दुनिया ने माना भारतीय सेना का लोहा, दक्षिण सूडान में 565 जांबाज 'ब्लू हेल्मेट्स' को मिला प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र मेडल, देश का बढ़ाया मान

दुनिया ने माना भारतीय सेना का लोहा, दक्षिण सूडान में 565 जांबाज 'ब्लू हेल्मेट्स' को मिला प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र मेडल, देश का बढ़ाया मान

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का सीना एक बार फिर गर्व से चौड़ा हो गया है और वैश्विक शांति स्थापना के प्रयासों में भारतीय सेना का डंका पूरी दुनिया में बजा है। अफ्रीकी देश दक्षिण सूडान (South Sudan) में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (UNMISS) के तहत तैनात 565 भारतीय जांबाज शांति सैनिकों को उनकी उत्कृष्ट, निस्वार्थ सेवा, कर्तव्यपरायणता और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पदक (UN Medal) से सम्मानित किया गया है। भारत के लिए इस दोहरे गौरव की बात यह है कि सम्मानित होने वाले इन वीर जवानों में 53 महिला सैन्यकर्मी भी शामिल हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अदम्य साहस का परिचय दिया।

वीरता के साथ मानवीय सेवा की मिसाल: पशु चिकित्सा शिविर से लेकर आत्मरक्षा ट्रेनिंग तक जीता दिल

संयुक्त राष्ट्र (UN) निकाय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय शांति सैनिकों को यह सर्वोच्च सम्मान सूडान के अशांत क्षेत्रों में लगातार गश्त (पेट्रोलिंग) के माध्यम से मासूम नागरिकों की रक्षा करने और स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव बढ़ाने के लिए दिया गया है। भारतीय सैनिकों ने न केवल सीमाओं की रक्षा की, बल्कि वहां के नागरिकों का दिल जीतने के लिए बड़े पैमाने पर मुफ़्त पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किए, सूडानी महिलाओं के लिए आत्मरक्षा (Self Defense) ट्रेनिंग सत्र चलाए, लैंगिक हिंसा (जेंडर वॉयलेंस) के खिलाफ कड़ा अभियान चलाया और सुदूर इलाकों तक मानवीय सहायता व रसद की पहुंच को सुगम बनाया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि हमारे 'ब्लू हेल्मेट्स' ने व्यावसायिकता के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है और पूरे देश को उनकी इस बेमिसाल सेवा पर गर्व है।

जानिए कौन होते हैं 'ब्लू हेल्मेट्स'? शांति की वेदी पर भारत ने दिया है सबसे बड़ा बलिदान

आम तौर पर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर 'ब्लू हेल्मेट्स' (Blue Helmets) कौन होते हैं? दरअसल, यह उन वीर सैन्य कर्मियों, पुलिस अधिकारियों और नागरिक विशेषज्ञों को दिया गया एक वैश्विक नाम है, जो संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की कमान के तहत दुनिया के सबसे अशांत और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में शांति बहाल करने का काम करते हैं। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत का इतिहास बेहद गौरवशाली, अनुकरणीय और लंबा रहा है। वर्तमान में नेपाल के बाद भारत पूरी दुनिया में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे ज्यादा वर्दीधारी सैन्य और पुलिसकर्मियों का योगदान देने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। लेकिन इस वैश्विक शांति की वेदी पर भारत ने सबसे बड़ी कीमत भी चुकाई है; अब तक कर्तव्य की वेदी पर देश के लगभग 180 भारतीय शांति सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान (शहादत) दिया है, जो किसी भी देश द्वारा दी गई शहादतों में सबसे अधिक है।

दुनिया के इन अशांत कोनों में तैनात हैं 4200 से अधिक भारतीय शूरवीर, बेटियां भी रच रही हैं इतिहास

भारत के सैन्य शौर्य का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में देश के 4,200 से अधिक जांबाज सैन्य और पुलिस कर्मी संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न वैश्विक मिशनों में चौबीसों घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें 155 महिला शक्ति (महिला कर्मी) भी शामिल हैं। भारतीय सैनिक इस समय केवल दक्षिण सूडान में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य अत्यधिक संवेदनशील और खतरनाक इलाकों जैसे एबेई (Abyei), मध्य अफ़्रीकी गणराज्य (CAR), साइप्रस, कांगो, लेबनान, मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व), सोमालिया और पश्चिमी सहारा के शांति मिशनों में मुस्तैदी से डटे हुए हैं। भारतीय सैनिकों की इस ताजा वैश्विक उपलब्धि ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब भी विश्व शांति और मानवता की रक्षा की बात आएगी, भारत हमेशा सबसे आगे खड़ा मिलेगा।

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