4 साल से स्थिर पेट्रोल-डीजल के दाम क्या अब बदलेंगे? सरकार के इस बयान ने बढ़ा दी है देश में हलचल

4 साल से स्थिर पेट्रोल-डीजल के दाम क्या अब बदलेंगे? सरकार के इस बयान ने बढ़ा दी है देश में हलचल

Up kiran, Digital Desk : वैश्विक स्तर पर जारी ऊर्जा संकट और युद्ध के हालातों के बीच भारत में ईंधन की कीमतों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि जहां दुनिया भर में तेल की कीमतें 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ गईं, वहीं भारत ने पिछले चार वर्षों से कीमतों को स्थिर रखकर एक मिसाल कायम की है। हालांकि, मंत्री के ताजा बयान ने भविष्य की चुनौतियों और तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव की ओर भी इशारा किया है।

दुनिया भर में हाहाकार, पर भारत में कीमतें क्यों नहीं बढ़ीं?

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक हालिया कार्यक्रम में वैश्विक स्थिति की तुलना करते हुए बताया कि कई बड़े देश आपूर्ति और उपलब्धता के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा, "पिछले चार वर्षों में भारत में ईंधन की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।" पुरी के अनुसार, यह सरकार की मजबूत रणनीति का ही परिणाम है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर जारी तनाव और रुकावटों के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को वैश्विक महंगाई की तपिश से बचाकर रखा गया है।

संकट को अवसर में बदला: LPG उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़त

होर्मुज जलडमरूमध्य में पिछले 75 दिनों से जारी अनिश्चितता को भारत ने एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया है। मंत्री ने जानकारी दी कि जब 28 फरवरी को यह संकट शुरू हुआ, तब आपूर्ति को लेकर चिंताएं थीं। लेकिन भारत ने घरेलू एलपीजी उत्पादन को युद्ध स्तर पर बढ़ा दिया। जो उत्पादन पहले 36,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन था, उसे अब बढ़ाकर 54,000 मीट्रिक टन कर दिया गया है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद भी देश में रसोई गैस की किल्लत नहीं होने दी गई।

बैकअप प्लान तैयार: 60 दिनों का तेल और गैस भंडार सुरक्षित

देश की ऊर्जा सुरक्षा पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया कि भारत के पास वर्तमान में पर्याप्त से भी अधिक स्टॉक मौजूद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास 60 दिनों की जरूरतों के लिए कच्चा तेल (Crude Oil), 60 दिनों के लिए LNG और 45 दिनों का LPG भंडार रिजर्व में है। मंत्री ने आश्वस्त किया कि वर्तमान में आपूर्ति पक्ष (Supply Side) से जुड़ी कोई समस्या नहीं है और नागरिक किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

तेल कंपनियों की चिंता: रोजाना 1,000 करोड़ रुपये का घाटा

भले ही जनता को राहत मिल रही हो, लेकिन पर्दे के पीछे सरकारी तेल कंपनियां भारी वित्तीय बोझ तले दबी हुई हैं। मंत्री पुरी ने खुलासा किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों और घरेलू बाजार में स्थिर दामों के कारण तेल कंपनियों को हर दिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कंपनियों की अब तक की कुल भरपाई न हो पाने वाली रकम (Under-recoveries) 1.98 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है।

मंत्री की अपील: घबराहट नहीं, संयम की है जरूरत

मौसम में बदलाव के कारण वर्तमान में LPG की मांग 90,000 मीट्रिक टन से घटकर 75,000 मीट्रिक टन पर आ गई है, जिससे थोड़ी राहत जरूर मिली है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने देशवासियों से अपील की है कि वे पैनिक न फैलाएं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि वैश्विक संकट और अधिक लंबा खिंचता है, तो भविष्य में कुछ गतिविधियों में स्वेच्छा से संयम बरतने की आवश्यकता पड़ सकती है। सरकार हर पल स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए है ताकि आम आदमी पर बोझ कम से कम पड़े।

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