डीके शिवकुमार की ताजपोशी से पहले कर्नाटक कांग्रेस में मची भारी रार! सीएम की कुर्सी मिलने से पहले ही विधायकों ने मल्लिकार्जुन खरगे से मांग लिए 3 मंत्री पद, जानें पूरा सियासी खेल

डीके शिवकुमार की ताजपोशी से पहले कर्नाटक कांग्रेस में मची भारी रार! सीएम की कुर्सी मिलने से पहले ही विधायकों ने मल्लिकार्जुन खरगे से मांग लिए 3 मंत्री पद, जानें पूरा सियासी खेल

कर्नाटक की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद जहां एक तरफ प्रदेश के कद्दावर नेता और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की गद्दी सौंपने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के भीतर ही भारी गुटबाजी और कुर्सी की जंग शुरू हो गई है। डीके शिवकुमार ने अभी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली भी नहीं है कि विधायकों और पार्टी नेताओं ने नई कैबिनेट में अपनी जगह पक्की करने के लिए दिल्ली दरबार में लॉबिंग तेज कर दी है। इस सियासी घमासान के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पास एक ऐसा पत्र पहुंचा है जिसने हाईकमान की टेंशन बढ़ा दी है।

कोलार के 7 बड़े नेताओं ने दिल्ली में डाला डेरा, खरगे को पत्र लिखकर की ये बड़ी मांग

कर्नाटक के कोलार जिले के सात रसूखदार कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली पहुंचकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की और उन्हें एक संयुक्त पत्र सौंपा है। इस पत्र के जरिए कोलार के नेताओं ने सीधे तौर पर आलाकमान को अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि डीके शिवकुमार के नए मंत्रिमंडल में कोलार जिले को कम से कम तीन मंत्री पद मिलने ही चाहिए। इस प्रतिनिधिमंडल में तीन मौजूदा विधायक, दो विधान परिषद सदस्य (MLC) और दो अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं, जिन्होंने सामूहिक रूप से आलाकमान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

इन तीन विधायकों को कैबिनेट में शामिल करने की उठी पुरजोर मांग, कोटे का भी दिया हवाला

खरगे को सौंपे गए पत्र में कोलार के नेताओं ने साफ तौर पर तीन चेहरों को नई कैबिनेट में शामिल करने की पैरवी की है और इसके पीछे जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का तर्क दिया है।

  • एसएन नारायणस्वामी: बंगारपेट विधानसभा सीट से विधायक नारायणस्वामी के लिए नेताओं ने 'दलित' कोटे के तहत कैबिनेट मंत्री बनाने की मांग रखी है।

  • केवाई नन्जेगौड़ा: मालूर सीट से कांग्रेस विधायक नन्जेगौड़ा को सामान्य कोटे से मंत्री पद देने का दबाव बनाया जा रहा है।

  • कोथुर जी मंजूनाथ: कोलार विधानसभा सीट से विधायक मंजूनाथ को भी सामान्य कोटे से कैबिनेट बर्थ देने की मांग मजबूती से उठाई गई है।

इस पत्र को सौंपने वाले नेताओं में इन तीनों विधायकों के अलावा एमएलसी नसीर अहमद, एमएलसी अनिल कुमार, मुलबगल सीट से चुनाव लड़ चुके वी आदि नारायण और कोलार जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष के चंद्र रेड्डी शामिल हैं। इस एकजुटता ने साफ कर दिया है कि नई सरकार के गठन से पहले कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह तेज हो सकती है।

सिद्धारमैया बने कार्यवाहक मुख्यमंत्री, राज्यपाल ने मंजूर किया इस्तीफा

कर्नाटक का यह पूरा सियासी ड्रामा एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन के बीच हो रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कल ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से डीके शिवकुमार का नया मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। शुक्रवार को राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने आधिकारिक तौर पर सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और उनके मंत्रिमंडल को भंग कर दिया है। हालांकि, राजभवन की अधिसूचना के अनुसार, जब तक राज्य में नई वैकल्पिक व्यवस्था यानी नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण नहीं हो जाता, तब तक सिद्धारमैया ही कार्यवाहक मुख्यमंत्री (Caretaker CM) के रूप में सरकार की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे।

सतीश जारकीहोली के दफ्तर से हटी नेमप्लेट, डिप्टी सीएम या प्रदेश अध्यक्ष बनने की अटकलें तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सिद्धारमैया सरकार में बेहद ताकतवर मंत्री रहे सतीश जारकीहोली को लेकर भी सस्पेंस गहरा गया है। बेंगलुरु में उनके दफ्तर के बाहर लगी नेमप्लेट को अचानक सफेद कागज से ढक दिया गया है और उनके सरकारी वाहन से कर्नाटक सरकार का आधिकारिक प्रतीक चिह्न (लोगो) भी हटा हुआ देखा गया। इस हैरान करने वाले वाक्ये के बाद कर्नाटक के सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या जारकीहोली नई सरकार में बनने वाले चार संभावित उप-मुख्यमंत्रियों में से एक होने वाले हैं, या फिर डीके शिवकुमार के सीएम बनने के बाद उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया जा रहा है।

 

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