क्या भारत में फिर लगेगा लॉकडाउन? ईरान-इजरायल युद्ध के बीच गहराया ऊर्जा संकट, पीएम मोदी की देशवासियों से खास अपील
पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। 28 फरवरी से शुरू हुआ ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच का संघर्ष अब एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि यह जंग भीषण रूप लेती है, तो खाड़ी देशों से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है। इसी बीच, देश में लॉकडाउन लगने की अफवाहों पर सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
क्या वाकई देश में लॉकडाउन जैसे हालात हैं?
सोशल मीडिया पर चल रही लॉकडाउन की खबरों के बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि ऐसी खबरें महज अफवाह हैं। सरकार ने स्पष्ट रूप से 'राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन' के किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। जानकारों के मुताबिक, यह कोई स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि एक आर्थिक और ऊर्जा संकट (Energy Crisis) है, जिससे निपटने के लिए लॉकडाउन की नहीं, बल्कि समझदारी और बचत की जरूरत है।
पीएम मोदी का 'बचत मंत्र' और देशवासियों से आह्वान
संकट की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से कुछ कड़े लेकिन जरूरी कदम उठाने की अपील की है। पीएम ने लोगों से आग्रह किया है कि:
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ईंधन की बचत: पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए निजी वाहनों के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करें।
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आयात पर लगाम: विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए एक साल तक सोने (Gold) की खरीदारी और अनावश्यक विदेश यात्राओं को टाल दें।
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स्वदेशी पर जोर: जितना हो सके घरेलू उत्पादों का उपयोग करें ताकि अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहे।
राज्यों के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' और 'सोलर' का विकल्प
आर्थिक विशेषज्ञों का सुझाव है कि राज्य सरकारें ईंधन की खपत कम करने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्रों में 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) को दोबारा शुरू कर सकती हैं। इसके अलावा, गैस संकट से निपटने के लिए इलेक्ट्रिक और सोलर कुकरों पर सब्सिडी बढ़ाना एक प्रभावी कदम हो सकता है। पाइप नेचुरल गैस (PNG) के विस्तार और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करके भी इस संकट का सामना किया जा सकता है।
बिजली और उद्योग जगत के लिए नई रणनीति
ऊर्जा बचाने के लिए राज्यों को ऊर्जा संरक्षण अभियान चलाने की जरूरत है। उद्योगों में नाइट शिफ्ट को बढ़ावा देने और गैर-जरूरी यूनिट्स की शिफ्ट कम करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। रिन्यूएबल एनर्जी और सोलर पंपों पर जोर देकर खेती में डीजल की खपत कम की जा सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य आपसी तालमेल से काम करें, तो भारत इस चुनौती को एक अवसर में बदलकर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है।