीकी मंजूरियां (Clearances) मिलने का लंबा इंतजार था, क्योंकि कंपनी इन संवेदनशील मंजूरियों के लिए आवश्यक कड़े मानकों को पूरा नहीं कर पा रही थी। इसी लंबी खींचतान और प्रशासनिक देरी के कारण अंततः जून 2025 में बंगाल कैबिनेट ने अडाणी समूह के साथ हुए पुराने करार को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया था, जिससे दोनों का चार साल पुराना जुड़ाव खत्म हो गया था। बाद में दिसंबर 2025 में 99 साल की लीज अवधि के साथ एक नया ग्लोबल टेंडर भी निकाला गया, जिसे राज्य की नोडल निवेश एजेंसी डब्ल्यूबीडीआईडीसी (WBIDC) ने निरस्त कर दिया था। अब मौजूदा शुभेंदु अधिकारी सरकार इस ठप पड़े प्रोजेक्ट को दादनपात्रबार की नई जमीन पर नए सिरे से पुनर्जीवित करने के मास्टर प्लान पर काम कर रही है।

 

 

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