मोदी कैबिनेट में महाफेरबदल की सुगबुगाहट: जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद दिल्ली में हलचल तेज, इन मंत्रियों की कुर्सी पर संकट
केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के तीसरे कार्यकाल में संभावित कैबिनेट विस्तार और बड़े फेरबदल की अटकलें अचानक बेहद तेज हो गई हैं। लुटियंस दिल्ली के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा आम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही अपनी टीम का 'प्रोग्रेस कार्ड' देखकर मंत्रियों की छुट्टी या उनके विभागों में बड़ा बदलाव कर सकते हैं। हाल ही में केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और उसके तुरंत बाद पीएम मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई मुलाकात ने इन चर्चाओं को पूरी तरह हवा दे दी है।
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे ने दी बड़े फेरबदल की आहट
मोदी मंत्रिपरिषद में शामिल एकमात्र ईसाई चेहरा और केरल भाजपा के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार भी कर लिया है। दरअसल, वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे और उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद पार्टी ने उन्हें दोबारा उच्च सदन नहीं भेजने का फैसला किया। इसी संवैधानिक मजबूरी के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। कुरियन के इस एग्जिट के बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि अब पूरी कैबिनेट को री-शफल (Reshuffle) किया जाएगा।
रवनीत सिंह बिट्टू के भविष्य पर भी सस्पेंस बरकरार
पंजाब से आने वाले केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की स्थिति भी इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है। जॉर्ज कुरियन की तरह रवनीत सिंह बिट्टू का भी राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है और उन्हें भी दोबारा उच्च सदन का टिकट नहीं मिला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब के आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए भाजपा नेतृत्व बिट्टू को सरकार से मुक्त कर राज्य संगठन में कोई बहुत बड़ी और अहम जिम्मेदारी सौंप सकता है।
'एक व्यक्ति, एक पद' नीति: पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा की हो सकती है छुट्टी!
भाजपा हमेशा से सांगठनिक स्तर पर 'वन मैन, वन पोस्ट' (एक व्यक्ति, एक पद) की नीति की वकालत करती रही है। हाल ही में हुए सांगठनिक बदलावों के तहत:
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पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
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हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा की कमान सौंपी गई है।
चूंकि ये दोनों नेता वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं, इसलिए नीति के मुताबिक यह लगभग तय माना जा रहा है कि संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद ये दोनों नेता जल्द ही मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे सकते हैं।
परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड के आधार पर तय होगा मंत्रियों का भविष्य
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कुछ दिनों में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज और उनकी प्रगति की बेहद बारीकी से समीक्षा (Performance Review) की है। इस दौरान मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों की प्रस्तुतियां (Presentations) पीएम के सामने रखी थीं। जिन मंत्रियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है या उनके भारी-भरकम विभागों को हल्का किया जा सकता है।
नए चेहरों की एंट्री: पश्चिम बंगाल, पंजाब और महाराष्ट्र पर विशेष फोकस
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन इस समय संगठन को नया और युवा रूप देने के लिए लगातार मंथन कर रहे हैं। आने वाले समय में कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधे जाएंगे:
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पश्चिम बंगाल: राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बंगाल को मोदी सरकार में इस बार अधिक और मजबूत प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
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महाराष्ट्र और पंजाब: सहयोगी दलों को संतुष्ट करने और सूबे के समीकरण दुरुस्त करने के लिए कुछ नए चेहरों की कैबिनेट में सरप्राइज एंट्री हो सकती है।
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उत्तर प्रदेश: अगले साल होने वाले चुनावों के मद्देनजर यूपी को भी कुछ नए मंत्री मिल सकते हैं, जबकि हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा जैसी सीनियर लीडरशिप के राज्यसभा कार्यकाल (जो नवंबर में खत्म हो रहा है) पर भी सबकी नजरें टिकी हैं।
बाहर होने वाले मंत्रियों को मिल सकती है राजभवन की जिम्मेदारी
चर्चा इस बात की भी है कि जो सीनियर नेता अपनी उम्र, स्वास्थ्य या खराब रिपोर्ट कार्ड के कारण कैबिनेट से बाहर किए जाएंगे, उन्हें पार्टी पूरी तरह दरकिनार नहीं करेगी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड जैसे बड़े राज्यों में राज्यपालों का कार्यकाल या तो पूरा हो चुका है या समाप्ति की ओर है। ऐसे में मंत्रिमंडल से हटाए जाने वाले कुछ वरिष्ठ चेहरों को विभिन्न राज्यों का राज्यपाल या विदेशों में राजदूत बनाकर भेजा जा सकता है।