जहां दलितों ने किया प्रदर्शन, वहां हल्दी-दूध और गोमूत्र छिड़ककर किया 'शुद्धिकरण'; तेलंगाना के पेद्दापल्ली में फूटा भारी आक्रोश
तेलंगाना के पेद्दापल्ली (Peddapalli) जिले के मंथनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मुथाराम मंडल से सामाजिक भेदभाव और छुआछूत की बेहद गंभीर व संवेदनशील घटना सामने आई है। इलाके में दलित समुदाय और बहुजन संगठनों द्वारा अपनी मांगों को लेकर किए गए एक शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के कुछ ही घंटों बाद, स्थानीय प्रभावशाली लोगों द्वारा उन सड़कों और प्रदर्शन स्थल का 'शुद्धिकरण' (Purification) करने का मामला सामने आया है।
मिली जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के हटने के तुरंत बाद कुछ लोगों ने ट्रैक्टर और बर्तनों में दूध, हल्दी, गोबर और गोमूत्र भरकर पूरी सड़क, धरना स्थल और आसपास के रास्तों पर छिड़काव किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पूरे तेलंगाना में भारी रोष फैल गया है और नागरिक अधिकार व दलित संगठनों ने इसे 21वीं सदी में छुआछूत की घिनौनी मानसिकता करार देते हुए कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
क्या था पूरा विवाद और क्यों हुआ था दलित समुदाय का प्रदर्शन?
इस पूरे तनाव की शुरुआत स्थानीय स्तर पर जमीन, कल्याणकारी योजनाओं के आवंटन और एक स्थानीय विवाद को लेकर हुई थी:
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दलित समाज और स्थानीय बहुजन कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर मुथाराम मंडल मुख्यालय और मुख्य चौराहे पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया था।
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प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन और प्रभावशाली गुटों के कथित भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ नारे लगाए और ज्ञापन सौंपा।
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प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त होने के बाद जब प्रदर्शनकारी अपने-अपने घरों को लौट गए, तो उसके कुछ देर बाद एक खास समूह मौके पर पहुंचा और उन्होंने सड़क को "अपवित्र" बताते हुए दूध, हल्दी का पानी और गोमूत्र छिड़कना शुरू कर दिया।
'सड़क को अपवित्र बताकर धोया': वायरल वीडियो पर फूटा गुस्सा
सड़क पर दूध और हल्दी छिड़कने का वीडियो स्थानीय लोगों ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुछ लोग बाल्टियों और स्प्रेयर की मदद से सड़क के चप्पे-चप्पे पर पानी और हल्दी का मिश्रण गिरा रहे हैं।
दलित अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल सफाई का मामला नहीं था, बल्कि खुलेआम यह संदेश देने की कोशिश थी कि दलितों के चलने और बैठने से सार्वजनिक सड़क 'अपवित्र' हो गई है। इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन) और मानवीय गरिमा पर सीधा हमला बताते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत, SC/ST एक्ट के तहत जांच शुरू
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया।
दलित संगठनों और स्थानीय नेताओं ने मुथाराम थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया है कि यह कृत्य जानबूझकर एक पूरे समुदाय को अपमानित करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के मकसद से किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC/ST Act की सुसंगत धाराओं और शांति भंग करने के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया
इस घटना ने तेलंगाना के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, मानवाधिकार संगठनों और नागरिक मंचों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है।
नेताओं ने कहा कि तेलंगाना जैसे राज्य में, जो सामाजिक न्याय और समानता के आंदोलनों की धरती रहा है, वहां ऐसी जातिवादी और सामंती मानसिकता का सिर उठाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त और त्वरित दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो जिला स्तर से लेकर राज्य मुख्यालय तक व्यापक विरोध-प्रदर्शन किए जाएंगे।