उस्मान ख्वाजा ला रहे हैं आत्मकथा 'सब्र', 2018 के बॉल टैंपरिंग कांड पर हो सकते हैं नए खुलासे
सिडनी/मेलबर्न। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के दिग्गज सलामी बल्लेबाज और देश के पहले मुस्लिम टेस्ट क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा (Usman Khawaja) अपनी बहुप्रतीक्षित आत्मकथा (Autobiography) लेकर आ रहे हैं। पेंगुइन बुक्स द्वारा प्रकाशित की जा रही इस किताब का नाम 'सब्र: फाइंडिंग माई वे इन क्रिकेट एंड लाइफ' (Sabr: Finding My Way in Cricket and Life) रखा गया है, जो नवंबर में रिलीज होने जा रही है। इस किताब के ऐलान के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई और विश्व क्रिकेट में एक बार फिर 2018 के कुख्यात 'सैंडपेपरगेट' (बॉल टैंपरिंग कांड) के काले पन्नों के खुलने की आशंका तेज हो गई है। ख्वाजा उस समय केपटाउन के न्यूलैंड्स ड्रेसिंग रूम में मौजूद थे, ऐसे में माना जा रहा है कि इस किताब में उस विवाद से जुड़े कई अनसुलझे और अनसुने पहलुओं से पर्दा उठ सकता है।
पैट कमिंस से मिले ख्वाजा, कप्तान ने कहा- 'हमें डरने की जरूरत नहीं'
किताब के प्रकाशन से पहले उस्मान ख्वाजा ने ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट कप्तान पैट कमिंस और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी टॉड ग्रीनबर्ग से मुलाकात कर उन्हें किताब के प्रमुख विषयों को लेकर पहले ही अवगत करा दिया है।
इस मुलाकात और किताब में बॉल टैंपरिंग के संभावित खुलासों पर जब पैट कमिंस से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत सहज अंदाज में जवाब दिया:
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'अपनी कहानी बयां करने का पूरा हक': कमिंस ने कहा, 'उजी (उस्मान ख्वाजा) ने कुछ हफ्ते पहले मुझसे बात की थी और बताया था कि वे एक किताब ला रहे हैं। उन्होंने ज्यादा बारीकियां साझा नहीं कीं, बस जानकारी दी। मेरा जवाब हमेशा की तरह यही था— कोई बात नहीं, यह आपकी कहानी है और आप इसे अपने नजरिए से बता सकते हैं।'
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'एक टीम के तौर पर हम आगे बढ़ चुके हैं': जब कमिंस से पूछा गया कि क्या उस टेस्ट में खेलने वाले गेंदबाजों पर कोई नए सवाल खड़े हो सकते हैं, तो कमिंस ने साफ किया, 'यह घटना बहुत पुरानी हो चुकी है। उस समय सारी जांच पूरी हो चुकी थी और मैंने हर सवाल का लाखों बार जवाब दिया है। हम एक ग्रुप के तौर पर उस अध्याय से बहुत आगे निकल चुके हैं और मेरा पूरा ध्यान टीम की कप्तानी करने पर है।'
सैंडपेपरगेट: क्यों ख्वाजा की किताब से मची है खलबली?
मार्च 2018 में दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन टेस्ट में कैमरून बैनक्रॉफ्ट को सैंडपेपर (रेगमाल) से गेंद को खुरचते हुए कैमरे पर पकड़ा गया था:
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तीन खिलाड़ियों पर लगा था बैन: इसके बाद तत्कालीन कप्तान स्टीव स्मिथ और उपकप्तान डेविड वॉर्नर को 1-1 साल के लिए, जबकि बैनक्रॉफ्ट को 9 महीने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था।
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ड्रेसिंग रूम का राज: क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की जांच में यह दावा किया गया था कि इस योजना की जानकारी केवल इन तीन खिलाड़ियों को थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में बैनक्रॉफ्ट और वॉर्नर के खेमे की ओर से ऐसे इशारे किए गए थे कि गेंदबाजों और टीम के बाकी सदस्यों को भी इसकी जानकारी थी।
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ख्वाजा का अनूठा नजरिया: ख्वाजा उस पूरी सीरीज में खेल रहे थे और डेविड वॉर्नर के करीबी दोस्त भी रहे हैं। खास बात यह है कि ख्वाजा ने इस किताब को लिखने के लिए किसी 'घोस्टराइटर' (Ghostwriter) की मदद नहीं ली है, बल्कि उन्होंने हर शब्द खुद लिखा है। ऐसे में क्रिकेट फैंस यह जानने को बेताब हैं कि उस कुख्यात दिन ड्रेसिंग रूम का असल माहौल क्या था।
लॉर्ड्स का विवाद, जस्टिन लैंगर और नस्लवाद पर भी बेबाक राय
ख्वाजा की यह 448 पन्नों की आत्मकथा केवल बॉल टैंपरिंग तक सीमित नहीं रहने वाली है:
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लॉर्ड्स लॉन्ग रूम विवाद (2023 एशेज): जॉनी बेयरस्टो के रन आउट के बाद लॉर्ड्स के पवेलियन में एमसीसी (MCC) सदस्यों के साथ हुई ख्वाजा की तीखी बहस का आंखों देखा हाल इसमें शामिल होगा।
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जस्टिन लैंगर का जाना: पूर्व मुख्य कोच जस्टिन लैंगर को हटाए जाने के समय टीम के भीतर की खींचतान पर ख्वाजा का दृष्टिकोण सामने आएगा।
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पहचान, नस्लभेद और फलस्तीन मुद्दा: पाकिस्तान के इस्लामाबाद में जन्म, सिडनी में परवरिश और ऑस्ट्रेलियाई टीम में रंग व नस्ल के आधार पर झेले गए संघर्षों पर भी वे खुलकर बात करेंगे। हाल के दिनों में फलस्तीनी नागरिकों के समर्थन में जूते पर संदेश लिखने को लेकर आईसीसी के साथ हुए विवाद का सच भी इस किताब में दर्ज होगा।
ख्वाजा का यह खेल संस्मरण रिलीज होने से पहले ही चर्चाओं के केंद्र में है। अब देखना होगा कि जब नवंबर में 'सब्र' पाठकों के हाथों में पहुंचेगी, तो यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के पुराने जख्मों को कुरेदती है या उनके जीवन के प्रेरणादायी सफर को नई पहचान दिलाती है।