राहुल गांधी और अभिजीत दीपके की दोहरी चुनौती: NDA का यह सीक्रेट प्लान बदलेगा पूरा गेम

राहुल गांधी और अभिजीत दीपके की दोहरी चुनौती: NDA का यह सीक्रेट प्लान बदलेगा पूरा गेम

देश की राजधानी नई दिल्ली का राजनीतिक पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है। एक तरफ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन निर्वाचन आयोग, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। वहीं दूसरी तरफ युवाओं के बीच सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक हलचल पैदा करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पर व्यापक प्रदर्शन का ऐलान कर केंद्र सरकार के लिए नई सिरदर्दी बन गए हैं। राजधानी में पिछले कुछ दिनों से लगातार तेज होते धरने, रैलियों और विरोध मार्च ने सत्ता के गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठे हैं। एनडीए खेमे ने इस दोतरफा दबाव से पार पाने के लिए बेहद सधी हुई त्रिस्तरीय रणनीति तैयार कर ली है।

कानूनी सीमाओं का हवाला और आक्रामक संचार रणनीति

भाजपा के शीर्ष रणनीतिकारों ने सबसे पहले नैरेटिव की जंग जीतने पर जोर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं की पूरी फौज मैदान में उतार दी गई है, जो सीधे तौर पर यह तर्क रख रही है कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर करने का षड्यंत्र रच रहा है। भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और अगर किसी दल को मतदाता सूची अथवा प्रक्रिया पर कोई आपत्ति है, तो सड़कों पर हंगामा करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया और आयोग के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए। भाजपा नेताओं ने दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और सामान्य जनजीवन बाधित होने के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है। पार्टी का सीधा संदेश है कि विपक्ष लोकतंत्र बचाने के नाम पर दिल्ली में अराजकता और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश कर रहा है, जिससे आम जनता को कोई सरोकार नहीं है।

जमीनी जनसंपर्क और सेवा संकल्प अभियान का सुरक्षा कवच

विपक्ष के सड़क आंदोलनों का असर चुनावी जमीन पर न पड़े, इसके लिए भाजपा ने अपने संगठनात्मक ढांचे को सक्रिय कर दिया है। पार्टी ‘सेवा संकल्प अभियान’ और व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए सीधे मतदाताओं के दरवाजे तक पहुंच रही है। विशेष रूप से युवा वर्ग, जिसे अभिजीत दीपके अपने आंदोलनों से आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, उस तक पहुंचने के लिए भाजपा की युवा विंग ने कॉलेज परिसरों और मोहल्लों में संवाद कार्यक्रम तेज कर दिए हैं। पार्टी का मानना है कि विपक्ष के विरोध का प्रभाव सिर्फ लुटियंस दिल्ली और सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों तक ही सीमित है। ऐसे में धरातल पर कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों और स्थानीय मुद्दों से सीधे जुड़कर विपक्ष के किसी भी संभावित नकारात्मक माहौल को बनने से पहले ही बेअसर किया जा सकता है।

सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों पर मजबूत पकड़

रणनीति का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा राज्यों के सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को साधे रखना है। एनडीए नेतृत्व इस बात को भली-भांति समझता है कि चुनावों की असली लड़ाई जातियों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के जोड़-तोड़ पर लड़ी जाती है। यही वजह है कि गठबंधन के सहयोगी दलों को पूरी तरह से लामबंद रखा गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सहित कई प्रमुख सहयोगी नेताओं ने विपक्ष के रवैये को खारिज करते हुए एनडीए की एकजुटता का स्पष्ट संदेश दिया है। बिहार, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्यों में एनडीए अपने कोर वोटर बेस, खासकर ओबीसी, दलित और ग्रामीण मतदाताओं को आश्वस्त करने में जुटा है। पार्टी नेताओं का आकलन है कि जब तक जमीनी सामाजिक समीकरण एनडीए के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं, तब तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगने वाले नारों का असर चुनावी नतीजों पर नहीं पड़ेगा।

राहुल गांधी का आक्रामक राजनीतिक रुख और अभिजीत दीपके का युवा आक्रोश भले ही दिल्ली के सत्ता तंत्र के सामने चुनौतियां पेश कर रहा हो, लेकिन एनडीए अपने संगठन की ताकत, आक्रामक प्रवक्ताओं के चक्रव्यूह और जमीनी समीकरणों के दम पर इस सियासी तूफान का रुख मोड़ने की पूरी तैयारी कर चुका है।